उदयपुर की झीलें बन गयी नावों का बेतरतीब हाईवे, उदयपुर में कुल 123 नावें होती संचालित !
उदयपुर की झीलों से जुड़े मुद्दे अब फिर जनता की जुबान पर सर चढ़ कर बोल रहे है वही हालिया झील से जुडी समिति की बैठक भी हुई,जिसमें प्रशाशन और झील कल्याण से जुड़े लोगों ने अपने अपने विचार रखे हालांकि MOM (मिनटस ऑफ़ मीटिंग) अब भी मीडिया और समिति से जुड़े लोगों तक नहीं पहुँचे है।
बरहाल झील में संचालित नावों की संख्या को लेकर ऐसे सच सामने आये है जिससे झील तंत्र को नुकसान होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
उदयपुर प्रशाशन ने इस वर्ष कुल मिलाकर 123 नावें उदयपुर की झीलों में संचालित होने की अनुमति दे रखी है जिसमे सर्वाधिक सँख्या में 78 नावों की स्वीकृति पीछोला झील के लिए दे रखी है। इसके बाद फतहसागर झील के लिए 22 नावों के संचालन की अनुमति,जयसमंद झील के लिए 14 नावों की अनुमति,गोवर्धन सागर झील के लिए 02 नावों की अनुमति,उदयसागर झील के लिए 04 नावों की अनुमति,बाठेड़ा तालाब के लिए 02 नावों की अनुमति और कोटड़ा तालाब के लिए 01 नावों की अनुमति इस वर्ष दी गयी है।

यहाँ ये विचारणीय प्रश्न ये है कि किस आधार पर पीछोला जैसी झील में 78 नावों के संचालन की अनुमति दी गयी है गोया पीछोला झील है या नावों की झील ? इतनी सँख्या में नावों के संचालन होने से झील में नौका हादसा होने का खतरा ज्यादा है फिर भी आँख मीच झील से पैसा कूटने वालों ने नावें खरीद प्रशाशन से अनुमति ले ली। यहाँ ये बात भी ध्यान में रहे कि एक ही झील में 78 नावों के संचालन से झील के पारिस्थितिक तंत्र के साथ जलीय झीलों को भी नुकसान होता है। सूत्र बता रहे कि वर्ष 2015 -2016 में तो अकेली पीछोला झील में 81 नावों को संचालित होने की अनुमति दी गयी थी।

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