उदयपुर में अब कचरा सड़क पर डाला तो भरना होगा जुर्माना,निगम आयुक्त ने जारी किए आदेश
उदयपुर। भारत सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में दिनांक 08 अप्रैल 2016 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम–2016 अधिसूचना जारी की गई थी। इन नियमों का उद्देश्य शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक, पर्यावरण अनुकूल एवं व्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित करना था। बनाए गए नियमों में धारा 4 में प्रत्येक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करने वालों के कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया था, जिनकी पालना प्रत्येक नागरिक, संस्था एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान के लिए अनिवार्य है लेकिन धरातल पर कही कमी नजर आ रही है इसी को लेकर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने स्पष्ट किया है कि शहर में सड़क पर कचरा फैला कर गंदगी करने वालो के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम–2016 के अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति, परिवार, दुकान, होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, कार्यालय, औद्योगिक प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्था, विवाह स्थल, मॉल, बहुमंजिला परिसर अथवा स्ट्रीट वेंडर यदि किसी भी प्रकार का ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करता है, तो वह उसका स्वयं उत्तरदायी होगा एवं नियमों के अनुसार अपशिष्ट का पृथक्करण, भंडारण एवं निस्तारण सुनिश्चित करेगा। कचरा उत्पन्न करने वालों के स्तर पर ही गिले एवं सूखे कचरे का पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। हाला कि नियमों में कचरे को कई श्रेणियों में विभक्त किया गया है और उसका निस्तारण कैसे किया जाना है यह भी स्पष्ट किया गया है जैसे गीला कचरा
इस श्रेणी में बचा हुआ भोजन, किचन वेस्ट, सब्जियों एवं फलों के छिलके, खराब फल-सब्जियां, खराब खाद्यान्न एवं अन्य जैविक अपशिष्ट सम्मिलित हैं। इस प्रकार के कचरे को प्लास्टिक ड्रम अथवा ढक्कनदार पात्र में एकत्र कर नगर निगम अथवा अधिकृत एजेंसी को उपलब्ध कराना अनिवार्य है। सूखा कचरा
खाली प्लास्टिक थैलियां, कागज, गत्ता, खाली डिब्बे, प्लास्टिक बोतलें, पैकेजिंग सामग्री आदि को सूखे कचरे की श्रेणी में रखा गया है। इस कचरे को पृथक डस्टबीन में एकत्र कर गारबेज बैग अथवा कंटेनर में भरकर नगर निगम को सौंपा जाना आवश्यक है। व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से हरा नारियल अपशिष्ट से उत्पन्न अपशिष्ट को अन्य कचरे से पृथक एकत्र कर प्लास्टिक या जूट के बड़े बैग में भरकर नगर निगम को उपलब्ध कराना अनिवार्य है। उद्यान एवं गार्डन वेस्ट में पेड़-पौधों की पत्तियां, टहनियां, घास, होटल एवं विवाह आयोजनों में प्रयुक्त सजावटी फूल एवं गार्डन वेस्ट को अलग से एकत्र कर गारबेज बैग में नगर निगम को देना होगा। इसके अतिरिक्त, बल्क वेस्ट जनरेटर (प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले) को अपने संस्थान में ही गार्डन वेस्ट का उपचार कर खाद बनाना एवं उसका उपयोग करना अनिवार्य है।
राजस्थान सरकार द्वारा किया गया है उपविधियों का गठन
निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के अनुसार राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग द्वारा अधिसूचना संख्या प 8(ग) (ठोस अपशिष्ट) नियम/डी.एल.बी./2019/26213, दिनांक 12.04.2019 के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु उपविधियाँ बनाई गई हैं। इन उपविधियों के अंतर्गत कचरा संग्रहण हेतु यूजर चार्ज का निर्धारण किया गया है तथा नियमों के उल्लंघन पर विभिन्न श्रेणियों में जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
नियम उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। जुर्माने ने किसी भी व्यक्ति द्वारा अपने भवनों के बाहर सड़क अथवा गली में कचरा फैलाने पर ₹100 प्रतिदिन,
दुकानदारों द्वारा कचरा डालने पर ₹1000 प्रतिदिन
रेस्टोरेंट मालिकों द्वारा खुला कचरा डालने पर ₹2000 प्रतिदिन
होटल मालिकों द्वारा कचरा फैलाने पर ₹2000 प्रतिदिन
औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा कचरा डालने पर ₹5000 प्रतिदिन
हलवाई, चाट, फास्टफूड, जूस, सब्जी एवं फल ठेला व्यवसायियों पर ₹100 प्रतिदिन
सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने पर ₹200
खुले में लघुशंका करने पर ₹200
खुले में शौच करने पर ₹500
गोबर डालने पर ₹5000 का जुर्माना तय किया गया है। इसी के साथ
कचरे के पृथक्करण, भंडारण एवं संग्रहण में उल्लंघन करने पर भी जुर्माने का प्रावधान है जिसमें घरों द्वारा पृथक्करण नहीं करने पर ₹200 प्रतिदिन
बल्क वेस्ट जनरेटर द्वारा उल्लंघन पर ₹1000 से ₹5000 प्रतिदिन
जैव अपशिष्ट का परिसर में उपचार नहीं करने पर ₹5000 प्रतिदिन
100 से अधिक व्यक्तियों के आयोजन में पृथक्करण नहीं करने पर ₹3000 प्रति आयोजन
निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा, अतिक्रमण, सार्वजनिक स्थलों की गंदगी, पोस्टर चिपकाने, सीवरेज एवं गंदे पानी के निकास, पशु गंदगी, मीट दुकानों की गंदगी, सड़क पर व्यवसाय, अस्पतालों द्वारा गंदगी, तथा अन्य उल्लंघनों पर ₹500 से ₹50,000 तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
प्लास्टिक अपशिष्ट पर है पूर्ण प्रतिबंध
निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के अनुसार प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम–2016 एवं राजस्थान सरकार की अधिसूचनाओं के अनुसार सिंगल यूज प्लास्टिक के विनिर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री एवं उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है। प्लास्टिक कैरी बैग, प्लास्टिक गारबेज बैग, कप, गिलास, प्लेट, चम्मच आदि का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम–1986 की धारा 15 के अंतर्गत प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग, भंडारण या परिवहन करने पर 5 वर्ष तक का कारावास अथवा ₹1 लाख तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन ₹5000 तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
निगम आयुक्त की आमजन से अपील
नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने उदयपुर शहर के समस्त नागरिकों, दुकानदारों, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, विवाह स्थलों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं स्ट्रीट वेंडर्स अपील करते हुए कहा है कि वे ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करें। नियमानुसार यूजर चार्ज जमा कर कचरे का पृथक्करण कर नगर निगम अथवा अधिकृत एजेंसी को सौंपें। यह शहर विश्व में सबसे खूबसूरत शहरों में सम्मिलित किया जाता है अतः हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम इसको ओर अधिक कैसे साफ रख सके। आमजन निगम द्वारा शहर की सुंदरता हेतु जो प्रयास किए जा रहे हैं उसमें सहयोग करें जिससे शहर स्वास्थ्य रैंकिंग में उच्च पायदान पर पहुंच सके। यदि किसी शहरवासी ने नियमों की अवहेलना की तो ऐसी स्थिति में नगर निगम द्वारा जुर्माना अधिरोपित किया जाएगा एवं सक्षम न्यायालय में अभियोजन संस्थित किया जाएगा।