क्या है भारत सरकार की डिजिटल और सोशल मीडिया के लिए नयी गाइडलाइंस ?
भारत सरकार ने गुरुवार को सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म के लिए नई गाइडलाइंस जारी करी हैं।इन नई गाइडलाइंस के दायरे में फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और नेटफ्लिकस, अमेज़न प्राइम, हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म आएंगे। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए गाइडलाइंस की घोषणा की।
गाइडलाइंस के तहत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वह आपत्तिजनक कंटेंट को जल्द से जल्द अपने प्लेटफॉर्म से हटाएंगा और साथ ही सरकारी या कानूनी आदेश के बाद आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने में 36 घंटे से ज्यादा का वक्त नहीं लगना चाहिए।
सोशल मीडिया कंपनियों को किसी मामले की जांच में 72 घंटे के भीतर जांच एजेंसियों को जानकारी मुहैया करानी होगी। शिकायत मिलने पर सोशल मीडिया कंपनियों को आपत्तिजनक कंटेंट शिकायत मिलने वाले दिन ही हटाना होगा।
इसके साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को एक मुख्य शिकायत निवारण अधिकारी की तैनाती करनी होगी, जो कानूनी जांच एजेंसियों के साथ कॉर्डिनेट करेगा। साथ ही गाइडलाइंस लागू होने के 3 महीने के भीतर ही कंपनियों को “Grievance Redressal Officer” की भी नियुक्ति करनी पड़ेगी।
साथ ही गाइडलाइंस के मुताबिक एक कमेटी का गठन किया जाएगा। जिसमें रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और खूफिया विभाग के साथ ही आईटी और महिला एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस कमेटी के पास शक्ति होगी कि वह नियमों के उल्लंघन पर सोशल मीडिया कंपनियों को चेतावनी दे सके और साथ ही आपत्तिजनकर कंटेंट को सेंसर करा सके। ये नियम डिजिटल मीडिया पर भी लागू होंगे।
गाइडलाइंस में महिला यूजर्स के गौरव की रक्षा करने के लिए, उनकी मोर्फ्ड इमेज या आपत्तिजनक कंटेंट कोई पोस्ट करता है तो शिकायत मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट को तुरंत हटाना होगा। साथ ही आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने वाले व्यक्ति की जानकारी भी जांच एजेंसियों को देनी होगी।
गाइडलाइंस में इस बात का भी जिक्र है कि यूजर्स के वेरिफिकेशन के बाद उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा वेरिफिकेशन सिंबल दिया जाएगा। इससे यूजर्स को पता चल सकेगा कि कौन वेरिफाइड और कौन अनवेरिफाइड यूजर है।
इसके साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को हर महीने कम्पलायंस रिपोर्ट जारी करनी होगी. जिसमें बताया जाएगा कि कितनी शिकायतें आईं और उन पर क्या कदम उठाए गए है।
क्या है भारत सरकार की सोशल मीडिया के लिए नई पॉलिसी ?
प्रसाद ने कहा, "सोशल मीडिया कंपनीज का भारत में कारोबार करने के लिए स्वागत है। इसकी हम तारीफ करते हैं। व्यापार करें और पैसे कमांए।" उन्होंने कहा कि सरकार असहमति के अधिकार का सम्मान करती है लेकिन यह बेहद जरूरी है कि यूजर्स को सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाने के लिए फोरम दिया जाए। प्रसाद ने कहा कि हमारे पास कई शिकायतें आईं कि सोशल मीडिया पर मार्फ्ड तस्वीरें शेयर की जा रही हैं। आतंकी गतिविधियों के लिए इनका इस्तेमाल हो रहा है। प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग का मसला सिविल सोसायटी से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
सोशल मीडिया पॉलिसी में क्या है?
दो तरह की कैटिगरी हैं: सोशल मीडिया इंटरमीडियरी और सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरी।
- सबको ग्रीवांस रीड्रेसल मैकेनिज्म बनाना पड़ेगा।
- 24 घंटे में शिकायत दर्ज होगी और 14 दिन में निपटाना होगा।
- अगर यूजर्स खासकर महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ की शिकायत हुई तो 24 घंटें में कंटेंट हटाना होगा।
- सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया को चीफ कम्प्लायंस ऑफिसर रखना होगा जो भारत का निवासी होगा।
- एक नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन रखना होगा जो कानूनी एजेंसियों के चौबीसों घंटे संपर्क में रहेगा।
- मंथली कम्प्लायंस रिपोर्ट जारी करनी होगी।
- सोशल मीडिया पर कोई खुराफात सबसे पहले किसने की, इसके बारे में सोशल मीडिया कंपनी को बताना पड़ेगा।
- हर सोशल मीडिया कंपनी का भारत में एक पता होना चाहिए।
- हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के पास यूजर्स वेरिफिकेशन की व्यवस्था होनी चाहिए।
- सोशल मीडिया के लिए नियम आज से ही लागू हो जाएंगे। सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को तीन महीने का वक्त मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने समझा कि मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक लेवल-प्लेइंग फील्ड होना चाहिए इसलिए कुछ नियमों का पालन करना पड़ेगा। लोगों की मांग भी बहुत थी।आपको बताते चले कि इससे पहले 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चाइल्ड पोर्नोग्राफी, रेप, गैंगरेप से जुड़े कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाने के लिए गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिए थे।
