उदयपुर: घर में कमरे कम थे तो पेड़ पर मचान बना रह रहे होम क्वारैंटाइन में !
राजस्थान प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के मिले जुले प्रयासों की बदौलत अब लॉक डाउन में सैकड़ों प्रवासी लोग अपने गांव व घर पहुंच रहे है। इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन्स के अनुसार प्रवासियों को कोरोना प्रसार रोकने के लिए शुरुआती 14 दिन अपने घर पर ही होम क्वारैंटाइन रहना होता है। लेकिन कई परिवार ऐसे भी है जिनके यहाँ होम क्वारैंटाइन में रहने के लिए पर्याप्त कमरे तक नहीं है और ऐसे लोग नियमों के पालन में कोताही भी नहीं बरतना चाहते है। इसी कारण उदयपुर जिले के भींडर से मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित डाबकिया गांव में एक परिवार ने होम क्वारैंटाइन के लिए अपने पेड़ पर ही घर बना लिया है, जिसमे मुंबई और सूरत से लौटकर आये इनके परिवारवासी रह रहे है ।
सूत्रों के अनुसार डाबकिया गांव के भमरू रावत के तीन बेटे है जिसमे तीनों लड़के बाहर काम करते हैं और इनमे पप्पू रावत मुंबई से लौटा है ,वहीं उसके दो छोटे भाई ईश्वर रावत व जितेन्द्र रावत सुरत से लौटे हैं। ईश्वर व जितेन्द्र 2 मई को घर पर पहुंच गए थे, पप्पू मुम्बई से 4 मई सुबह पहुंचा था । जिस पर उदयपुर प्रशासन की ओर से पहुंची सर्वे टीम ने तीनों को तुरन्त होम क्वारैटाइन रहने के निर्देश दिए। लेकिन घर मे समस्या ये थीं कि परिवार वालो के रहने के लिए केवल मात्र दो कमरे थे। उसमें से भी एक कमरे में पहले से परिवार के अन्य लोग रह रहे थे। इस कारण एक लड़के पप्पू ने दूसरे कमरे में रहने का निर्णय किया। वहीं ईश्वर ने कमरा न मिलने पर घर के आंगन में लगे हुए नीम के पेड़ पर मचान बनाकर रहने का निर्णय लिया और जितेन्द्र आंगन के एक कोने में खटिया लगाकर होम क्वारैटाइन में रह रहा है।