जयपुर, 19 अगस्त। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की अध्यक्षा श्रीमती अपर्णा अरोरा ने कहा कि राजस्थान की ब्लॉक प्रिंटिंग, हस्तशिल्प एवं वस्त्र प्रसंस्करण की विश्व स्तरीय समृद्ध परंपरा को सर्कुलर इकोनॉमी एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के साथ जोड़कर भविष्य की प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था का आधार बनाने के लिए वस्त्र उद्योग से जुड़े उद्यमियों सहित संबंधितों को सही ढंग से अपना दायित्व निभाते हुए समन्वित प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि वस्त्र इकाइयों को जीरो लिक्विड डिसचार्ज, जल परिशोधन, परिषोधित जल के उपयोग, स्लज का वैज्ञानिक निष्पादन और प्रदूषण रहित पर्यावरण की दिशा में कार्य करते हुए दायित्वों को निभाना होगा।
श्रीमती अपर्णा अरोरा बुधवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में सर्कुलरिटी इन द टैक्सटाइल सेक्टर-बेस्ट प्रेक्टिसेज फॉर सस्टेनेबिलिटी एण्ड मॉडर्न टेक्नोलॉजिज फार सर्कुलर इकोनोमी विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थी। कार्यशाला का आयोजन सिंतंबर में आयोजित होने वाले 10 वें वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम के प्री इवेंट के रुप में किया गया है। उन्होंने कहा कि सांगानेर, बगरु, बालोतरा, पाली, बाड़मेर सहित राजस्थान की ब्लॉक प्रिंटिंग की वैश्विक पहचान है। हमें इन्हें संरक्षित व प्रोत्साहित करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के दायित्व को निभाते हुए ठोस प्रयास करने होंगे। नदियों में प्रदूषित पानी को जाने से रोकने के साथ ही वस्त्र उद्योग में कम पानी के उपयोग की तकनीक, प्रदूषित पानी के परिषोधन और परिशोधित पानी का औद्योगिक संस्थाओं में उपयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान रिफाइनरी में उत्पादन आरंभ हो गया है, उसके आसपास विकसित होने वाले पेट्रो जोन के उद्योगों की पानी की जरुरत को बालोतरा के परिशोधित पानी से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने ट्रीटमेंट प्लांटों की स्लज के बेहतर उपयोग सीमेंट उद्योग, ब्लॉक तैयार करने सहित अन्य संभावनाओं की तलाश की आवश्यकता प्रतिपादित की। उन्होंने कहा कि लीगेसी टैक्सटाइल क्लस्टर्स को आधुनिक अपशिष्ट जल शोधन प्रणालियों, संसाधन दक्ष तकनीकों एवं जल पुर्नचक्रण आधारित अवसंरचना से सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है।
श्रीमती अपर्णा अरोरा ने कहा कि राजस्थान देश का सबसे बड़ा प्रदेश होने के बावजूद पानी की उपलब्धता सबसे कम है। परंपरागत वस्त्र उद्योग के प्रदूषित पानी को नदी-नालों में छोड़ने से अधिक प्रदूषण फैलता है। वस्त्र उद्योग के लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा अनेक लाभकारी योजनाएं संचालित है। ऐसे में उद्योगों को भी प्रदूषित पानी के परिशोधन और परिशोधित पानी के उपयोग पर ध्यान देना होगा। उन्होंने विशेषज्ञों से भी आग्रह किया कि परंपरागत वस्त्र उद्योग में पानी के उपयोग में कमी लाने, प्रदूषित पानी के परिशोधन की कम लागत की बेहतर तकनीक, पानी के जीरो लिक्विड डिसचार्ज और उद्यमियों को शिक्षित व जागरुक करने की दिशा में काम करना होगा।
- उद्योग–नियामक समन्वय से मिलेगी नई दिशा : सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव श्री कपिल चन्द्रवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। सर्कुलर इकोनॉमी का मॉडल उद्योगों को संसाधनों के दक्ष उपयोग, जल संरक्षण तथा अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित करने की दिशा में नई सोच प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि मंडल का प्रयास केवल नियमन तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योगों को आधुनिक तकनीकों, ZLD प्रणाली, जल पुनर्चक्रण एवं प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन अपनाने के लिए तकनीकी सहयोग और क्षमता संवर्धन उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने उद्योगों से पर्यावरणीय मानकों का स्वैच्छिक एवं प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
- BARC ने प्रस्तुत किया किफायती ZLD मॉडल
तकनीकी सत्र में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई के डॉ. वीरेंद्र कुमार ने “Sustainable Textile Wastewater Management: A Tool Towards Affordable ZLD” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि भविष्य का औद्योगिक विकास 4R सिद्धांत—Reduce, Reprocess, Reuse एवं Resource Recovery पर आधारित होगा। साथ ही रेडिएशन आधारित एडसॉर्बेंट तकनीक के माध्यम से रंगयुक्त अपशिष्ट जल के प्रभावी एवं किफायती उपचार की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
- विशेषज्ञों ने साझा किए सर्वोत्तम अनुभव
विशेषज्ञ डॉ. चिराग भीमानी ने वर्चुअली हिस्सा लेते हुए गुजरात के वस्त्र उद्योग में अपशिष्ट जल उपचार की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं, भीलवाड़ा इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रो. वीरेन्द्र कुमार गुप्ता ने सतत वस्त्र रसायन एवं अपशिष्ट प्रबंधन, श्री प्रियेश भट्टी ने राजस्थान के टेक्सटाइल क्लस्टर्स में सर्कुलैरिटी एवं अनुपालन, श्री गिरीश थोरात ने जल पुनः उपयोग एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली और श्री रुचित अग्रवाल ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।
कार्यशाला में वस्त्र उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों एवं विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने जल संरक्षण, संसाधन पुनर्प्राप्ति एवं पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रणाली पर व्यापक विचार-विमर्श किया। अंत में राजस्थान प्रदूषण नियत्रण बोर्ड के अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता श्री भुवनेश माथुर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में सचिव पर्यावरण श्रीमती शैलजा देवल, प्रदूषण बोर्ड, सांगानेर, बालोतरा, पाली, जोधपुर सहित वस्त्र उद्योग से जुड़े प्रतिनिधिगण व संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।