जयपुर, 25 जुलाई। सहकारिता विभाग, राजस्थान द्वारा अमूल एवं एन.सी.सी.एफ. के सौजन्य से अरावली की तलहटी में स्थित सुमेल गांव में शनिवार को केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल एवं प्रदेश के सहकारिता राज्य मंत्री श्री गौतम कुमार दक सहित केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव श्री आशीष कुमार भूटानी ने सहकार वन परियोजना में पौधारोपण का शुभारम्भ कर किया। सहकारिता के माध्यम से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के लिए सहकार वन परियोजना को जामडोली क्षेत्र में 64 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है।
इस अवसर पर केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने सीताफल तथा प्रदेश के सहकारिता राज्य मंत्री ने कचनार का पौधारोपण किया। श्री आशीष कुमार भूटानी केन्द्रीय सहकारिता सचिव, प्रदेश के सहकारिता सचिव डाॅ. समित शर्मा एवं राजफैड के प्रबंध निदेशक श्री सौरभ स्वामी ने चीकू के पौधों को लगाया। इस अवसर पर श्री मोहोल ने बताया कि सहकार से समृद्धि कार्यक्रम के तहत सभी राज्यों में पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन के लिए सहकार वन विकसित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए देशी वनस्पतियों की प्रजाति के पौधों को लगाया जा रहा है, ताकि न्यूनतम रखरखाव की आवष्यकता हो।
सहकारिता राज्य मंत्री श्री गौतम कुमार दक ने सहकार वन की उपयोगिता को चिह्नित करते हुए कहा कि वन का अस्तित्व है तो हमारा अस्तित्व है। पेडों के बिना हमारा सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र चरमरा जायेगा। इसे ही ध्यान में रखते हुए सहकारिता ने पर्यावरण स्थिरता में सक्रिय रूप योगदान देने की पहल की गई है। उन्होंने कहा कि सहकार वन को शिक्षा, पर्यावरण पर्यटन, स्वास्थ्य एवं मनोरंजन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
श्री दक ने कहा कि अमूल, एन.सी.सी.एफ., स्थानीय निकाय जयपुर विकास प्राधिकरण तथा सहकारिता विभाग ने मिलकर सहकार वन को विकसित किया जा रहा है जो एक सामुदायिक भागीदारी की मिसाल है। उन्होंने कहा कि इस पार्क में जैव विविधता को विकसित करने के लिये तितली उद्यान, पक्षियों के घोंसले बनाने के लिए बक्से, पक्षियों को छिपने की जगह तथा उनका अवलोकन करने के लिए पाइण्ट बनाये जायेंगे ताकि आमजन में वन्य जीवों के प्रति जागरूकता बढ सके।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि इस पार्क में बच्चों को पर्यावरण के संरक्षण के प्रति सचेत करने तथा उन्हें पौधों की सुरक्षा के लिये तैयार करने के साथ षिक्षित करने के लिये अलग से मनोरंजन पार्क भी बनाया जा रहा है। साथ ही सभी आयुवर्ग के लोगों के लिए ओपन जिम भी विकसित किया जायेगा जो शारीरिक फिटनेस को प्रोत्साहित करेगा एवं प्रकृति के साथ उनके भावनात्मक जुडाव को मजबूती देगा।
यह होंगी सहकार वन की विशेषताऐं—
सहकारिता सचिव ने बताया कि सहकार वन को स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए लेण्ड स्केपिंग की जाएगी तथा मियावाकी फोरेस्ट पेचेज विकसित किए जाऐंगे। उन्होंने बताया कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए खेजडी, नीम, जामुन, रोहिडा आदि के पौधों को प्राथमिकता से लगाया जाएगा। सहकार वन में पौधों की सुरक्षा के लिए ईको-सेंस्टिव फेंसिंग का कार्य किया जा रहा है और अब तक 40 बीघा जमीन पर फेंसिंग की जा चुकी है। साथ ही सीसीटीवी सर्विलेंस के माध्यम से पौधों की सुरक्षा की जाएगी। वन क्षेत्र में पुनर्भरण कुओं, कंटूर ट्रेंच, परकोलेशन पिट, बायोस्वेल और स्टाॅर्मवाटर चैनलों से युक्त वर्षा जल संचयन प्रणाली भी विकसित की जाएगी।
आमजन को वन विहार करने के लिए पर्यावरण अनुकूल पैदल रास्तों, जाॅगिंग ट्रैक, साइकिलिंग मार्ग और प्रकृति पथों का एक व्यापक नेटवर्क भी डेवलप किया जाएगा। वन क्षेत्र में छायादार लाॅन, पत्थर की बैठने की जगह, लकडी की बैंच, सुंदर विश्राम क्षेत्र और पारिवारिक मिलन क्षेत्र भी विकसित किए जाऐंगे। आगंतुकों के लिए विश्वस्तरीय शुद्ध पेयजल स्टेशन, स्वस्छ शौचालयों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, शिशु देखभाल कक्ष और सूचना केन्द्र भी स्थापित होंगे।
शासन सचिव, सहकारिता डाॅ. समित शर्मा ने चीकू का पौधारोपण किया तथा बताया कि इस पार्क में वाटरबाॅडी भी विकसित की जा रही है ताकि जलीय वनस्पतियों, प्रवासी पक्षियों एवं अन्य जीवों के आगमन से बायोडायवर्सिटी में वृद्धि हो। उन्होंने कहा सहकार वन के विकसित होने से स्थानीय तापमान में कमी आयेगी और वायुमण्डल में आर्द्रता बढने से जैवविविधता में वृद्धि होगी।
डाॅ. शर्मा ने कहा कि वाटरबाॅडी में पैडल बोटिंग, पक्षियों का अवलोकन करने, फोटोग्राफी करने तथा मनोरंजन के अवसर प्राप्त होंगे तथा स्थानीय रोजगार का सृजन होगा। उन्होंने कहा कि पेड भूमि में होने वाले कटाव को रोकने के लिये सबसे सरल एवं टिकाउ उपाय है।