जयपुर, 10 अक्टूबर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वावधान में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा शनिवार को आयोजित वर्ष 2026 की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रदेशभर में कुल 67,20,971 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। इनमें न्यायालयों में लंबित 8,60,986 प्रकरणों का निस्तारण हुआ, जिनमें कुल 25,76,92,27,900 रुपए की राशि के अवॉर्ड पारित किए गए।
राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायाधिपति श्री संजय के. अग्रवाल ने कहा कि लोक अदालत केवल विवादों के निस्तारण का माध्यम नहीं, बल्कि आमजन तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने का एक संवेदनशील और सार्थक प्रयास है। इसका उद्देश्य न्याय की अपेक्षा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को राहत, संतोष और विश्वास प्रदान करना है। उन्होंने विधिक सेवा संस्थाओं एवं अधिवक्ताओं का आह्वान किया कि वे लोक अदालत को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखकर जनसेवा के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखें।
राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर मुख्यपीठ एवं जयपुर पीठ सहित प्रदेश के जिला न्यायालयों, राजस्व न्यायालयों, अधिकरणों, आयोगों एवं उपभोक्ता मंचों आदि में किया गया। जिला एवं राजस्व न्यायालयों में कुल 8,60,373 लंबित प्रकरणों का निस्तारण हुआ। वहीं, राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर मुख्यपीठ में 205 तथा जयपुर पीठ में 408 प्रकरण राजीनामे से सुलझाए गए।
राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर मुख्यपीठ में मुख्य न्यायाधीश न्यायाधिपति श्री संजय के. अग्रवाल, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायाधिपति श्री विनीत कुमार माथुर एवं न्यायाधिपति श्री अरुण मोंगा की गरिमामयी उपस्थिति में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। इसी प्रकार जयपुर पीठ में न्यायाधिपति श्री महेन्द्र कुमार गोयल ने राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में प्रदेश की विधिक सेवा संस्थाओं ने राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, न्यायालय कर्मचारियों एवं विधि विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।