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clean-udaipur राजस्थान में खनन गतिविधियों पर निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल !
News Agency India October 02, 2020 01:32 PM IST

राजस्थान में खनन गतिविधियों पर निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल !

जयपुर,25 अक्टूबर: राज्य के माइंस विभाग ने प्रदेश में खनन गतिविधियों पर निगरानी व्यवस्था को चाकचौबंद करने की कवायद शुरु कर दी है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम डॉ. सुबोध अग्रवाल के साथ सचिवालय में आयोजित बैठक में बैंगलोर की एयूएस संस्था ने खनन गतिविधियों की मोनेटरिंग में आधुनिक तकनीक ड्रोन के उपयोग के संबंध में विस्तार से प्रजेन्टेशन के माध्यम से जानकारी दी। संस्था के प्रतिनिधि विपुल सिंह ने बताया कि देश के कुछ प्रदेशों में ड्रोन तकनीक का उपयोग आरंभ कर दिया है। ड्रोन तकनीक से 3 डी इमेज प्राप्त कर सूक्ष्मतम गतिविधियों को देखने के साथ ही गतिविधियों का आकलन किया जा सकता है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा है कि राज्य में खनन गतिविधियों पर निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक कारगर सिद्ध हो सकती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में खनन गतिविधियों की सूक्ष्म मोनेटरिंग के लिए विजिलेंस प्रकोष्ठ को मजबूत बनाने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि माइंस विभाग बजट घोषणा की क्रियान्विति के साथ ही खनन गतिविधियों की सूक्ष्म निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में आगे कदम बढ़ाए है। विभाग के अधिकारियों द्वारा गुजरात में इसका अध्ययन किया गया है वहीं राज्य में आधुनिक तकनीक के उपयोग के सभी संभावित पक्षों का अध्ययन आरंभ कर दिया गया हैै।

एसीएस डॉ. अग्रवाल ने बताया कि आधुनिक तकनीक से सभी खनन गतिविधियों यथा खनन कार्य, खनन से निकाले गए खनिज की मात्रा, परिवहन, पर्यावरण मानकों की पालना, खनन गतिविधियोें में सुरक्षा मेजर्स की पालना, श्रमिकों की स्वास्थ्य प्रोटोकाल की पालना सहित सभी पक्षों की मोनेटरिंग लिए आधुनिक सूचना तकनीक ड्रोन जैसी तकनीक के माध्यम से किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इससे जहां खनन गतिविधियों में सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करवाई जा सकेगी वहीं अवैध खनन से लेकर अवैध परिवहन व कार्मिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा साधनों आदि को देखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इससे जहां अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी, वहीं राजस्व चोरी रुकेगी और राज्य में खनन गतिविधियों से आय में बढ़ोतरी भी हो सकेगी।

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डॉ. अग्रवाल ने कहा कि राज्य में खनन गतिविधियों पर निगरानी और सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित कराना सरकार की प्राथमिकता है। अवैध खनन व निकासी पर आधुनिक साधनों से ही प्रभावी तरीके से निगरानी रखी जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने कदम उठाने शुरु किए हैं।

बैठक में जेएस माइंस ओम कसेरा, निदेशक माइंस केबी पण्ड्या ने भी सुझाव दिए।

बैठक में एनके कोठरी अतिरिक्त निदेशक सतर्कता उदयपुर अजय शर्मा अतिरिक्त निदेशक भू विज्ञान जयपुर, श्री एसके शर्मा खनि अभियंता जोधपुर, टीए श्री सतीश आर्य, अधीक्षण भूवैज्ञानिक सचिवालय श्री संजय दुबे आदि ने हिस्सा लिया।

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