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Rajasthan / मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित- भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ‘स्टेट वेटरनरी पॉलिसी’ तैयार की जाए- मुख्य सचिव मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स सेवाओं की दैनिक मॉनिटरिंग के निर्देश

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित-   भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ‘स्टेट वेटरनरी पॉलिसी’ तैयार की जाए- मुख्य सचिव मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स सेवाओं की दैनिक मॉनिटरिंग के निर्देश
Dinesh Bhatt September 30, 2026 06:28 PM IST
जयपुर, 30 सितंबर। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि स्वस्थ पशुधन, सशक्त पशुपालक और बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पशुपालन क्षेत्र में उन्नत तकनीक का प्रयोग, पशु चिकित्सा सुविधाओं एवं संस्थानों का विस्तार, उन्नत नस्लों के विकास, गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्धता तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि जैसे सभी पहलुओं को समाहित करते हुए समग्र कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता है। मुख्य सचिव ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्टेट वेटरनरी पॉलिसी तैयार करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करें। 
 
श्री श्रीनिवास बुधवार को शासन सचिवालय में आयोजित पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य में संचालित सभी 536 मोबाइल वेटरनरी यूनिट द्वारा किये जा रहे पशु उपचार, कॉल सेंटर पर प्राप्त पशुपालकों के कॉल, असाइन एवं क्लोज किये गए टिकट आदि की रोज रिपोर्ट बनाई जाए। साथ ही इसकी गुणवत्ता में और अधिक वृद्धि करते हुए इसका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। 
 
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना से पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, इसी का परिणाम है कि राजस्थान सर्वाधिक पशु बीमा पॉलिसियां जारी करने में देश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए जिससे वास्तविक प्रभावितों को इसका लाभ मिल सकें। इस दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मंगला पशु बीमा योजना के अंतर्गत 43 लाख से अधिक पशुओं का पंजीकरण एवं 26 लाख से अधिक बीमा पॉलिसियां जारी कर 95 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान पशुपालकों को किया गया है।
 
उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश में स्वस्थ एवं उत्पादक पशुधन के लिए उन्नत प्रजनन तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाए। वेटरनरी कॉलेजों में पीजी सीटों में वृद्धि के साथ नए विशेषज्ञता विभाग शुरू करने, आधुनिक प्रयोगशालाओं एवं रिसर्च सुविधाओं को विकसित करने तथा पशु चिकित्सा शिक्षा को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने पशु चिकित्सा संस्थानों के विस्तार, मोबाइल एवं आपातकालीन पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने, पशु रोगों की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं विकसित करने तथा डिजिटल एवं टेली-वेटरनरी सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
 
बैठक में पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री विकास सीतारामजी भाले सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहें।
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