उदयपुर की झीलों में पसरी गन्दगी ,प्रशाषन लापरवाह और बीमारी बाँटता पानी !
उदयपुर की झीलें न केवल हर उदयपुरवासी के जेहन में बसती है बल्कि यहाँ का निवासी इन झीलों के लिए इतना दीवाना है कि हर बारिश के बाद या तो खुद झील का जलस्तर जानने पहुँच जाता है या फ़ोन और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से पता करता है। हर उदयपुरवासी की निगाहे झीलों के जल स्तर पर ही टिकी रहना चाहती है। झीलों का ये प्रेम उदयपुरवासियों के दिल की धड़कन है। झील के किनारे न सिर्फ सैलानी दिखते है बल्कि उससे ज्यादा तो स्थानीय निवासी आपको यहाँ झीलों को निहारते मिल जाएँगे। अगर यूँ कहूँ तो फतहसागर संस्कृति का हिस्सा है और लोगो में आप "ऍफ़. एस. जनरेशन" नाम भी यदा कदा सुनते रहते होंगे।
कुल मिलाकर उदयपुर की झीलें प्राण है यहाँ के लोगों के लिए। लेकिन इन प्राणों पर पसरी गन्दगी देख दिल दुखी हो जाता है और मन आक्रोशित भी। न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम ने जब समूचे झील तंत्र का नाव और वाहन के द्वारा दौरा किया तो कई ऐसे तथ्य उभर कर आये है जिन्हें जान कर न सिर्फ आप दुखी होंगे बल्कि सिस्टम के प्रति आपका आक्रोश भी उभर कर आएगा।सिस्टम में कौन कौन है ये भी जान लीजिये (नगर निगम उदयपुर,नगर विकास प्रन्यास,नेशनल लेक कंज़र्वेशन प्रोजेक्ट ,पुलिस विभाग, प्रादेशिक परिवहन विभाग RTO ,प्रदुषण निंयत्रण विभाग और झील संरक्षण समिति) फिलहाल सबसे पहले इन न्यूज़ में झील की गन्दगी और इससे जुड़े मुद्दे पर बात करते है।
प्रशाशन या यूँ कहूँ कि सिस्टम के दावे से कोई नाली झील में सीधे नहीं गिरती है तो पेशे खिदमत है झील में गिरती नालियों का फोटो। उदयपुर में कई जगह झीलों के किनारे नालियों और सड़को का गन्दा पानी सीधे झीलों के पानी में गिरता है। रंगसागर के पानी को देख आप अंदाजा लगा लेंगे कि झील में कितनी गन्दगी गिर रही और उस पानी को पीकर कितने लोग पेट की बीमारियों से ग्रसित हो रहे। झीलों के पानी में कई ऐसे बैक्टेरिया है जो कई पेट की बीमारियों को दावत देते है और इनका कारण है झीलों में नालियों और सीवर के पानी के साथ झीलों के अंदर और किनारे बसी होटलों की गन्दगी। कोई भी सिस्टम वाला न तो कभी इन होटलों के यहाँ चेक करने जाता है कि तय मानकों के अनुसार अपशिष्ट निस्तांतरण हो रहा है या नहीं। आज तक झील के किनारे बसने वाले व्यसायिक उपक्रमों को झील में गन्दगी फेकने से बचने के लिए नेट या जाली लगाने को नहीं कहां गया है जबकि आप आयड़ नदी के हर पुल पर जाली लगा कर गन्दगी से बचा रहे है। इसका मतलब क्या है कि स्थानीय नागरिक गन्दगी करते है और होटल्स वाले नहीं ?
दूसरी गलती नगर निगम उदयपुर की यह है कि उनके झील से गन्दगी निकालने वाले कर्मचारी और ठेकेदार के लोग झील के किनारों और घाटों के साथ सड़कों पर गन्दगी और खरपतवार डाल जाते है और उसे उठाने के लिए कर्मचारी अगले दिन आते है और कई बार तो उठाने भी नहीं आते है।इससे पहले सोशल मीडिया पर कई जागरूक लोगों ने मदार नहर की सफाई के लिए कहाँ भी पर बहरा सिस्टम सुन नहीं पाया। देखा जाय तो झील से कचरा सही मैनेजमेंट से निकाला जाय तो पन्द्रह दिन में झील के ऊपरी हिस्से की गन्दगी और जलीय खरपतवार को हटाया जा सकता है। लेकिन बीड़ा उठाना कोई नहीं चाहता। एक झील साफ़ करने की डिवीडिंग मशीन भी सिस्टम ने लगा रखी है लेकिन उसका कितना आउटपुट रहा कोई नहीं बता सकता।
आइये आप और हम सब मिल कर लोगो को झील को स्वच्छ बनाने के लिए जागरूक करे।