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Rajasthan / राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह आयोजित सीरी खाद्यानों में विषाक्त तत्वों के परीक्षण उपकरण विकसित करने पर भी ध्यान दें प्रौद्योगिकी के साथ भारतीय ज्ञान परम्परा से नई पीढ़ी जुड़े-राज्यपाल

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह आयोजित सीरी खाद्यानों में विषाक्त तत्वों के परीक्षण उपकरण विकसित करने पर भी ध्यान दें प्रौद्योगिकी के साथ भारतीय ज्ञान परम्परा से नई पीढ़ी जुड़े-राज्यपाल
Dinesh Bhatt May 11, 2026 05:25 PM IST
जयपुर, 11 मई। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने विज्ञान एवं तकनीक का उपयोग समृद्ध और स्वस्थ जीवन हेतु किए जाने का आह्वान करते हुए कहा कि केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक अभियांत्रिकी अनुसन्धान संस्थान "सीरी" अनाज, सब्जियों में पेस्टीसाइड, केमिकल आदि की जांच के लिए भी उपकरण बनाने की पहल करे। उन्होंने कहा कि जो खाद्यान्न हम उपयोग में लेते हैं, उनमें कितना विषाक्त है, इसके परीक्षण से जुड़े उपकरण इस समय में सबसे बड़ी आवश्यकता है। श्री बागडे ने  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के आधुनिक विकास के साथ भारतीय ज्ञान दृष्टि की समृद्ध परम्परा से जुड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत विज्ञान में आरम्भ से ही समृद्ध रहा है। खगोल, गणित, धातु विज्ञान, आयुर्वेद और वास्तुकला जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारत ने ही विश्व को मौलिक खोजें और विकास के सूत्र प्रदान किए हैं।
 
राज्यपाल सोमवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक अभियांत्रिकी अनुसन्धान संस्थान "सीरी" के जयपुर स्थित कार्यालय में विज्ञान भारती के सहयोग से आयोजित समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने खाद्य एवं पेय पदार्थों में मिलावट और नशे की लत से बचाव में भी प्रौद्योगिकी के उपयोग की आवश्यकता जताई।
 
शून्य की खोज भारत द्वारा की गई खोज और उससे विश्व को मिले गणना ज्ञान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अजंता गुफाओं के चित्रों में बरते रंग आज भी प्राचीन रंगों की वैज्ञानिक दृष्टि की हमारी धरोहर है। उन्होंने कहा दूध में पानी की मिलावट को जांचने के लिए हंसा टेस्ट किया जाता है। यह हमारे पक्षी विज्ञान की दृष्टि का आविष्कार है। उन्होंने महर्षि अरविंद की चर्चा करते हुए नई पीढ़ी की बौद्धिक क्षमता बढ़ाए जाने के लिए कार्य करने पर जोर दिया।
 
श्री बागडे ने कहा कि नैतिक मूल्य और प्रतिबद्धता के बगैर जीवन की सार्थकता नहीं है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के साथ हमें आदमी गढ़ने पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत धातु विज्ञान से तब से जुड़ा हुआ है, जब दूसरे देशों को इसका ज्ञान ही नहीं मिलता था। उन्होंने प्राचीन प्रतिमाओं में स्वर्ण आभूषण उकेरे जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि डलहौजी भारत आया तो 17 जहाज भरके सोना ले गया था।
 
इससे पहले राज्यपाल ने "राजस्थान विज्ञान महोत्सव 2026" की स्मारिका का लोकार्पण किया और पोस्टर का विमोचन किया। उन्होंने सीरी की प्रयोगशाला में विकसित उपकरणों को भी देखा।
 
विज्ञान भारती के सचिव श्री मेघेंद्र शर्मा ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के आलोक में विज्ञान की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए बताया कि विज्ञान भारती द्वारा रीको औद्योगिक क्षेत्र में पौधे लगाने के साथ उनका संरक्षण भी किया गया है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विज्ञान से जन—जन को जोड़ने में भी विज्ञान भारती निरंतर कार्य कर रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक अभियांत्रिकी अनुसन्धान संस्थान के निदेशक श्री पीसी पंचारिया ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।
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