उदयपुर की झीलों में नाव संचालन को लेकर प्रादेशिक परिवहन विभाग हुआ सख्त, जानिए क्या है नियम और कार्यवाही !
उदयपुर की झीलों में नावों के संचालन में हो रही गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन सख्त होता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में राजस्थान वोटिंग एक्ट 1956 के प्रावधानों की पालना में और जलाशय नावों की दुर्घटना रोकने और यात्रियों की जीवन की सुरक्षा करने के संबंध में बीते दिन प्रादेशिक परिवहन अधिकारी उदयपुर की अध्यक्षता में एक मीटिंग का आयोजन किया गया, जिसमें जिला परिवहन अधिकारी डॉ कल्पना शर्मा, विभागीय परिवहन निरीक्षक एवं बोट लाइसेंस संचालकों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में लाइसेंस जारी करने के संबंध में और यात्रियों की सुरक्षा के लिए जारी विभागीय निर्देशों की पालना हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।
प्रादेशिक परिवहन अधिकारी प्रकाश सिंह राठौड़ ने बताया कि रेस्क्यू बोट्स एवं रेस्क्यू उपकरणों के संबंध में संपूर्ण सुरक्षा मानकों को लागू किया जाएगा।
- उन्होंने निर्देशित किया कि नावों पर किसी भी स्थिति में प्री- वेडिंग फोटोग्राफी नहीं की जाएगी क्योंकि इससे यात्रियों की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है।
- नावों के रात्रि संचालन की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जाएगी। नावों के संचालन का समय सूर्यास्त से पूर्व और सूर्योदय के बाद ही निर्धारित है। इसलिए विशेष परिस्थितियों के अतिरिक्त रात्रि में नाव संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- एक साथ एक से अधिक नावों को अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही हर नाव के लिए पृथक अनुमति प्राप्त करनी होगी। आवेदन में नाव के संबंध में नियुक्त सुरक्षा कर्मी एवं आवश्यक सुरक्षा उपकरण की सूची भी प्रदान किया जाना जरूरी होगा ।
- इसके बावजूद भी विशेष होने पर अथवा यात्रियों की सुरक्षा को खतरा होने पर मौसम खराब होने पर रात्रि में नाव संचालन की अनुमति अस्वीकार की जा सकती है ।
- केवल ऐसे स्थानों के अतिरिक्त जहाँ नाव के अतिरिक्त आने जाने का साधन ना हो, उनको रात्रि में नाव संचालन हेतु 7 दिन की अनुमति दी जा सकेगी।
- रात्रि में नाव संचालन हेतु रेसक्यू उपकरण बचाव कार्य के लिए आवश्यक व्यवस्था होने का संचालक द्वारा अंडरटेकिंग दिया जाना जरूरी होगा।
- पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को प्रोत्साहन एवं जीव संरक्षण के लिए यूरो-6 इंजन एवं कम आवाज होने वाली इंजन वाली नावों को ही फिटनेस जारी की जाएगी।
- झीलों में यात्रियों की सुरक्षा एवं सुरक्षित नौका संचालन के लिए जलाशयों में नौका संचालन एवं विभागीय अधिकारी के साथ "मौक ड्रिल" भी कराई जाएगी।
- झीलों में सुरक्षित नौका संचालन एवं यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी ,जिसमें नेवल विशेषज्ञ/ परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ नौका संचालक सदस्य शामिल होंगे।
- इसी तरह परिवहन क्षेत्र उदयपुर के क्षेत्राधिकार में तालाबों ,बांधों ,झीलों व नदियों में नावों की दुर्घटना रोकने, यात्रियों की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रादेशिक परिवहन अधिकारी के क्षेत्राधिकारी में समस्त नाव अनुज्ञप्ति अधिकारियों, परिवहन निरीक्षक, उप निरीक्षकों, जिला परिवहन अधिकारियों को विशेष रूप से दिशा निर्देशित किया गया है। जिसमें अधिनियम की धारा '3' के प्रावधानों की अनुपालन सुनिश्चित किये जाने की बात कही गई है।
- साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रति सप्ताह नावों को जारी उपयुक्तता के प्रमाण पत्र की जांच की जाएगी और नावों का भौतिक सत्यापन करते हुए सही हालत में नहीं पाए जाने पर उपयुक्तता प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी ।
- इसके साथ अवैध नावों के संचालन पर रोक लगाई जाएगी।
- बिना लाइसेंस और फिटनेस के यात्रियों को ले जाने वाली नावों को तत्काल जप्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी ।
- लाइसेंस की वैधता अवधि में नावों की जांच के निरीक्षण में यदि पाया जाता है कि नौका संचालन के योग्य नहीं है तो उक्त नौका का संचालन तुरंत बंद किये जाने की बात कही गई है जब तक कि उक्त नाव संचालन योग्य न हो जाय। तब तक नाव का संचालन नहीं किया जा सकेगा। नाव संचालन योग्य नहीं है तो ऐसी परिस्थिति में नौका को नष्ट कर दिया जाए और ताकि उसका उपयोग किया जाना संभव नहीं हो सके।
- झील इत्यादि में प्रवेश से पूर्व यात्रियों की सूची (पूर्ण पते सहित) की प्रतियां तैयार कर एक प्रति किनारे पर नाव के स्वामी और उसके कर्मचारियों के पास दूसरी सूची नाविक के पास रखने का प्रावधान है। इस प्रावधान की पालना की जांच करते हुए इसकी अनुपालना सुनिश्चित की जाने की अनुशंसा की गई है।
- इसके साथ ही नाव में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को परिवहन किसी भी हालत में नहीं की जाने की बात कार्यालय आदेश में कही गई है और प्रत्येक यात्री के लिए सुरक्षा लाइफ जैकेट पहनना सुनिश्चित किए जाने की बात भी कार्यालय आदेश में कही गई है।
रात्रि में नाव संचालन पर प्रतिबंध : नाव के लिए निर्धारित शर्तों में यह मुख्य प्रावधान है कि नाव का संचालन सूर्यास्त के पश्चात और सूर्योदय से पूर्व की अवधि में नहीं किया जाए । इस प्रावधान की कड़ी पालना सुनिश्चित की जाए क्योंकि रात्रि में नाव संचालन न केवल सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में रेस्क्यू कार्रवाई करना बेहद कठिन हो जाता है, अतः रात्रि के समय नावों को विशेष रुप से संचालन के लिए अधिकृत नहीं किया जाए।
अत्यंत विशिष्ट परिस्थितियों में रात्रि में नावों के संचालन के लिए अधिकृत करने की स्थिति में निम्न बातों का ध्यान रखा जाएगा
अगर किसी होटल या संस्थान के पास नाव के अतिरिक्त पहुंच का मार्ग नहीं हो एवं मूलभूत गतिविधियों के लिए ऐसा करना आवश्यक हो तो रात्रि में रेस्क्यू उपकरणों एवं रात्रि में बचाव कार्य के लिए आवश्यक समस्त व्यवस्था होने के अंडरटेकिंग के आधार पर ही अनुमति दी जाएगी और अनुमति 7 दिन से अधिक की नहीं होगी। जिन संस्थानों व होटलों के पास सड़क मार्ग से आने जाने का रास्ता उपलब्ध हो उनको विशेष परिस्थिति के अलावा रात में संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे प्रकरणों में प्रत्येक नाव का अलग से निर्धारित दिवस के लिए अनुमति प्रदान की जाएगी जो 1 दिन से अधिक नहीं होगा। इससे पूर्व भी रात्रि रेस्क्यू के संसाधन होने की अंडरटेकिंग से ली जाएगी।
इसके साथ यह भी कहा गया है कि विशेष परिस्थितियों का निर्धारण करते समय पर्यावरण अनुकूल पर्यटन का संरक्षण एवं प्रोत्साहन पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही इससे अधिक अवधि के लिए रात्रि संचालन की अनुमति हेतु परिवहन विभाग के आदेश क्रमांक प/7(112)/ परि/ नियम/ 14/ 45510 दिनांक 263 2014 में पारित आदेशों के क्रम में सक्षम अधिकारी से आवश्यक निर्देश अनुमति अनापत्ति प्राप्त करने अनिवार्य होगी । नाव अनुज्ञप्ति अधिकारी रात्रि की नाव संचालन की अनुमति जारी करते समय प्रत्येक प्रकरण का अलग अलग निस्तारण करेंगे तथा रात्रि संचालन की जारी की गई एवं अस्वीकृत की गई प्रकरणों का कारणों सहित रिकॉर्ड रखेंगे। ऐसे सभी विभाग के अधिकारी कर्मचारी नावों के निरीक्षण के लिए अधिकृत हैं ,उनको समय-समय पर नावों का प्रभावी निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए और संभावित दुर्घटना को डालने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।
Byline/Credit by : दिनेश भट्ट (न्यूज़एजेंसीइंडिया.कॉम)
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