जयपुर, 10 अप्रैल। जयपुर के जवाहर कला केन्द्र के तीन दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का शुक्रवार को समापन हो गया। समारोह के अंतिम दिन रंगायन सभागार में शाम के समय कलाकारों द्वारा दी गई प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति से सराबोर प्रस्तुतियों ने वहां उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वाद्य संगीत प्रस्तुति से हुआ, जिसमें श्री ज़ेयान हुसैन एवं उनके दल ने वायलिन एवं बांसुरी वादन के माध्यम से वातावरण को सुरीला कर दिया।
राग खमाज की मध्य लय की बंदिश (ताल दीपचंदी, 14 मात्रा) से शुरुआत हुई, इसके पश्चात ‘ना मानूंगी’ छोटा ख्याल प्रस्तुत किया गया। जुगलबंदी में तानों एवं झाला का प्रभावी संयोजन देखने को मिला। अंत में राग हंसध्वनि की प्रस्तुति के साथ वाद्य कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसने श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई से जोड़ दिया।
समापन समारोह के उक्त कार्यक्रम की अगली कड़ी में अर्जुन एवं समूह द्वारा पारंपरिक घूमर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात बिशनलाल एवं समूह ने शेखावटी क्षेत्र का प्रसिद्ध डेरू नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने लोक जीवन की जीवंत झलक प्रस्तुत की। उर्मिला कुमारी एवं समूह द्वारा ग्रामीण भवाई नृत्य की प्रस्तुति दी। इस कौशल एवं रोमांच की शैली ने दर्शकों से भरपूर प्रशंसा अर्जित की। बाल कलाकारों ने सिर पर मटके रखकर संतुलन, लय के साथ नृत्य प्रस्तुत किये, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
कला एवं संस्कृति विभाग की शासन उप सचिव एवं जवाहर कला केन्द्र की अतिरिक्त महानिदेशक अनुराधा गोगीया ने बताया कि समारोह का मुख्य आकर्षण बाल कलाकारों द्वारा राजस्थान की पारंपरिक लोक विधाओं की प्रस्तुति रही, जिसने केन्द्र की नवाचारी सोच एवं गुरु-शिष्य परंपरा को सशक्त रूप में अभिव्यक्त किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान बाल कलाकारों की प्रतिभा, ऊर्जा एवं लोक परंपराओं के प्रति उनकी गहरी समझ ने यह सिद्ध किया कि युवा पीढ़ी के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक विरासत को सशक्त रूप से आगे बढ़ रही है।