उदयपुर पुलिस कागज़ात होने पर भी जब्त कर लेती है वाहन,फ़र्ज़ी गवाह रखती है तैयार !
उदयपुर में यातायात की समस्या कोई नई समस्या नहीं है और आप उदयपुर यातायात पुलिस को यदा कदा ही ट्रैफिक मैनेज करते देखते होंगे। ट्रैफिक कर्मियों का काम सिर्फ चालान बनाने तक सीमित है और उनके होम गार्ड्स का काम सिर्फ वाहन धारियों को पकड़ने का। ट्रैफिक को दुरुस्त करना इनके या तो इनके बस की बात नहीं या इनके शान के खिलाफ है। यही कारण है कि शहर के मुख्य चौराहो जैसे सूरजपोल,दिल्ली गेट और उदियापोल सर्किल जैसे इलाको में हर समय यातायात जाम की समस्या बनी रहती है।
कई प्राइवेट बस और अन्य वाहन जिनके कागजात तक नहीं है वे फर्राटे से उदयपुर की सड़कों पर दौड़ते है और उनके कागज़ात देखने की बात तो दूर ट्रैफिककर्मी उनसे चालकों से वाहन हटवाने तक को नहीं कहते है मानों कोई दूर का रिश्ता हो। दिन में जब भारी वाहन मना होते है तब भी जुगाड़ वाले सिटी के अंदर अपने भारी वाहनों को दौड़ाते मिल जाएंगे।
शहर के चौराहो पर जैसे दिल्ली गेट पर यातायात ऑफिस के सामने होटल वालों की अवैध पार्किंग का अतिक्रमण इन्हे नहीं दिखता। अगर साहब के कहने पर कार्यवाही होती भी है तो सेटिंग वाले पहले ही कह देते है कि एक दो दिन कर लो फिर वापिस सेट कर लेना।
शहर शाम के समय रेंग रेंग कर चलने को मजबूर है। अवैध वाहन फर्राटे से दौड़ रहे है। लेकिन उदयपुर ट्रैफिक पुलिस को इससे क्या ? उन्हें सिर्फ टारगेट ढूंढने होते है कि किस तरह उनकी जेब गर्म हो सके। यही नहीं टारगेट अगर गलती से पढ़ा लिखा आदमी या सरकारी अधिकारी मिल जाता है वो भी बिना किसी अपराध के,तो भी इनका पुलिसिया रौब कम नहीं होता और ये आपको ऐसे अपराध में चालान भी कर देते है जो अपराध आपने किया भी न हो।
ऐसा ही किस्सा स्मार्ट सिटी उदयपुर के वरिष्ठ एकाउंट अफसर राजू सोनी के साथ गुरुवार शाम 6 :30 बजे के कुम्हारों के भट्टे पर हुआ जब वे ऑफिस से अपने घर लौट रहे थे और उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वे अलवर रजिस्ट्रेशन नंबर की गाड़ी चला रहे थे। तभी एक ट्रैफिक कर्मी ने उनसे रुकने का इशारा किया और अफसर राजू सोनी रुक भी गए।
रुकने के बाद कई मिनट इंतज़ार के बाद मिश्री लाल चौहान द्वारा राजू सोनी को उनके केबिन मे बुलाकर लाइसेंस माँगा गया और पांच सौ रूपये के चालान की बात की गयी। जब राजू सोनी जी ने मिश्री लाल चौहान से अपराध के बारे में पूछा तो वे भड़क गए और सामान्य चालान न बनाकर उनका न्यायालय चालान बना दिया गया जबकि उनसे कोई कागजात भी नहीं मांगे गए।
फिर राजू सोनी ने जब अपराध के बारे में पूछा तो जबरदस्ती उनका अपराध पुलिसकर्मी द्वारा स्क्रिप्ट किया गया और कहा गया कि आप वाहन चलाते समय फ़ोन पर बात कर रहे थे जबकि ऐसा कुछ हुआ नहीं था। मजे की बात ये है कि पुलिसकर्मी के साथ ऐसे फर्जी गवाह भी थे जिसने इस बात की तस्दीक भी कर दी जबकि वो गवाह भी घटना के 15 मिनट बाद घटना स्थल पर पहुँचा था।
जब राजू सोनी वहाँ किसी का मोबाइल अटेंड कर रहे थे तभी ट्रैफिक कर्मी ने बदतमीजी से बात करते हुए उन्हें होमगार्ड के साथ दिल्ली गेट यातायात ऑफिस भिजवा दिया गया और वहाँ जाने पर उन्हें पुलिस लाइन भिजवा दिया गया। दिलचस्प बात ये है कि पढ़े लिखे अफसर राजू सोनी ने अपराध किया ही नहीं था और सारे कागजात तब भी उनकी गाड़ी में पड़े थे और अभी भी पुलिस लाइन स्थित उनके वाहन में पड़े हुए है।
एक ओर दिलचस्प वाक्या ये कि इन्ही राजू सोनी ने न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम से सेवाश्रम चौराहें पर प्राइवेट वाहनों की अवैध पार्किंग का मुद्दा उठाया था जिस पर न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम ने शहर ट्रैफिक DYSP श्री पर्वत सिंह को फ़ोन लगाकर सुचना दी तो उन्होंने बड़ी जल्दी में जवाब देकर कि दिखवाते है ,अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। अभी तक सेवाश्रम पर आप यातायात को चरमराता हुआ देख सकते है।
उदयपुर यातायात पुलिस यातायात सँभालने के बजाय जनता को घेरने में लगी है और ये सरकारी अधिकारी सहित किसी को भी बिना किसी अपराध के फ़साने का माद्दा भी रखती है।