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Rajasthan / 29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन— ब्रेकआउट सेशन—2: 'एआई एंड डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर सिक्योर पब्लिक सर्विसेज' सुरक्षित डिजिटल सेवाओं पर मंथन, सुरक्षित एआई के बिना डिजिटल भविष्य अधूरा

29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन—  ब्रेकआउट सेशन—2: 'एआई एंड डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर सिक्योर पब्लिक सर्विसेज'  सुरक्षित डिजिटल सेवाओं पर मंथन, सुरक्षित एआई के बिना डिजिटल भविष्य अधूरा
Dinesh Bhatt July 02, 2026 11:54 AM IST

जयपुर, 1 जुलाई। 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के तहत बुधवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित द्वितीय ब्रेकआउट सत्र का विषय 'एआई एंड डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर सिक्योर पब्लिक सर्विसेजरहा। सत्र की अध्यक्षता प्रो. एन.पी. पाधीनिदेशकएमएनआईटी जयपुर ने की। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से आवश्यक सेवाओं के लिए एआई पर निर्भर होती जा रही है और भविष्य में एआई के प्रभावी एवं सुरक्षित उपयोग के बिना सामान्य जीवन की कल्पना संभव नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और दक्ष एआई टूल्स के अभाव में डिजिटल जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के विस्तार के बावजूद निकट भविष्य में मानव बुद्धिमत्ता का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।

वेब 5.0 युग में साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता—

सत्र के पैनलिस्ट प्रो. वीरेंद्र सिंहकंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभागभारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई ने सुपर स्मार्ट वेब 5.0 के दौर में साइबर सुरक्षा की चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने साइबर सुरक्षा उल्लंघन के विभिन्न उदाहरण प्रस्तुत करते हुए डिजिटल अवसंरचना को सुरक्षित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई के प्रभावी उपयोग के बिना पारदर्शिताजवाबदेही तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

विश्वसनीय एआई से ही मजबूत होगा ई-गवर्नेंस—

पैनलिस्ट श्री रवि गुप्ताआईपीएस (सेवानिवृत्त)कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं महानिदेशकसेंटर फॉर गुड गवर्नेंसहैदराबाद ने कहा कि एआई ने सर्विस डिलीवरी को प्रोएक्टिव बनाया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एआई के बिना ई-गवर्नेंस विश्वसनीय नहीं बन सकता। उन्होंने डेटा गोपनीयतासुरक्षित पहचान एवं एक्सेस मैनेजमेंट की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने सुरक्षित डेटा एन्क्रिप्शन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि डेटाएआई का ईंधन हैइसलिए इसकी सुरक्षा सरकार नियंत्रित डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सुरक्षित एआई इकोसिस्टम विकसित करना समय की मांग—

पैनलिस्ट श्री नितिन उमेशसीआईएसओप्रामेरिकागुरुग्राम ने कहा कि एआई अब स्थायी वास्तविकता बन चुका है और इससे जुड़े जोखिमों का सामना करने के लिए प्रणालियों को निरंतर विकसित करना होगा। उन्होंने एआई के बढ़ते प्रसार से उत्पन्न जोखिमों के व्यवस्थित आकलन तथा सुरक्षित एआई इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहींडॉ. रमेश बाबू बट्टुलाएसोसिएट प्रोफेसरकंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभागएमएनआईटी जयपुर ने कहा कि हाल के वर्षों में एआई के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि एआई के व्यापक विस्तार के लिए इसकी सेवाओं का सुरक्षित एवं विश्वसनीय होना आवश्यक है तथा बदलते जोखिमों के अनुरूप सुरक्षा तंत्र को लगातार अद्यतन किया जाना चाहिए।

प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ समापन—

सत्र का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआजिसमें प्रतिभागियों ने एआईसाइबर सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से संवाद किया। समापन अवसर पर डीओआईटीसीराजस्थान के तकनीकी निदेशक श्री अखिलेश मित्तल ने सभी पैनलिस्टों को स्मृति-चिह्न भेंट किए।

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