LLB छात्रों का साल हुआ बर्बाद, MLSU ने नही की बार काउंसिल के आदेशों की पालना, RTI के जवाब में झाडा पल्ला
सूचना के अधिकार के अंतर्गत मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा प्रदत्त जवाबों से बहुत बड़ा खुलासा हुआ है जिसमें लॉ कॉलेज के छात्रों के बेशकीमती साल का विश्व विद्यालय द्वारा बर्बाद किया जाना सामने आया है।
उदयपुर निवासी सिविल इंजीनियर जयवंत भैरविया ने सूचना के अंतर्गत कुछ बिंदुओं पर सूचना माँगी थी जिनमे जुलाई 2016 में बी एल एल एल बी में प्रवेश लेने वाले छात्रों का 5 वर्षीय कोर्स जून 2021 से पूर्व कम्पलीट करने हेतु वर्तमान डीन द्वारा किये गए कार्यो के विवरण की सूचना माँगने पर डीन द्वारा सामान्य शाखा, परीक्षा शाखा एवं गोपनीय शाखा द्वारा जारी आदेश की पालना कर प्रशासनिक कार्य किया जाना बताया लेकिन प्रदत्त सूचना में ये नही बताया कि जून 2021 से पूर्व केवल 9 th सेमेस्टर की ही परीक्षाएं हुई है 10th सेमेस्टर की नहीं, स्पष्ट है कि डीन द्वारा इतने ऊँचे प्रशासनिक पद पर बैठने के बाद भी छात्रों का कीमती साल बचाने के लिये कुछ नही किया गया और अन्य विभागों पर निर्भरता बताई , यदि अन्य विभाग 2 साल भी परीक्षाएं आयोजित नहीं करते तो भी क्या डीन इस तरह की लाचारी दिखाते ? ,क्या उनका यही प्रशासनिक कौशल है ?
दूसरे बिंदु में छात्रों का वर्ष बर्बाद होने पर उत्तरदायी व्यक्ति के नाम की सूचना माँगी गई लेकिन यहाँ जिम्मेदारी लेने की जगह पल्ला झाड़ बताया गया कि कोरोना को लेकर समय समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशो की पालना कर परीक्षाएं आयोजित की गई,जबकि MLSU ऊँची तनख्वाह पाने वाला स्टॉफ समय पर परीक्षाएं आयोजित करने व रिजल्ट निकालने में नाकाम रहा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह जो कि आवेदक को RTI में बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा भेजे गए जवाब द्वारा प्राप्त हुई है वह यह कि LLB कोर्स में केवल अंतिम वर्ष के छात्रों की ही परीक्षाएं आयोजित करने के आदेश थे अन्य वर्ष में अध्यन रत छात्रों को उनके पिछले वर्ष के परफॉर्मेंस और इंटरनल में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रमोट करना था और कॉलेज खुलने के बाद केवल अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं उचित समय मे करवानी थी और यदि किसी कारण से छात्र कोई अंतिम सेमेस्टर का कोई पेपर पास नही कर पाते तो उन्हें डिग्री पूर्ण करने से पूर्व उन पेपर को पास करने की सुविधा दी गई थी।
स्पष्ट है कि अंतिम वर्ष के छात्रों के अलावा अन्य सभी वर्षो के छात्रों को प्रमोट किया जाना था और कॉलेज खुलने के बाद केवल अंतिम सेमेस्टर की ही परीक्षा उचित समयावधि में लेकर समय पर रिजल्ट निकालना था।लेकिन यूनिवर्सिटी ने अंतिम वर्ष की परीक्षा लेने की जगह सभी सेमेस्टर की परीक्षाएं बहुत देर देर से आयोजित की जबकि फाइनल के अलावा सभी सेमेस्टर की परीक्षाएं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आदेशानुसार नही लेनी थी और इसके बाद रिजल्ट भी देर से निकाला जिसकी वजह से लॉ छात्रों का कीमती एक साल खराब हो गया।
जयवंत भैरविया की कलम से
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