जयपुर, 3 जून। राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार संचालित “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के तहत बुधवार को सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, नागौर द्वारा जिले के मीडिया प्रतिनिधियों का विभिन्न पारंपरिक जल स्रोतों एवं जल संरक्षण स्थलों का फील्ड भ्रमण आयोजित किया गया। भ्रमण का उद्देश्य आमजन तक जल संरक्षण के महत्व, पारंपरिक जल स्रोतों की उपयोगिता तथा जल संवर्धन के सफल स्थानीय मॉडलों की जानकारी पहुंचाना था।
भ्रमण के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने नागौर जिले के विभिन्न तालाबों, सरोवरों एवं नर्सरी का अवलोकन किया तथा ग्रामीणों और अधिकारियों से संवाद कर जल संरक्षण की व्यवस्थाओं, जल की उपलब्धता और उसके उपयोग से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
गोगलाव का गोगामेड़ी तालाब व नर्सरी—
फील्ड भ्रमण की शुरुआत गोगेलाव स्थित ऐतिहासिक गोगामेड़ी तालाब से हुई। लगभग 20 मीटर गहरे इस तालाब का विशाल जलग्रहण क्षेत्र आसपास के गांवों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है। ग्रामीणों ने बताया कि यह तालाब वर्षभर पेयजल की जरूरतों को पूरा करता है तथा इसकी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की मशीनरी या पाइपलाइन के माध्यम से जल नहीं भरा जाता।
इसके बाद मीडिया प्रतिनिधियों ने गोगेलाव स्थित नर्सरी का भ्रमण किया, जहां उन्हें पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के महत्व से अवगत कराया गया। नर्सरी में खेजड़ी, नीम और पीपल सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का अवलोकन किया गया तथा बताया गया कि जल संरक्षण और हरित आवरण एक-दूसरे के पूरक हैं।
रोल का कासोलाई तालाब—
भ्रमण के अगले चरण में रोल स्थित कासोलाई सरोवर का अवलोकन किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि यह सरोवर आसपास के लगभग 15 गांवों तथा करीब 12 हजार आबादी के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है। सरोवर के तट पर स्थित धार्मिक स्थलों के कारण यह क्षेत्र सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। मीडिया प्रतिनिधियों ने यहां जल संरक्षण की पारंपरिक व्यवस्थाओं और सामुदायिक सहभागिता को करीब से देखा।
डेह का नौसर तालाब—
इसके पश्चात डेह क्षेत्र के नौसर तालाब का निरीक्षण किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि यह तालाब आसपास के 13 गांवों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तालाब की संरचना, जलग्रहण क्षेत्र और जल संचयन क्षमता ने मीडिया प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
भ्रमण के अंतिम चरण में जायल क्षेत्र के कठौती सरोवर का दौरा किया गया। ग्रामीणों के अनुसार यह सरोवर आसपास के लगभग 20 गांवों के लिए वर्षभर जल उपलब्ध कराता है। यहां जल संरक्षण की परंपरागत व्यवस्थाओं और स्थानीय समुदाय की सहभागिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
फील्ड भ्रमण के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण से जुड़े स्थानीय प्रयासों, पारंपरिक जल स्रोतों की उपयोगिता तथा सामुदायिक सहभागिता के विभिन्न आयामों को समझा। अभियान के तहत यह संदेश दिया गया कि जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही संभव है।