जयपुर, 4 अगस्त। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि प्रदेश के सभी राजकीय चिकित्सा संस्थान स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करें तथा प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालय पर प्रतिमाह कम से कम एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रक्त उपलब्ध रहने से प्रसूताओं के गंभीर ऑपरेशन के दौरान समय पर रक्त मिल सकेगा और रिप्लेसमेंट के लिए उनके परिजनों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान प्रमुख शासन सचिव ने निर्देश दिए कि सभी रक्तदान शिविरों में राजकीय ब्लड सेंटर की रक्त संग्रहण टीम के माध्यम से ही रक्त संग्रहण कराया जाए, जिससे संबंधित क्षेत्र में रक्त की उपलब्धता बनी रहे। उन्होंने कहा कि जिन ब्लड बैंकों द्वारा संग्रहित रक्त का अत्यधिक डिस्कार्ड किया जा रहा है, उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी ब्लड सेंटर प्रतिदिन ई-रक्तकोष पोर्टल पर रक्त की उपलब्धता का अद्यतन विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करें, ताकि प्रदेशभर में रक्त भंडार की प्रभावी निगरानी एवं आवश्यकता अनुसार उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव ने बीकानेर, उदयपुर, बांसवाड़ा, जनाना अस्पताल जयपुर, एमडीएम अस्पताल जोधपुर, श्रीगंगानगर तथा एसएमएस अस्पताल जयपुर में दर्ज मातृ मृत्यु के मामलों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने संबंधित चिकित्सकों के साथ उपचार व्यवस्था एवं प्रोटोकॉल पर चर्चा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक निर्देश दिए। आदिवासी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को गर्भवती महिलाओं के बेहतर पोषण एवं नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने सभी चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों की सूची तैयार करने तथा खराब उपकरणों की तत्काल मरम्मत अथवा प्रतिस्थापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। चिकित्सा सेवाओं में उपयोग होने वाली दवाइयों एवं आवश्यक उपभोग्य सामग्री की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। इस संबंध में मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों एवं सीएमएचओ से फीडबैक लेकर राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) के प्रबंध निदेशक को आवश्यक निर्देश दिए गए।
बरसात के मौसम को देखते हुए प्रमुख शासन सचिव ने जर्जर भवनों में संचालित सरकारी गतिविधियों को तत्काल सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि सभी डिलीवरी पॉइंट वाले चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक संसाधन एवं सुविधाएं पूर्ण रूप से उपलब्ध रहें, ताकि गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री बाबूलाल गोयल, प्रबंध निदेशक आरएमएससीएल श्री पुखराज सैन, अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. नरोत्तम शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।