रोमांटिक शहर और 'पूर्व का वेनिस' उदयपुर की पर्यटन में रैंक गिरी,कारण जानिये !
राजस्थान के रोमांटिक शहर और 'पूर्व का वेनिस' को शीर्ष शहरों में एक जगह मिली है जो दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती है। # उदयपुर को दुनिया में 10 वां और एशिया में 6 वां स्थान @TravelLeisure द्वारा दिया गया है।
ट्रैवल लीजर मैगज़ीन और वेबसाइट द्वारा उदयपुर के विरासत शहर को दुनिया के 15 सर्वश्रेष्ठ शहरों की सूची में दसवाँ स्थान और एशिया में छटा स्थान दिया गया है। 2017 में भी उदयपुर ने ट्रैवल लीजर से यह गौरव प्राप्त किया था, एक नए सर्वेक्षण में दुनिया के शीर्ष 15 शहरों में से एक के बीच अन्य अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आकर्षण के केंद्रों के स्कोर से आगे था।
विश्व के सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार सर्वेक्षण के हिस्से के रूप में, ट्रैवल एंड लीजर पत्रिका के पाठकों को अपने पसंदीदा शहरी स्थलों को स्थलों और स्थलों, संस्कृति, भोजन, मित्रता, खरीदारी और समग्र मूल्य के आधार पर रैंक करने के लिए कहा गया था।
झीलों के शहर को पूर्व के वेनिस दोनों के रूप में जाना जाता है। उदयपुर दक्षिण राजस्थान में पिछोला झील के तट पर एक आश्चर्यजनक स्थान पर स्थित शहर है। अपने लुभावने दृश्यों, राजसी महलों, विश्व स्तरीय संग्रहालयों और लक्जरी होटलों के लिए जाना जाता है। उदयपुर इतिहास में डूबा हुआ है। मेवाड़ के महाराणाओं की लगातार पीढ़ियों के लिए घर रहा है।
ये तो तब है जब विरासत की प्रचुरता होते हुए हम उदयपुर वालों सहित नगर निगम उदयपुर और स्मार्टसिटी उदयपुर विरासत संरक्षण के लिए कुछ खास नहीं कर रहे है। मजे कि बात ये कि विरासत और इतिहास जनता को पता नहीं और नाहीं नगर निगम उदयपुर और स्मार्टसिटी ने जागरूकता के लिए कुछ किया। उदयपुर शहर में 300 से ज्यादा विरासत (हेरिटेज) की प्राचीरें,मंदिर और इमारतें है जिनके बारे में प्रशाशन चिन्तित ही नहीं है। पुराना शहर अपने आप एक इतिहास है जिसे मॉडिफाइड कर होटल वालो ने तो संजो लिया है पर आम जनता और पर्यटक मेवाड़ के इतिहास और वास्तविक खूबसूरती से महरूम रह जाते है।
आपको बताते चले कि मेवाड़ के पूर्ववर्ती राजा उदयपुर को काशी (बनारस) जैसा बनाना चाहते थे,लेकिन काशी में ऐसी प्राकृतिक खूबसूरती कहाँ ? इसी कारण आपको उदयपुर के पुराने इलाकों में ढेरों देव स्थानक और मंदिर मिलेंगे और मन्दिर भी ऐसे जिनका इतिहास 400 सालो से ज्यादा पुराना है।
लेकिन आम पर्यटकों को ऐसे गौरवशाली मंदिर और इमारतें कोई नहीं दिखाता क्योंकि मंदिर कमीशन नहीं देते। घण्टाघर सहित चांदपोल और अन्य जगह पर स्मार्ट सिटी उदयपुर के द्वारा पुनर्निर्माण में हेरिटेज की मूल इबारत ही ठेकेदारों ने खत्म कर दी।
उदयपुर की ऐतिहासिक प्राचीरे (इमारते) इतिहास और वास्तु के साथ उत्कृष्ट इंजीनियरिंग को अपने आप में समेटे है उतनी दुनिया के किसी शहर में नहीं। लेकिन आज ये जर्जर हो रही है और स्मार्टसिटी के हेरिटेज ठेकेदार अगर एक दो साइट को दुरुस्त कर रहे है तो बर्बाद कर रहे है और बर्बादी का आलम आप अभी घंटाघर के चार साल में दो बार होने वाले प्लास्टर और मैंटीनैंस की क्वालिटी से देख सकते है। काम हो भी जाएगा तो भी सिस्टम घंटाघर के बारे मे जानकारी का बोर्ड तक नही लगाएगा।
हेरिटेज वॉक बंद पड़ी है और पहले जिन लोगों ने चलायी उन लोगों ने पर्यटकों को सब्ज़ी मंडी जैसे इलाक़े दिखलाए। हद्द है भाई !शहर में इतनी विरासतें थी कि दिखाते दिखाते दिन कम पड जाए। इतिहास ऐसा कि लोग सुन कर अवाक् रह जाये। लेकिन गलत,भ्रामक जानकारी हेरिटेज वाक में देकर पर्यटकों को न केवल भ्रमित किया जाता है बल्कि कुछ लोग और गाइड का नेक्सस ऐसा है जो पर्यटकों को कुछ खास दुकांनो से ख़रीदारी भी करवाता है।
यही कारण रहा कि पिछले साल की रैंकिंग से तीन पायदान रैंक फिसल गयी और अगर प्रयास नहीं किये गए तो 10 से बाहर होते देर नहीं लगेगी।
1902 ईस्वी मे जब हिंदुस्तान के वायसराय लॉर्ड कर्जन उदयपुर आये तो उन्होंने उदयपुर की प्रशंशा में यह शब्द कहे "Most beautiful among the beauties,the grandest even amid all the grandeur of Rajputana 'Udaipur' as I have seen it today and we see it to night,will leave an impression on our minds,which nothing which nothing can efface.With It Snow white palaces and pavilions,with it flower gardens and shady groves ,with its wooded islands and its equisite lakes,it seems to the visitor ,a fitting frame-work for a dynasty of immemorial age,for incidents of romance and daring for a chief,who is himself an embodiment of the pride ,the dignity ad the patriotism of his race"
जयपुर जैसे शहर को जिसकी हेरिटेज इमारतें उदयपुर से काफी कम है,यूनेस्को द्वारा प्रमाणित और लिस्टेड किया गया क्योंकि जयपुर के अधिकारियों ने प्रयास किये। दुःख की बात तो ये की उदयपुर के नगर निगम ,स्मार्ट सिटी ,पर्यटन विभाग सहित किसी भी स्थानिय विभाग ने इस बारे में सोचा तक नही।
उदयपुर की आर्थिक धुरी का आधार पर्यटन है। पर्यटक गुमराह हो रहे है। गाइड कमीशन खा रहे है।सच्ची ऐतिहासिक जानकारी खत्म हो रही। विरासत खत्म हो रही। इतिहास खत्म हो रहा। शहर की इकोनॉमी खत्म हो रही।
दुःख है,दर्द भी ... . पर आवाज़ उठाते रहना न्यूज़ एजेंसी इंडिया का काम है और जारी रहेगा।