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Rajasthan / भारतीय वैदिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय से ही राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य संभव - श्री देवनानी

clean-udaipur भारतीय वैदिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय से ही राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य संभव - श्री देवनानी
Aayushman Bhatt April 05, 2026 10:40 AM IST

अजमेर, 4 अप्रैल। विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने शिक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था केवल भवनों या सुविधाओं तक सीमित नहीं होकर बच्चों के भविष्य निर्माण का सशक्त माध्यम है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ज्ञानसंस्कार और चरित्र निर्माण है। आधुनिकता के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश ही वह आधार हैजो समाज को श्रेष्ठ दिशा प्रदान कर सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने शनिवार को एम.पी.एस. स्कूल में नव निर्मित भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल सूचना प्राप्त करने का माध्यम नहीं है यह जीवन जीने की कला सिखाने वाली व्यवस्था होनी चाहिए। आज आवश्यकता ऐसी शिक्षा की है जो विचारों का विस्तार करेव्यक्तित्व का विकास करे और समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार करे। भारत की प्राचीन वैदिक शिक्षा प्रणाली इसका श्रेष्ठ उदाहरण रही है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय इस बात के प्रमाण हैं कि भारत सदियों से ज्ञान का वैश्विक केंद्र रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा विश्व को दिशा देने का कार्य किया है। इतिहास साक्षी है कि भारतीय सभ्यता वैज्ञानिक सोचआध्यात्मिकता और प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश देती रही है। सनातन भारतीय परंपरा में पुष्पक विमान और संजय की दिव्य दृष्टि जैसे उदाहरण यह दर्शाते हैं कि हमारे ऋषि-मुनियों का ज्ञान अत्यंत विकसित और दूरदर्शी था। भारत प्रकृति के साथ संवाद करने वाला राष्ट्र रहा हैजहां जीवन शैली पर्यावरण संतुलन और मानव मूल्यों पर आधारित रही है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में शिक्षा के क्षेत्र में नया दौर शुरू हुआ है। इसमें भारतीयतानवाचार और आधुनिक तकनीक को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल रोजगार ही नहीं इससे जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी परिवार व्यवस्था हैजहां पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञानसंस्कार और जीवन मूल्यों की विरासत हस्तांतरित होती रही है। भारतीय परिवार केवल सामाजिक इकाई नहीं बल्कि संस्कृतिनैतिकता और जिम्मेदारी का विद्यालय है। बदलते समय में ज्ञान और ध्यान की परिभाषा भी बदल रही है। आज शिक्षा का उद्देश्य मानसिक संतुलनआत्मविकास और समग्र व्यक्तित्व निर्माण होना चाहिए। विश्व आज भारत की ओर आशा और विश्वास के साथ देख रहा है। योगआयुर्वेदआध्यात्मिकता और भारतीय जीवन दर्शन वैश्विक स्तर पर स्वीकार किए जा रहे हैं।

उन्होंने इस अवसर पर माहेश्वरी समाज के योगदान पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि माहेश्वरी समाज ने देश के आर्थिकसामाजिकशैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शिक्षा संस्थानों की स्थापनासेवा कार्योंसामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण में माहेश्वरी समाज का योगदान सदैव उल्लेखनीय रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने आह्वान किया कि आधुनिक विज्ञान और सनातन परंपरा के समन्वय से ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है। शिक्षा को सुविधा नहीं बल्कि संस्कारविचार और चरित्र निर्माण का माध्यम बनाकर ही आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जा सकती है।

इस अवसर पर माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष श्री संदीप काबराश्री गोपाल राठीश्री रामपाल सोनी सहित समाज एवं विद्यालय प्रशासन के लोग उपस्थित रहे।

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