जयपुर, 20 मई। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को दौसा जिले के बांदीकुई क्षेत्र में आयोजित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया तथा आभानेरी स्थित विश्व प्रसिद्ध चांद बावड़ी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और धार्मिक आयोजनों की सामाजिक भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
राज्यपाल ने बांदीकुई क्षेत्र के गुढ़ा आशिकपुरा में आयोजित 251 कुंडीय रुद्र महायज्ञ तथा आभानेरी स्थित तिवाड़ी कोठी में चल रही श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान यज्ञ में भाग लिया। धार्मिक कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का मार्गदर्शक ग्रंथ भी है। यह हमें सिखाती है कि जीवन में कैसे आगे बढ़ना है और अपने कर्तव्यों का निर्वहन किस प्रकार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गीता का संदेश है कि अन्याय करने वाला कोई भी हो, उसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति की महानता को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे समाप्त करने के अनेक प्रयास हुए, हजारों वर्ष पहले आए आक्रमणकारियों ने यहां की संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। भारतीय संस्कृति अपनी गहरी जड़ों और मूल्यों के कारण आज भी जीवंत और मजबूत बनी हुई है।
राज्यपाल ने कहा कि कथा वाचन, कीर्तन और प्रवचन जैसे धार्मिक आयोजन व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। ऐसे आयोजनों से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक बदलाव आता है और मन की नकारात्मकता दूर होती है। समाज में इस प्रकार के आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए।
इसके पश्चात राज्यपाल ने आभानेरी स्थित विश्व प्रसिद्ध चांद बावड़ी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की हवेलियों के बारे में तो बहुत सुना था, लेकिन जब उन्होंने चांद बावड़ी के चित्र देखे तो इसे देखने की उनकी प्रबल इच्छा हुई। यहां पहुंचकर उन्होंने इसे अत्यंत अद्भुत बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल देश ही नहीं, बल्कि विश्व की सबसे अनूठी और आकर्षक बावड़ियों में से एक है।