उदयपुर में संचालित सभी रूफ टॉप रेस्टॉरेंट अवैध ,नहीं हो रही पालना उच्च न्यायालय के आदेशों की !
राजस्थान उच्च न्यायालय ने सरकार नवंबर 2019 को जयपुर समेत राजस्थान राज्य के बहुमंजिला भवनों में संचालित होने वाले सभी रूफ टॉप वाले रेस्टॉरेंट को बंद करने का निर्देश दिया था । अदालत ने कहा था कि रूफ टॉप रेस्टॉरेंट अवैध है क्योंकि उन्हें राजस्थान सरकार के स्व-शासन विभाग द्वारा जारी आदेशों के अनुसार एनओसी नहीं दी जा सकती है।
कोर्ट ने सरकार से कहा कि अगर उनके पास एनओसी है तो भी रूफ टॉप रेस्टॉरेंट को बंद किया जाए। अदालत ने सरकार को 18 दिसंबर को एक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।अदालत ने कफाका रेस्तरां प्रशासन द्वारा दायर एक याचिका पर ये निर्देश जारी किए थे। सितंबर में एलपीजी सिलेंडर विस्फोट के बाद जयपुर म्युनिसिपल कारपोरेशन द्वारा रेस्तरां को सील कर दिया गया था। अकेले जयपुर में लगभग 170 रूफ टॉप रेस्टॉरेंट संचालित हो रहे हैं। उनमें से अधिकांश के पास आवश्यक परमिट और एनओसी नहीं है।
झीलों के शहर उदयपुर में 600 से ज्यादा रूफ टॉप रेस्टॉरेंट झील और पर्यटन स्थलों के पास संचालित हो रहे है और इनमे से किसी के पास किसी तरह की कोई अग्नि शमन विभाग अथवा नगर निगम की कोई अनुमति है। मजे की बात ये है कि उदयपुर के कई बड़े पाँच सितारा होटल रूफ टॉप रेस्टॉरेंट का अवैध संचालन कर रोजाना लाखों रूपये कूट रहे है।इन रेस्टॉरेंट्स के पास न तो उचित नियमानुसार पार्किंग है और न ही आग जैसी दुर्घटना से बचने के लिए इनके पास कोई उपकरण है। आग लगने की स्थिति में इन रेस्टॉरेंट्स के निकास और सीढ़िया इतनी संकरी है कि बमुश्किल एक आदमी एक बार में बाहर निकल सकता है। झील किनारे कई रूफ टॉप रेस्टॉरेंट ऐसे भी है जहाँ कई तरह के नशे परोसे जा रहे है जिस पर उदयपुर पुलिस समय समय पर रैड डाल कर कार्यवाही भी करती है। ऐसे भी सैकड़ो रेस्टॉरेंट्स है जिन्होंने नगर निगम से कोई खाद्य अनुमति या लाइसेंस भी नहीं ले रखा है।
क्या कारण है कि उदयपुर प्रशाशन सहित नगर निगम की अग्नि शमन शाखा इन रेस्टॉरेंट्स पर आज तक एक भी कार्यवाही नहीं कर पायी ? क्या कारण है कि माननीय हाई कोर्ट के निर्देशों की पालना उदयपुर प्रशाशन सहित नगर निगम की अग्नि शमन शाखा के लिए कोई मायने नहीं रखती है या उदयपुर प्रशाशन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है।
आपको बताते चले कि न्यायमूर्ति इंद्रजीत महंती और न्यायमूर्ति महेंद्र गोयल की डबल बेंच ने जनवरी 2018 में स्व-शासन विभाग द्वारा जारी एक आदेश का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि को छत पर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।