रसूखदार और राजनीति,दूसरी ओर कोरोना से लड़ते योद्धा !
उदयपुर कलेक्टर आनन्दी जी, उदयपुर जिला पुलिस अधीक्षक कैलाश विश्नोई जी और CMHO दिनेश खराड़ी जी दिन के 12 से 15 घण्टे सिर्फ उदयपुर की जनता को बचाने का काम कर रहे है ।
कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में पुलिस के द्वारा लॉक डाउन उल्लंघन करने वाले लोगों पर कार्यवाही का विरोध कर रहे है। आपका क्या मत है ? मत के साथ यहाँ दिए गए तथ्यों पर गौर देना जरुरी है।
- क्या उदयपुर पुलिस ने जनता की सहायता के लिये व्हाट्सअप नम्बर जारी नही जारी किया ? क्या आपने उस नम्बर को अपने वार्ड में फ़ोन ओर व्हाट्सअप ग्रुप के माध्यम से आगे पहुचाया है ? उदयपुर पुलिस ने मदद के लिए जारी किये व्हाट्सप्प नंबर इस प्रकार है 7073100100 और लैंडलाइन नंबर 0294 -2414600
- क्या आपको इस बीमारी की भयावहता के बारे में पता नही है ? क्या आपने इटली ,अमेरिका और जर्मनी की हालत पर गौर किया है ? जहाँ लोग इस हालात में है कि सोच कर ही किसी की रूह कांप जाएँगी?
- क्या पुलिस वालों के घर वाले नही है जिन्हें भी आपके घरवालों और बच्चों की तरह डर भरी बातें सुनने को मिलती होंगी ? संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा पुलिस को है । फिर भी वो रात दिन सड़क पर आपके लिए खड़ी है? आपका रौब सह रही है ?
- इस महामारी में लुधियाना ACP और इंदौर ,उज्जैन के कई अधिकारी ,सिपाही शहीद हो गए अपनी ड्यूटी निभाते ? सिर्फ ड्यूटी नहीं जान बचाने में लगी है पुलिस ।
- क्या लॉक डाउन का मतलब ये है कि कोई भी ढील के दौरान कहीं भी जाने के लिए अधिकृत है ?
- क्या लॉक डाउन के दौरान आपके मोहल्ले/वार्ड में सब्जी,दूध, किराना और चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं है ?
- अगर नहीं है आप पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर व्हाट्सप्प किये और पुलिस कुछ घण्टे में व्यवस्था उपलब्ध करवा देंगी ?
- क्या आपके साथ ऐसा बर्ताव किया गया जो लॉक डाउन के इम्प्लीमेंटेशन के लिए अन्य शहरों की पुलिस कर रही है ? ( हालाँकि पुलिस को लॉक डाउन के सफल क्रियान्वयन के लिए उठाए गए हर कदम का इस समय समर्थन किया जाना चाहिए क्योंकि ये पुलिस ही है जो 24 घण्टे धूप छाँव हवा में सड़क पर खड़ी है ताकि आप बच जाएं। ये पुलिस ही है जो राजनीतिक और अन्य ब्यूरोक्रेसी के प्रभाव के दौरान भी अपना कर्त्तव्य निष्ठा के साथ निभा रही है ।)
- अगर एक भी पॉजिटिव दुबारा आ गया और किसी इलाके को सील करना पड़ गया तो उस इलाके में कर्फ्यू लग जाएगा और हो सकता है नए निर्देशानुसार उदयपुर शहर भर में कर्फ्यू लगाना पड़े तो कौन जिम्मेदार होगा ?
- हाँ । लॉक डाउन के दौरान हर व्यक्ति का परमिशन लेकर बाहर निकलना जरुरी है ? यहाँ तक कि भीलवाड़ा केस में तो मीडिया तक पाबंदी लगायी गयी थी ?
- अब भी गंभीर रोगियो के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध है । साथ ही आपके वार्ड में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी समय पर खुले रहते है। दवाई आपके मोहल्ले में नही है तो पुलिस के व्हाट्सअप हेल्पलाइन पर कॉल करिये ,घर पहुँचाने की व्यवस्था के लिए तैयार है उदयपुर और राजस्थान और भारत भर की पुलिस।
- आपके वार्ड /मोहल्ले में हर जरूरत मंद और भूखे व्यक्ति तक पुलिस खाना पहुचाने को तैयार है । आप उदयपुर पुलिस के व्हाट्सअप नंबर पर मैसेज तो डालिये।
- याद रखिये एक छोटी सी गलती हमारे अपनो को और उदयपुर को मौत के मुँह में ले जा सकती है ।
- अगर पुलिस,सरकारी कर्मचारियों ,स्वास्थ्य और चिकित्सीय कर्मियों ने अपने हाथ खींच लिए तो फिर क्या होगा? संक्रमण न फैले इसलिए ये सब कोरोना योद्धा अपनी जान की परवाह किये बिना मेहनत कर रहे है ।
- अगर एकदम वायरस बर्स्ट हुआ और लोग जॉम्बीज बन अन्य शहरों के भाँति इधर उधर थूकते नज़र आयेंगे तो आप किसको मदद के लिए बुलाएँगे ?
ये समय अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता दिखाने का नहीं बल्कि कोरोना से लड़ने वाले हर योद्धा के समर्थन करने का है।
तीन उदयपुर के अफसर ,उदयपुर कलेक्टर आनन्दी जी, उदयपुर जिला पुलिस अधीक्षक कैलाश विश्नोई जी और CMHO दिनेश खराड़ी जी को उदयपुर की जनता ने कोरोना से लड़ाई का हीरो बनाया है। जनता ने सोशल मीडिया पर इन कोरोना नायकों पर जितना आभार व्यक्त किया है वो इतिहास बन गया है। क्या हमें इनमे से किसी भी सिस्टम के घटक पर आपत्ति करने का हक़ है या अधिकार है ?