जयपुर, 24 जुलाई। जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा शुक्रवार को राज्य स्तरीय 'राजस्थान पेयजल संवाद' के प्रथम संस्करण का आयोजन 'सतत ग्रामीण पेयजल सेवाओं में समुदाय की भागीदारी' विषय पर किया गया। जल भवन स्थित सभागार में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री श्री कन्हैया लाल चौधरी ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गांवों से सीधे संवाद स्थापित कर वास्तविक फीडबैक प्राप्त करना, उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों को साझा करना तथा सामने आने वाली चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशना रहा।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री श्री कन्हैया लाल चौधरी ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से शुद्ध एवं पर्याप्त पेयजल पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान पेयजल संवाद जैसी पहल से विभाग सीधे उन गांवों से जुड़ रहा है, जहां हर घर तक नल से जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है। इससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों द्वारा उपयोग शुल्क का नियमित संग्रह ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व की भावना विकसित करता है। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है, बल्कि जल संसाधनों के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग की संस्कृति भी मजबूत होती है।
चार जिलों की ग्राम पंचायतों से हुआ सीधा संवाद—
संवाद कार्यक्रम के दौरान डीडवाना-कुचामन जिले की रूणीजा, झालावाड़ जिले की बानोर, प्रतापगढ़ जिले की कोटड़ी तथा भीलवाड़ा जिले की जालिया ग्राम पंचायतों के सरपंचों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों, आशा सहयोगिनियों, विभागीय अधिकारियों एवं अन्य हितधारकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा संवाद किया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि घर-घर नियमित पेयजल उपलब्ध होने से विशेष रूप से महिलाओं को दूर-दराज से पानी लाने की परेशानी से राहत मिली है। साथ ही आशा सहयोगिनियों द्वारा नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण किए जाने से पेयजल की शुद्धता के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत हुआ है।
कोटड़ी ग्राम पंचायत बनी अनुकरणीय मॉडल—
श्री चौधरी ने प्रतापगढ़ जिले की कोटड़ी ग्राम पंचायत की जल वितरण व्यवस्था की विशेष सराहना करते हुए कहा कि ग्रामवासियों के सामूहिक सहयोग एवं ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की सक्रिय भूमिका के कारण वहां वर्षों से प्रत्येक घर तक नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे सफल मॉडल अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं और इन्हें व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता है।
हर माह होगा 'राजस्थान पेयजल संवाद'—
जलदाय मंत्री ने कहा कि राजस्थान पेयजल संवाद का आयोजन प्रत्येक माह किया जाएगा, ताकि विभाग को नियमित रूप से जमीनी स्तर से फीडबैक प्राप्त होता रहे और उसके आधार पर योजनाओं के क्रियान्वयन में आवश्यक सुधार किए जा सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल विभाग और ग्रामीण समुदाय के बीच प्रभावी संवाद का मजबूत माध्यम बनेगी।
जल संरक्षण ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता—
जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक श्री राजन विशाल ने कहा कि राजस्थान का प्रत्येक नागरिक पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझता है। उन्होंने बताया कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में है, जबकि राज्य के पास सतही जल संसाधन मात्र लगभग एक प्रतिशत ही उपलब्ध हैं। ऐसी परिस्थितियों में राज्य सरकार जल संरक्षण, जल स्रोतों के प्रभावी प्रबंधन तथा प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
13,850 गांव शत-प्रतिशत लाभान्वित, 6,172 गांवों को मिला 'हर घर जल' प्रमाणन—
संवाद के दौरान बताया गया कि प्रदेश में अब तक 13,850 गांव शत-प्रतिशत जल जीवन मिशन के तहत पूर्ण रूप से लाभान्वित हो चुके हैं, जबकि 6,172 गांवों को 'हर घर जल' प्रमाणन प्राप्त हो चुका है। कार्यक्रम में निरंतर जलापूर्ति, जल वितरण व्यवस्था, हर घर जल प्रमाणन, अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की सक्रियता, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा शिकायत निवारण व्यवस्था सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम में भीलवाड़ा जिला कलेक्टर, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अभियंता, चयनित ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।