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Current News / दिल्ली इंदौर सहित कई शहरों में ड्रोन से सैनिटाइजैसन, वहीं उदयपुर नगर निगम ने मंगवायी हस्त चलित स्प्रे मशीने !

clean-udaipur दिल्ली इंदौर सहित कई शहरों में ड्रोन से सैनिटाइजैसन, वहीं उदयपुर नगर निगम ने मंगवायी हस्त चलित स्प्रे मशीने !
News Agency India April 01, 2020 09:08 PM IST

दिल्ली इंदौर सहित कई शहरों में ड्रोन से सैनिटाइजैसन, वहीं उदयपुर नगर निगम ने मंगवायी हस्त चलित स्प्रे मशीने !

उदयपुर नगर निगम कोरोना महामारी को लेकर संजीदा होता नजर नही आ रहा है। जहाँ राजस्थान सहित अन्य राज्यों के शहर सैनीटाईजैसन के लिए विभिन्न प्रकार की मशीनों के साथ में ड्रोन तक का इस्तेमाल कर रहे हैं वहीं उदयपुर नगर निगम इस गंभीर विभीषिका में आज भी बाबा आदम के जमाने की मशीनों द्वारा सैनिटाइजेशन कर अपने कर्तव्य की इतिश्री रही है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि उदयपुर नगर निगम जिन मशीनों और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के मार्फत सैनिटाइजेशन कर रही है ,वे मशीनें और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सैनिटाइजेशन के काम में प्रयुक्त नहीं की जाती हैं बल्कि नगर निगम इन मशीनों के मार्फत पूर्व में पब्लिक टॉयलेट साफ किया करता था। सैनिटाइजेशन करने के लिए स्प्रे मशीन की आवश्यकता होती है, जबकि नगर निगम के बाथरूम साफ करने वाले टिपर ऑटो एक साथ भारी मात्रा में सोल्यूशन का छिड़काव करते ,हैं जिससे सैनीटाईजैसन के लिए सोल्यूशन की भी भारी मात्रा में बर्बादी होती है और साथ ही समय भी बहुत ज्यादा लगता है।

दिल्ली इंदौर जैसे शहरों में ड्रोन के मार्फत सैनिटाइजेशन किया जा रहा है और मुख्य सड़कों ,गलियों के साथ में लोगों के घरों को भी सैनिटाइजेशन से भी विसंक्रमित किया जा रहा है, वही उदयपुर नगर निगम की कुशलता की बानगी का आलम ये कि कितनी बार वार्डो का सैनिटाइजेशन अधूरा छोड़ दिया जाता है और अगले दिन उसी वार्ड का सैनिटाइजेशन पुनः दोबारा शुरू किया जाता है।

नगर निगम उदयपुर के अधिकारियों के तकनीकी ज्ञान का आलम यह है की बैटरी ऑपरेटेड स्प्रेयर के जमाने में निगम ने हस्त चलित स्प्रेयर की मशीनें को खरीदने के आर्डर दे दिए हैं ,वहीं जम्मू और बड़ौदा जैसे नगर निकायों ने भारी मात्रा में बैटरी ऑपरेटेड स्प्रेयर खरीदकर सैनिटाइजेशन करना शुरू भी कर दिया है।

उदयपुर महापौर के अनुसार शहरी क्षेत्र में अब तक सैनिटाइजेशन का 80 फ़ीसदी छिड़काव का कार्य पूरा किया जा चुका है ,लेकिन उदयपुर की जनता इसके उलट जवाब देकर कह रही कि उनकी गली वार्ड में अभी तक सैनिटाइजेशन हुआ ही नहीं। सोशल मीडिया पर उदयपुर के सैनिटाइजेशन की कमियों को लेकर कई पोस्ट देखी जा रही है जिसमें जनता ने आरोप लगाया है कि उदयपुर शहर में संजीदगी से सैनिटाइजेशन का काम नहीं किया जा रहा है। साथ ही यह कहा गया कि उदयपुर शहर की तंग गलियों में मोटरसाइकिल के माध्यम से सैनिटाइजेशन किया जाएगा ,लेकिन यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि क्या हस्त चलित स्प्रेयर मशीनों का उपयोग सैनिटाइजेशन के लिए किया जा सकता है या नहीं? क्या कारण था कि उदयपुर नगर निगम ने सैनिटाइजेशन के लिए हस्त चलित मशीनों की खरीद के लिए आर्डर जारी कर दिए? जहां हस्त चलित मशीनों से समय ज्यादा खर्च होने वाला है, वही इसमें पैसे की बर्बादी होती भी साफ दिखाई दे रही है। भला कृषि क्षेत्र में काम आने वाली मशीनों का प्रयोग शहरों के सैनिटाइजेशन में कैसे किया जा सकता है ?

हास्यास्पद बात तो यह है कि उदयपुर महापौर द्वारा किए गए 80% सैनिटाइजेशन के दावों की पोल उदयपुर के पार्षदों ने यह कहकर खोल दी कि उनके वार्ड में अभी तक किसी प्रकार का कोई सैनिटाइजेशन नहीं हुआ है आप स्वयं आकर देख सकते हैं। वही विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने निगम में महापौर ,स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष ,उपमहापौर पारस सिंघवी, स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष बेनी राम सालवी के साथ अधिकारियों से कहा कि सैनिटाइजेशन व साफ-सफाई के कार्य को पूरी मुस्तैदी के साथ संपादित किया जाना चाहिए।

यहां एक और बार यह ध्यान देने योग्य है कि उदयपुर नगर निगम सैनिटाइजेशन तो करवा रहा है लेकिन उसकी वीडियोग्राफी अभी तक नहीं की गई है आप स्वयं समझ सकते हैं कि सैनिटाइजेशन को लेकर उदयपुर नगर निगम कितनी संजीदा है ?

नगर निगम उदयपुर के कार्यकुशलता की बानगी का आलम यह है कि कोरोना महामारी के दौर में भी अभी तक नगर निगम उदयपुर ने कोई बैठक नहीं की है और ना ही हेल्पलाइन के लिए कोई नंबर जारी किया है। यदि उदयपुर नगर निगम सैनिटाइजेशन के प्रति गंभीर नहीं हुई तो उदयपुर वासियों को आने वाले दिनों में कोरोना महामारी को लेकर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

न्यूज़एजेंसीइंडिया के वरिष्ठ दिनेश भट्ट ने अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए गैराज इंचार्ज के साथ गैराज समिति अध्यक्ष महोदय को 10 दिन पूर्व ही इन मशीनों की तैयार करने का आग्रह व्यक्तिगत तौर पर मिलकर कहा था लेकिन इस शहर के लोगों की जान सस्ती है और अधिकारियों को काम ओर भी है।

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