जयपुर, 21 जुलाई। प्रदेश में किसानों से समर्थन मूल्य पर जिन्स की खरीद करने से लेकर कृषि आदानों की मांग के अनुसार आपूर्ति करने, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र की सेवायें मुहैया कराने और कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से किराये पर खेतीबाडी में काम आने वाले उपकरण और ड्रोन जैसी सुविधा प्रदान करने के लिये क्रय-विक्रय सहकारी समितियों का संचालन किया जा रहा है। इन समितियों में अधिकारियों एवं कार्मिकों की दक्षता एवं उनके द्वारा दी जा रही सेवाओं की रियल टाइम सर्विस डिलेवरी को सुनिश्चित करने के साथ जवाबदेही के निर्धारण के लिये सहकारिता विभाग द्वारा मूल्यांकन के मापदण्ड जारी किये हैं।
शासन सचिव, सहकारिता डॉ. समित शर्मा द्वारा मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुये कहा कि भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में विभिन्न योजनाओं का संचालन सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किया जा रहा है। इसलिये यह हमारा प्राथमिक कर्तव्य है कि केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार की मंशा के अनुसार योजनाओं का निष्पादन किया जाये। उन्होंने समितियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को कहा कि वे सरकार की योजनाओं का फायदा लक्षित किसान तक पहुंचाने के लिये रियल टाइम सर्विस डिलेवरी को प्राथमिकता बनायें और उनके प्रति जवाबदेह बनें।
इन मापदण्डों के आधार पर होगा मूल्यांकन—
डॉ. शर्मा ने बताया कि सहकारी संस्थाओं के मध्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उनकी कार्यप्रणाली में सुधार के लिये महत्वपूर्ण घटक है। इसके लिये 11 मापदण्ड निर्धारित किये गये हैं। जैसे समर्थन मूल्य पर किसानों का पारदर्शी ढंग से पंजीकरण करना, उनसे निर्धारित समयावधि में एफएक्यू मापदण्डानुसार जिन्स की तुलाई करना एवं विक्रय पर्ची जारी होने पर समय-सीमा में किसान को बैंक खाता में त्वरित भुगतान होने के आधार पर 10 अंक मिलेंगे। इसी प्रकार यदि समिति किसानों के लिये बुवाई सीजन से पहले प्रमाणित उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक का पर्याप्त बफर स्टॉक करती है और उसका सुचारू वितरण पोस मशीन के माध्यम करती है तो उसे 15 अंक मिलेंगे।
किसी भी समिति के संचालन में पारदर्शी लेखांकन एवं ऑडिट व्यवस्था के साथ संचालक मण्डल की नियमित बैठकों का आयोजन करना एवं समिति के कामकाज की नियमित समीक्षा करने पर ही समिति के अधिकारियों एवं कार्मिकों की जवाबदेही को तय किया जा सकता है, इसलिये इनकी पालना के 5 अंक निर्धारित किये गये हैं। समिति के द्वारा दी जा रही सेवाओं के विस्तार एवं लाभ में वृद्धि तथा समिति में अनुपयोगी पत्रावलियों एवं रिकॉर्ड के निस्तारण के लिये 10 अंक निर्धारित हैं।
समिति को अपनी आय में वृद्धि करने के लिये प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र के रूप में कार्य करने, किसानों को तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराने मृदा परीक्षण की व्यवस्था करने, उन्नत कृषि तकनीक, खाद व मशीनरी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये 5 अंक निर्धारित किये गये हैं। यदि समिति द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर के रूप में कार्य किया जा रहा है और किसानों को किफायती दरों पर खेतीबाडी के काम में आने वाले महंगे कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की सेवायें दी जा रही है तो उन्हें 5 अंक मिलेंगे।
समीक्षा बैठक में शासन सचिव ने बताया कि भीण्डर, चौमहला, देवली, टोडारायसिंह एवं उनियारा की क्रय-विक्रय सहकारी समितियों द्वारा 50-50 अंक प्राप्त कर प्रदेश में अव्वल रही। उन्होंने सभी क्रय-विक्रय सहकारी समितियों का आह्वान किया कि वे निर्धारित मापदण्ड के आधार पर प्रथम स्थान पर आने का प्रयास करें। इसके लिये कार्यस्थल पर निर्धारित समयावधि में कार्मिकों की उपस्थिति सुनिश्चत की जावे तथा किसानों की आवश्यकता एवं विभागीय योजनाओं की एसओपी के अनुसार सर्विस डिलेवरी को सुनिश्चित किया जावे।