उदयपुर की झीलें खतरे में,स्वरुप सागर की पाल पर रिसाव ,प्रशाशन जानबूझ कर अनजान !
30 अगस्त 2019 की बारिश ने झीलों के प्रति प्रशाशन के ढुल मूल रवैय्ये की पोल खोल दी है। गोवर्धन सागर के सतोरिया नाले की रपट ने देर रात हाहाकार मचा दिया और वसंत विहार,बालाजी कॉलोनी सहित झील के निचले क्षेत्र की कॉलोनियों में पानी भर गया। रात नगर निगम और स्थानीय प्रशाशन ने टेक्नॉय मोटर्स के पास बंद पड़े नाले को दो JCB के माध्यम से तुड़वा कर पानी निकलवाया।
झील के बहाव क्षेत्र में मकानों के निर्माण का नियमन एक दिन नगर निगम और स्थानीय प्रशाशन को नाकों चने चबवा देगा। साथ ही सतोरिया नाले के निर्माण ,प्लानिंग और गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह खड़े हो गए है।सतोरिया नाला इतना छोटा बना दिया गया है कि ये बहाव के पानी को संभाल नहीं पाता है और प्रशासनिक गलती का खमियाजा उदयपुर की जनता भुगत रही है। न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम पिछले 8 दिनों से गोवर्धन सागर झील,पाल और सतोरिया नाले के प्रति जनता और सरकार को लगातार आगाह कर रही थी लेकिन नगर निगम उदयपुर ने समय रहते न तो सतोरिया नाले को साफ़ करवाया और न ही उसका रखरखाव किया। नतीजतन सतोरिया नाले ने 30 अगस्त 2019 की शाम और रात को लोगों को सांसत में डाल दिया।फिलहाल गोवर्धन सागर का जलस्तर 9.75 फ़ीट बना हुआ है और पाल के लीकेज अब भी जारी है।
वही सबसे प्रसाशनिक लापरवाही के गंभीर परिणाम बीच शहर में रहने वाली जनता को कभी भी भुगतने पड़ सकते है। स्वरुपसागर की पाल में दसियों जगह से जबरदस्त लीकेज बढ़ते जा रहे है। पाल में कई जगह पेड़ उगे हुए है जिन्हे काट दिया गया लेकिन अब उनकी जड़ो से पानी फूट कर निकल रहा है और साथ ही पिछले एक दिन में कई नए लीकेज सामने आये है जो बीते कल के दौरे में नहीं थे। मतलब साफ़ है स्वरुपसागर की पाल गंभीर खतरे में है और हाथीपोल चौराहे तक रिसाव का पानी आ रहा है और स्थानीय प्रशाशन जान बूझ कर अनजान बना हुआ है। अगर आपको लीकेज पर्यटन का मजा लेना हो तो पहुँच जाइये हाथीपोल झरिया मार्ग पाल के किनारे और देख लीजिये उदासी स्थानीय प्रशाशन की।
वही एक और रोचक और खतरनाक बात पीछोला की पाल के नीचे समोर बाग में महाराणा जी के बाग में स्थित संगमरमर की पुतली बता रही है।यह पिछोला झील के भरने पर पानी के दाब से बिना विद्युत के, बिना मोटर की उर्जा के चलने वाला एक झरना रुपी फव्वारा है और साथ ही साथ यह पिछोला झील की भराव क्षमता को भी दर्शाती है। इसके साथ ही पुतली के हाथ में कलश है और जब पीछोला 8 फ़ीट से ऊपर भर जाता है तब पुतली की मटकी से पानी की धार गिरनी शुरू हो जाती है और नीचे बनें गोल थाली नुमा टेंक में जल भरने के बाद जल रिसाव के द्वारा दो भागों में विभक्त होकर बाग में दो धारा में विभक्त होकर बाग को तृप्त करने चली जाती है।इस पुतली का पानी आज मटके से निकल कर इसके आस पास से भारी प्रेशर के साथ निकल रहा है। इसका मतलब साफ़ है कि पीछोला बांध पर पानी का जबरदस्त प्रेशर है और प्रशाशन को ध्यान देने की जरुरत है।