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clean-udaipur माथे पर तिलक के साथ क्‍यों लगाए जाते हैं चावल ?
News Agency India January 01, 2020 04:40 PM IST

माथे पर तिलक के साथ क्‍यों लगाए जाते हैं चावल ?

हिन्‍दू धर्म में पूजा-पाठ ति‍लक के बिना अधूरा समझा जाता है। घर में कोई त्यौहार, शादी या पूजा हो तो इसकी शुरुआत तिलक लगा कर ही की जाती है। तिलक लगाना शास्‍त्रों में शुभ माना गया है, तिलक लगाने के साथ-साथ माथे पर चावल भी लगाए जाते हैं। बहुत कम लोग इस बारे में जानते होंगे कि कुमकुम के साथ चावल लगाने का भी एक विशेष महत्‍व होता है।

आज आपको इसके महत्‍व के बारे में बताया जा रहा हैं, जिसे जानने के बाद आप चावल यानी अक्षत के बिना माथे पर तिलक कभी नहीं लगाएंगे। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो माथे पर तिलक लगाने से दिमाग में शांति और शीतलता बनी रहती है, इसके अलावा चावल को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। वही अगर शास्त्रों की बात करें तो चावल को हवन में देवी देवताओं को चढ़ाने वाला शुद्ध अन्न माना जाता है।

एक मान्यता के अनुसार चावल का एक अन्य नाम 'अक्षत' भी है, अक्षत का अर्थ होता है - कभी क्षय ना होने वाला या जिसका कभी नाश नहीं होता है, तभी तो हम हर खास मौके पर चावल जरूर बनाते है, जिस चावल का इस्तेमाल पूजा-पाठ में किया जाता है - उसे 'अक्षत' कहते हैं।

नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलता है चावल..

ऐसा माना जाता है कि कच्चा चावल व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। यही वजह है कि पूजा के दौरान ना केवल माथे पर तिलक लगाते समय इसका इस्‍तेमाल होता है, बल्कि पूजा की विधि संपन्न करने के लिए भी चावलों का इस्तेमाल किया जाता है। आपने अक्सर देखा होगा कि पूजा में तिलक और पुष्प के साथ कुछ मीठा और चावल जरूर होते हैं, वो इसलिए क्यूंकि पूजा की विधि बिना चावलों के पूरी नहीं हो सकती।

चावलों को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और इसे माथे पर तिलक के साथ लगाया जाता है। इसके इलावा पूजा में भी कुमकुम के तिलक के ऊपर चावल के दाने इसलिए लगाए जाते हैं, ताकि हमारे आस पास जो नकारात्मक ऊर्जा है, वो खत्म हो सके। ऐसा करने पर हमारे आस-पास की 'नकारात्मक ऊर्जा' 'सकारात्मक ऊर्जा' में परिवर्तित हो जाती है।

वैसे हिन्दू धर्म पूजन से जुड़ी अनेक परंपराएँ हैं और उन्हीं में से एक परंपरा है, पूजन के समय माथे पर अधिकतर कुंकुम का तिलक लगाने की और उस पर चावल लगाकर चावल पीछे की तरफ फेंकने की। तिलक ललाट पर या छोटी सी बिंदी के रूप में दोनों भौहों के मध्य लगाया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि कोध से तिलक लगाने से दिमाग में शांति, तरावट एवं शीतलता बनी रहती है।

मस्तिष्क में सेराटोनिन व बीटा एंडोरफिन नामक रसायनों का संतुलन होता है। इससे मेधा शक्ति बढ़ती है तथा मानसिक थकावट नहीं होती। साथ ही कुमकुम का तिलक त्वचा रोगों से मुक्ति दिलवाता है। चावल लगाने का कारण यह है कि चावल को शुद्धता का प्रतीक माना गया है और कुछ चावल के दाने सिर के ऊपर फेंकने का कारण यह है कि शास्त्रों के अनुसार चावल को हवन में देवताओं का चढ़ाया जाने वाला और शुद्ध अन्न माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि कच्चा चावल सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला है।इसी कारण पूजन में कुंकुम के तिलक के ऊपर चावल के दाने लगाए जाते हैं, साथ ही चावल को पीछे की तरफ इसीलिए फेंका जाता है.. ताकि हमारे आसपास जो भी नकारात्मक ऊर्जा उपस्थित हो, वह सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाए और हम सकारात्मक विचारों के साथ जीवन जीएं। नकारात्मकता का सोच हमें छू भी ना पाए।

तिलक लगाना सात्विकता का प्रतीक है। कोई भी शुभकार्य करने से पहले तिलक लगाने की परंपरा सदियों से विद्यमान है। तिलक अमूमन हल्दी, कुमकुम, चंदन और रोली से लगाया जाता है। तिलक लगाने के बाद 'अक्षत' यानी चावल लगाने की भी परंपरा है।

तिलक लगाने के बाद चावल लगाने का भी प्रचलन है, अक्षत यानी चावल शांति का प्रतीक है। इसलिए तिलक लगाने के बाद चावल लगाया जाता है। मस्तिष्क के जिस स्थान पर तिलक लगाया जाता है, उसे आज्ञाचक्र कहा जाता है। शरीर शास्त्र के अनुसार यहां पीनियल ग्रंथि होती है। तिलक पीनियल ग्रंथी को उत्तेजित बनाए रखती है। ऐसा होने पर मस्तिष्क के अंदर दिव्य प्रकाश की अनुभूति होती है।

शास्त्रों के मतानुसार हिन्दू धर्म के प्रत्येक धार्मिक कर्म-काण्ड में चावल का बहुत महत्व है। देवी-देवता को अर्पण करने के साथ ही इसे जातक के मस्तक पर सज्जित तिलक पर भी लगाया जाता है।

हमारे शरीर में 7 सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं, जो अपार शक्ति के भंडार हैं। इन्हें चक्र कहा जाता है। माथे के बीच में जहां तिलक लगाते हैं, वहां आज्ञाचक्र होता है। यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जहां शरीर की प्रमुख तीन नाडि़यां इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती हैं। इसलिए इसे त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है। यह गुरु स्थान कहलाता है। यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है। यही हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी है। इसी को मन का घर भी कहा जाता है। इसी कारण यह स्थान शरीर में सबसे ज्यादा पूजनीय है।

ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तक में तरावट आती है। लोग शांति व सुकून का अनुभव करते हैं। नियमित रूप से तिलक लगाने से सिरदर्द की समस्या में कमी आती है और यह कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाता है। तिलक संग चावल लगाने से लक्ष्मी आकर्षित होती हैं।

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