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clean-udaipur उदयपुर में सड़कें बेहाल,जिम्मेदार खामोश और मरती जनता !
News Agency India September 01, 2019 03:08 PM IST

उदयपुर में सड़कें बेहाल,जिम्मेदार खामोश और मरती जनता !

उदयपुर में सड़कों की हालत आज जैसी पहले कभी नहीं रही। कभी उदयपुर शहर अपनी बेस्ट सड़कों के नाम शूमार होता था। आप गलियों समेत शहर की चकाचक सड़कों पर गुमान किया करते थे लेकिन इस गुमान को उदयपुर के सरकारी सिस्टम ने तोड़ दिया है। बढ़िया सड़के अब गड्ढों का सागर बनती चली जा रही है।

क्या कारण रहे है उदयपुर की इस खस्ताहाल सड़को के ?

कारणों पर ध्यान देने पर सबसे पहले सामने आता है सिस्टम और ठेकेदारों का गठजोड़ !

जी हाँ ! उदयपुर में सड़कों के क्वालिटी इंस्पेक्शन नाम की व्यवस्था को साइड में रख दिया गया है। रोड निर्माण सामग्री और रोड बनाने के कायदों की ठेकेदार सरे आम धज्जियाँ उड़ाते है। क्वालिटी चेक करने वाले पहले से ही सेट कर दिए जाते है। चाहे नगर निगम की सड़क हो या UIT की हो। कमोबेश सारी की सारी सड़के तय मानकों पर नहीं बनायी जाती है। क्वालिटी निर्माण के अभाव में सड़के जल्द टूट जाती है और फिर नया टेंडर निकाल अधिकारी फिर अपने कर्तव्य पथ पर लग जाते है।अगर सड़कों की क्वालिटी टेस्ट की बात की जाती है तो अधिकारी अगल बगल देखने लगते है।

उदयपुर की सड़कों की वास्तविक स्थिति जनता को इस बार बारिश के बाद देखने को मिली जहाँ पिछले 15 दिनों में शहर की कई सड़को पर छोटे बड़े वाहन धंस गए। कई जग़ह तो 2 फिट तक सड़क धंस गयी और वाहन उसमे फँस गए। सोशल मीडिया फेसबुक पर ऐसे कई केस लोगों ने फोटो के साथ पोस्ट किये है। ऐसी सड़क कैसे बन जाती है जो अंदर से पोली हो ?

दूसरा बड़ा कारण स्मार्ट सिटी उदयपुर का सीवरेज प्रोजेक्ट रहा जिसकी प्लानिंग बार बार बदली गयी। पहले तो स्मार्ट सिटी उदयपुर द्वारा पूरी सिटी में कई जगह एक साथ सीवरेज प्रोजेक्ट चालू किया गया जिससे सबसे ज्यादा परेशानी हुई। बैच में काम करने की बजाय बल्क में काम करने वाली एल एंड टी. जैसी कंपनी ने सीवर हॉल्स को चालू निर्माण सामग्री से ढक दिया जो पहली बारिश में ही उखड गए। साथ ही जिस इलाके में काम पूरा होता चला गया,वहाँ साथ साथ सड़कों का निर्माण नहीं किया गया।पता नहीं क्यों स्थानीय प्रशाशन को एल एंड टी. जैसी कंपनी के कार्यों की क्वालिटी पर पूरा यकींन है ?

इससे पहले नगर निगम उदयपुर सीवर प्रोजेक्ट की आड़ में 8 महीनों तक चुपचाप बैठा रहा और सड़कों के निर्माण और मरम्मत में कोताही बरती गयी। क्या कारण है कि दिल्ली गेट,सूरजपोल,चेटक जैसी चौराहे की सड़के हर बारिश में उखड जाती है ? क्यों सरकार और स्थानीय प्रशाशन वहाँ सीमेंट की सड़के नहीं बनवाता है ? क्यों हर साल सड़के टूट जाती है ?

आपको बताते चले कि सड़कों के मरम्मत का बजट भी हर साल आता है फिर ये पैसा कहाँ जाता है किसे पता नहीं।प्रशाशनिक अधिकारियों सहित सभी को पता होता है कि अमुक सड़क बारिश के दौरान टूट सकती है फिर भी कोई अधिकारी न तो बारिश से पूर्व सड़क सही करने का प्रयास करता है और न ही लगातार टूटने वाली सड़को और चौराहों को सीमेंटेड किया जाता है।

सबसे अहम बात ये है कि कहने को तो उदयपुर स्मार्ट सिटी बन गई है लेकिन अधिकारी अब तक स्मार्ट नहीं बने है। उदयपुर के जिस विभाग की मर्जी होती है वो एक लेटर नगर निगम को देकर सड़क खोदने में लग जाता है और निगम चुपचाप देखता रहता है। कोई एकीकृत कमान ही नहीं उदयपुर में जो सड़के बनने से पहले अन्य विभागों से समन्वय कर स्पष्ट कर सके कि कोई भी काम सड़क बनने से पहले पूरे कर लिए जाए चाहे वो नालियाँ बनाने का काम हो या टेलीफोन केबल डालने का। लेकिन उदयपुर में ऐसा कुछ है नहीं।

दूसरा सड़कों के टूटने का कारण बारिश से पूर्व शहर के नालों और नालियों की सफाई नहीं होना है जिससे बारिश के बाद जलभराव ज्यादा होता है जिससे सड़के जल्दी टूट जाती है। उदयपुर की सड़कों के टूटने का सबसे बड़ा कारण इनकी निर्माण क्वालिटी का घटिया होना है जिसकी क्वालिटी चेक या तो किया नहीं जाता है या सेट कर दिया जाता है।

उदयपुर प्रशाषन सोया हुआ है और लोग बारिश में गड्ढों में गिर रहे है। पर्यटक सहित स्थानीय लोग परेशान हो रहे है।

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