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Rajasthan / 'ज्ञान भारतम मिशन' के तहत राजस्थान में पांडुलिपि सर्वेक्षण कार्यों की समीक्षा, 16.66 लाख से अधिक पांडुलिपियों का हुआ सर्वेक्षण

'ज्ञान भारतम मिशन' के तहत राजस्थान में पांडुलिपि सर्वेक्षण कार्यों की समीक्षा, 16.66 लाख से अधिक पांडुलिपियों का हुआ सर्वेक्षण
Dinesh Bhatt May 13, 2026 08:55 AM IST
जयपुर, 12 मई। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत अभी तक किए गए पांडुलिपि सर्वेक्षण की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि राजस्थान में 16.66 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया है, जो देश में सर्वाधिक है।
 
बैठक में राजस्थान के मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने बताया कि कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान के समन्वय एवं विशेषज्ञों की सहभागिता से यह सर्वेक्षण कार्य व्यापक स्तर पर संपन्न किया गया, जिसके अंतर्गत विष्णु पुराण, पद्म पुराण, शिव पुराण, वेदों, रामायण, महाभारत एवं श्रीमद्भगवद्गीता से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया गया।उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने एशियाटिक सोसाइटी के विशेषज्ञों से भी सहयोग का आग्रह किया है, ताकि इन अमूल्य ग्रंथों का संरक्षण एवं अध्ययन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके। बताया गया कि राज्य के विभिन्न जैन ज्ञान भंडारों में संरक्षित प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करते हैं।
 
सर्वेक्षण के दौरान दुर्लभ पांडुलिपियों का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया। इसके अतिरिक्त वेदों की ऋचाओं, वैदिक दर्शन तथा भारतीय दार्शनिक परंपराओं से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण पांडुलिपियों का भी संकलन किया गया है। रामायण, महाभारत एवं श्रीमद्भगवद्गीता की विभिन्न भाषाओं एवं लिपियों में उपलब्ध सदियों पुरानी प्रतियां भी इस सर्वेक्षण का प्रमुख हिस्सा रहीं।
मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान में इन दस्तावेजों की प्रकृति के आधार पर श्रेणीबद्ध सूची (कैटलॉगिंग) तैयार की जा रही है, जिससे शोधार्थियों एवं अकादमिक जगत को अध्ययन में सुविधा प्राप्त होगी।
 
बैठक में कैबिनेट सचिव ने निर्देश दिए कि अगले चरण में इन पांडुलिपियों, विशेषकर जैन ग्रंथों एवं पुराणों का उच्च गुणवत्ता वाले मेटाडेटा स्कैनिंग एवं डिजिटलीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाए। इससे भारत की समृद्ध बौद्धिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को दीर्घकालीन रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा।
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