दूधतलाई और फतहसागर की लाइट्स भगवान भरोसे,शिकायतों के बाद भी प्रशाषन नहीं जागरूक !
विश्व प्रसिद्ध झीलों की नगरी अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है। पर्यटको का शहर उदयपुर शाम होते ही अँधेरे का शहर बन जाता है खास तौर पर पर्यटक स्थलों पर ही। सबसे दुखद बात ये है कि पीछोला और दूध तलाई जाने वाले रोड पर लाइट पोल से लाइट्स ही गायब है और दूध तलाई जहाँ पर्यटकों की रैलम पैल बनी रहती है वहाँ शाम होते ही अंधकार छा जाता है। पहले से ही कम रोशनी वाली लाइट्स पर्यटक स्थलों पर लगायी गयी है जिससे रोशनी की तीव्रता कम ही रहती है।
दूध तलाई की लाइट्स की तरफ न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम ने नगर निगम उदयपुर के विध्युत विभाग के अधिकारी रितेश पाटीदार को तक़रीबन तीन बार एक सप्ताह तक फ़ोन पर संपर्क किया गया और उन्होंने दूध तलाई के लिए पहले दिन पोल के ब्रैकेट नहीं होने की बात कही और कहां कि हम एक दो दिन में लाइट्स चालू करवा देंगे। जब उनसे फतहसागर की बंद लाइट्स के बारे में बताया गया तो उनका जवाब था कि विध्युत विभाग की तरफ से फाल्ट आता रहता है जिसे फिलहाल दुरुस्त करवाया जा चूका है।
इसके बाद जब न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम ने जब फतहसागर पर जाकर पता किया तो हालात जस के तस थे। कमोबेश कई लाइट्स बंद पड़ी थी और गाड़ियों की लाइट्स से फतहसागर की रोड रोशन हो रही थी। पर्यटन सीजन शुरू हो चूका है और ऐसे में पर्यटक स्थलों के अँधेरे सही सन्देश नहीं देते है।
ऐसी क्या अकर्मण्यता है स्थानीय प्रशाषन और नगर निगम उदयपुर के अधिकारियों की जो वे शिकायतों के बावजूद 10 दिन तक पर्यटक स्थलों की लाइट्स तक नहीं सही करवा पाए। टूटी रोड के बहाने तो उदयपुर वासी सुन ही रहे है ऐसे में शहर और पर्यटक स्थलों की लाइट्स बंद होने से रात को दुपहिया वाहन सवार भी चोटिल हो रहे है।
लेकिन नगर निगम उदयपुर अभी भी गहरी निद्रा में सो रहा है। जनता जागे इससे पहले नगर निगम उदयपुर का जागना अपेक्षित ही नहीं बल्कि जरुरी भी है। एक बात तो तय है कि निगम अधिकारियों की ये कार्यशैली वर्तमान बोर्ड के लिए घातक सिद्ध होने जा रही है और खामियाजे वो भी नेता भुगतेंगे जिन्होंने अपने क्षेत्र में काम भी किया है। बरहाल समय अब भी है ,चेत जाइये या समय चेता देगा सबको।