उदयपुर नगर निगम का फायर फाइटिंग सिस्टम और विभाग है खुद बीमार,जनता खुद रहे सावधान !
दुर्गा नर्सरी रोड पर मंगलम फन स्क्वायर के पास दो रेडीमेड कपड़े के शोरूम पर गुरुवार लगी आग ने उदयपुर नगर निगम के फायर फाइटिंग सिस्टम के कामों की पोल खोल कर रख दी। अचरज की बात यह है कि फायर ब्रिगेड जो आग बुझाने आयी उनके पाइप जगह जगह से रिसाव कर रहे थे, आधा पानी सड़कों पर ही निकल रहा था, छोटे पाइप जो कि शोरूम के अंदर आग तक नही पहुंच पा रहे थे और फायरमैन के पास किसी तरह की कोई लाइट अथवा टॉर्च तक नही थी। करीब 1.30 घण्टे तक बगैर किसी लाइट के आग बुझाने के प्रयास किये गए और इन फूटे पाइप से फायरमैन आग बुझाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे।
लोगों का गुस्सा बढ़ता देख करीब 10 बजे लाइट और सही पाइप लाये गए तब तक आग से दोनों शोरूम का सामान जल कर खाक हो गया था। इस तरह की उदयपुर फायर ब्रिगेड नाकाम कोशिश के कारण सारे कपडे सहित शोरूम जल गए और अगर उपयुक्त दमकल उपकरण उदयपुर नगर निगम के पास होते तो शायद 30 मिनिट के अंदर आग बुझा ली जाती और नुकसान काफी कम होता ।
शहर भर की बहुमंजिला इमारतों में प्रशासन सख्ती करके फायर फाईटिंग सिस्टम लगवा रहा है और खुद के संसाधनों का हाल ऐसा था जिसका पटाक्षेप कल के दुर्गा नर्सरी अग्निकांड में हो गया। एक बात ओर ध्यान देने योग्य है कि जिस काम्प्लेक्स में ये शोरूम था ,क्या उसमे फायर फाइटिंग सिस्टम था या नहीं ?
अगर था तो चलाया क्यों नहीं गया और नहीं था तो अब तक क्या उदयपुर नगर निगम क्या कर रहा था ?
रोचक बात ये है कि नगर निगम के फायर सिस्टम के पास कहने को 6 मंज़िला फायर फाइटिंग सिस्टम है, फिर भी निगम ने उदयपुर में 13 मन्जिल से ज्यादा की स्वीकृति दे रखी है । फायर फाइटिंग का एक सबब कल आप दुर्गा नर्सरी पर देख चुके है। किसी दिन सूरत अग्निकांड जैसा हादसा अगर होता है तो कई जिंदगियां खतरे में होंगी। पता नही कैसे ऐसे निर्माण की स्वीकृति दे देते है जहाँ नगर निगम उदयपुर फायर फाइटिंग का काम ही नहीं कर सकता ?आम आदमी को दो मंजिला की स्वीकृति के लिए चप्पल गिसने पड़ते है।
नगर निगम उदयपुर जिस तरह बर्बादी पर तुला हुआ है उससे एक दिन सबको भुगतना पड़ेगा। नगर निगम उदयपुर के कुँए में भांग पड़ी है ! जिम्मेदार मस्त है क्योंकि अब इन्हे कोर्ट के चक्कर लगाने से भी डर नहीं लगता। उदयपुर नगर निगम के इंजीनियर आये दिन कोर्ट परिसर में पेशी पर आकर इतने अभ्यस्त हो गए है इन्हे अब किसी से डर नहीं लगता।
लेकिन जनता डरी हुई है नगर निगम उदयपुर के कारनामों से !
इसे कहते है चिराग तले अंधेरा.......
सरकार का जोर सिर्फ जनता पर चलता है.