बीमार नगर निगम उदयपुर का बीमार ट्रैक्टर ही गड्डों को भरते हुए धंसा !
नगर निगम उदयपुर के अधिकारियों और कर्मचरियों की कार्यकुशलता की बानगी देखिये कि जो ट्रैक्टर सड़क के गड्ढे भरने गया वो ही खुद गड्ढे में फंस गया। पास से गुज़र रहा ऑटो इस ट्रेक्टर से बाल बाल बच गया।
बेहतरीन बात यहाँ ये है कि नगर निगम उदयपुर द्वारा जो गड्ढे भरे जा रहे है वो तकनीक और रोड निर्माण नियमों के विपरीत है। बरहाल तो गड्ढे मिट्टी और पत्थर के मिक्स से भरे जा रहे लेकिन उन पर न तो रोलर चलाया जा रहा है और न ही कोई अन्य सामग्री जो कुछ दिन के लिए गड्ढे को फिक्स कर दे। इस वजह से भरे हुए गड्ढे पहली बरसात के बाद ही उधड़ जाते है और उनसे गिट्टी निकल कर या तो वाहन के टायर में गुसती है या उछल कर अन्य वाहन चालक के लग जाती है। ऐसा ही एक हादसा सूरजपोल चौराहे पर हुआ जिसमें गिट्टी उछल कर एक राहगीर को लग गयी।शुक्र रहा कि राहगीर ने कोई हल्ला नही मचाया और चुपचाप अपने गाँव वापिस लौट गया।
समझ नही आता कि नगर निगम उदयपुर रोड निर्माण तकनीक के मामलों में इतना पीछे क्यों है या इतना पीछे क्यों रहना चाहती है ? क्या नगर निगम उदयपुर ने अब तक बनायी गयी सड़को की क्वालिटी चेक करी भी थी या नहीं? अगर क्वालिटी चेक किया गया था तो सड़के इतनी जल्दी क्यों टूट गयी? और अगर क्वालिटी चेक नही किया गया तो जिम्मेदारो के खिलाफ अब तक कोई कार्यवाही क्यों नही की गयी?
वैसे भी निर्माण के दौरान ठेकेदार का नाम और प्रोजेक्ट की जानकारी का बोर्ड लगाना होता है पर नगर निगम उदयपुर के ज्यादातर प्रोजेक्ट के बोर्ड अधिकारियों और ठेकेदारों की मित्रता वश नहीं लगाये जाते है। पूरे उदयपुर में कोई भी ऐसी सड़क नहीं है जो मानकों पर सही उतरती हो।
भाई दूसरे विभागों में आटे में नमक मिलाकर ठेकेदार और अधिकारी काम करते थे लेकिन निगम इनसे एक कदम आगे निकल गया है और निगम और ठेकेदारों के गठजोड़ ने उदयपुर को बर्बाद कर दिया है।