बाघ की तरह लुप्त हो जायेंगे तेंदुए उदयपुर से,हज़ारों की तादाद घट गयी सैकड़ो में !
उदयपुर में किसी समय इतना सघन वन क्षेत्र था कि यहाँ बाघ (शेर) तक पाए जाते थे। मेवाड़ के महाराणाओं और कई अंग्रेज़ अधिकारियों के दसियों फ़ोटो इस बात की गवाही देते है। अगर यू कहे कि आज से 100 साल पहले तक उदयपुर के जंगलो में कई प्रजाति के दुर्लभ और सामान्य वन्य जीव थे। साथ में तेंदुए तो इतने कि गिनती ही नहीं। यदा कदा ये तब भी और आज भी शहर में आ धमकते है।
फ़िलहाल टीडी के परसाद वन्य क्षेत्र में एक आदमखोर तेंदुए ने अब तक तीन ग्रामीणों की जान ले ली है। उदयपुर के एक ओर वन्य क्षेत्र में आदमखोर तेंदुए ने आतंक मचा रखा है। आखिर तेंदुए इतने हिंसक क्यों हो गए है ? क्यों वे इंसानो को शिकार बना रहे है ?
जवाब है आप,हम और सरकारी तंत्र !
हमने बीते सालो में इतने पेड़ और जंगल काट दिए कि जंगल बचे ही नहीं। जहाँ छोटे मोटे जंगल बच गए है वहाँ भी इंसान अपनी पहुँच बना रहा है। शिकार के छोटे जीव जिनसे तेंदुए जैसे जानवरों का पेट भरता है उन्हें आम इन्सान पहले ही मार कर खा चूका है। अब ये जीव खाने के लिए गावों का रुख करते है जहाँ आसान शिकार कुत्ता ,मुर्गी ,छोटी गाय आदि जल्दी से मिल जाते है।
जब ये नहीं मिलते तो ये झोपड़ो के बाहर सो रहे लोगों पर हमला कर देते है या जंगल में जानवरो को चराते लोगों पर हमला। इसका सीधा मतलब ये कि जंगलों में छोटे जानवर खत्म हो चले है और तेंदुओं जैसे जानवरों को इंसान पर हमला करना पड रहा है। वन विभाग राजस्थान की सारी योजनाए फ़ैल होती नज़र आ रही है। जंगल सिमट रहे है। अभ्यारण्य में भी जानवर सुरक्षित नहीं है और उन्हें खाने को नहीं मिल रहा है। वन्य जीवों के घर में इंसान घुसते जा रहे है और मारे जा रहे है।