नगर निगम उदयपुर नहीं भरवा रही तय मानकों पर सड़को के खड्डे,जनहानि होने का डर !
बधाईयाँ उदयपुर वालों को ! उदयपुर की खो गयी सड़कों की आबरू को ढकने के लिये सड़को पर नगर निगम उदयपुर और नगर विकास प्रन्यास प्रशासन ने कारियाँ (मिट्टी और गिट्टी के जानलेवा पेच ) लगानी चालू कर दी हैं और वह भी बारिश में। उदयपुर शहर की लगभग सभी जगहों की सडकों के हालात ब़द से ब़दतर हैं..ध्यान देने वाली बात ये है कि निगम के अधिकारियों को राष्ट्रीय रोड कांग्रेस के नियमों का ही पता नहीं है और निगम के निहायत ही होनहार अफसर मिटटी और गिट्टी से खड्डों को पाट रहे है। यही पेच पहली रिमझिम में बिखर जा रहा है और छोटी गिट्टी वाहनों के टायर के नीचे आकर वाहन चालकों को लग रही है। हाल ही में सेक्टर 14 के 100 फ़ीट रोड पर एक मजदूर ऐसी ही दुर्घटना का शिकार हो गया और उसकी आँख में जोरदार चोट आयी है।
पहली काम की बात ये है कि तकनीक और मानकों की द्रष्टि से इस तरह रोड के खड्डे कभी नहीं भरे जाते वो भी खासकर शहरी इलाकों में जहाँ दुपहिया वाहनों का दबाब ज्यादा रहता है।
दूसरा ये कि पेच वर्क की कारी को रोलर से दबाया भी नहीं जा रहा। सिर्फ मिटटी और गिट्टी डाल कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहा है उदयपुर प्रशासन।
आप सब समझदार हैं की अगर फटे चिथडे़ पर कारियाँ लगा सिलाई की जाती हैं तो वह गुणवत्ता के पैमाने पर कैसे सही नहीं ठहर पाएगी।
रिमझिम वर्षा के बीच उदयपुर की सड़कों पर कारियाँ लगाई जा रही है और साथ साथ ठेकेदार के आदमी कारियों की संख्या गिनकर उसका पैसा बनाने के लिए नाप झोक करने में पूरी तरह व्यस्त है। अधिकारी और ठेकेदारों का आपसी प्रेम प्रगाढ़ होता जा रहा है।
आखिर पैसा तो जनता की कमाई का ही बर्बाद हो रहा हैं। कारियो (पेच वर्क ) के काम में भी भ्रस्टाचार की बू आती हैं।
नगर निगम प्रशासन से प्रश्न है कि पूर्व में जो सड़के बनी ,क्या उनका कभी क्वालिटी इंस्पेक्शन भी किया गया अथवा नहीं ? कितना कितना पैसा किस सड़क पर एक साल में खर्च हुआ है ?जिन ठेकेदारों एवं कर्मचारियों ने यह सड़के बनाई उन पर नगर निगम ने अब तक क्या कार्यवाही करी है ? क्यों पैसों की बर्बादी हो रही है ?
नए-नए उद्घाटन एवं घटिया सामग्री से शहर का विकास संभव नहीं है फिजूलखर्ची रुकेगी तभी होगा उदयपुर होगा स्मार्ट सिटी उदयपुर !