उदयपुर शहर बन रहा स्मार्ट सिटी, लेकिन शहरवासियों के घर के कुर्सी लेवल हो रहे खराब !
भारत सरकार द्वारा देश की प्रस्तावित स्मार्ट शहरों की लिस्ट में चयनित होने के बाद विगत कई महीनों से शहर को स्मार्ट बनाने के लिये बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य एक निजी कंपनी द्वारा करवाये जा रहे है, जिसके अंतर्गत शहर कोट के अंदर सभी विधुत लाइनो को भूमिगत कर सड़को को पोल लेस किया जा रहा है, नई सीवरेज लाइन, भूमिगत ड्रेनेज लाइन डाली जा रही है और सड़कों / गलियों में सीमेंट कंक्रीट की सड़कें बनाई जा रही है। इन कार्यो के अतिरिक्त शहर के अन्य भागों में सिटी बस सेवा देने हेतु स्मार्ट बस स्टॉप भी बनाये जा रहे है।
यह अलग प्रश्न है कि सीवरेज व ड्रेनेज हेतु डाली जाने वाली रिंग नुमा पाइप लाइन की क्षमता शहर के अनुसार पर्याप्त रहेगी अथवा नहीं ? लेकिन स्मार्ट सिटी के कार्य को मूर्त रूप देने वाले विशेषज्ञ इंजीनियरो ने कई महत्वपूर्ण बातों को जो आम जन के जीवन से जुड़ी हुई है, या तो ध्यान नही दिया अथवा नज़र अंदाज़ कर दिया है। कोई भी विशेषज्ञता सामान्य आंखों से दिखाई देने वाली चीजों से परे नही हो सकती और न ही सामान्य ज्ञान से पूरी तरह मुकाबला कर सकती है।
शहर की बसावट में नए पुराने सभी तरह के मकान है। पूर्व में जब भी कभी सड़क निर्माण कार्य हुआ तब सड़को के तल की ऊंचाई बढ़ी है, एक आम नागरिक नगर निगम या UIT द्वारा स्वीकृति प्राप्त करने के बाद अपना मकान बनाते समय तत्समय के रोड लेवल को ध्यान में रखकर ही अपने मकान की कुर्सी या प्लिंथ लेवल का निर्धारण कर मकान निर्माण कार्य करता है और सामान्य बोलचाल में इसे कुर्सी लेवल के नाम से जाना जाता है । नगर निगम या UIT द्वारा कभी भी किसी व्यक्ति को यह नही बताया जाता कि वह अपने प्रस्तावित मकान की प्लिंथ लेवल को न्यूनतम या अधिकतम कितना तय करे कि जिसके लेवल से कभी भी सड़क का लेवल भविष्य में ऊपर नही जा पाए और न ही शहर के किसी भी भाग में ऐसे कोई लेवल निर्धारित कर सूचना बोर्ड, मोटम या किसी अन्य तरह से अंकित किये गए है जिनके आधार पर शहर वासी तय कर सके कि मकान का प्लिंथ लेवल आवश्यकता अनुसार कितना रखा जा सकें। इस कारण कुछ ही वर्षो में मकान का कुर्सी तल सड़क निर्माण या रिपेयरिंग के बाद रोड लेवल से नीचे हो जाता है।
इसके साथ ही शहर ऐसी सड़कों से अटा-पड़ा है जहाँ सड़क की सामान्य औसत कुर्सी लेवल पर ध्यान दिए बिना स्थानीय निकायों ने सड़क की परत के ऊपर सड़के बिछा दी और अब सड़क दुकानों और मकानों के लेवल के बराबर आ गयी है। यही कारण है कि शहर के निचले इलाको में आधे घण्टे की बारिश में ऐसे हालात पैदा हो जाते है कि दुकानों और मकानों में पानी भर जाता है और बापू बाजार ,नेहरू बाजार और दिल्ली गेट सहित कई इलाकों के मकानों के बाशिंदो ने नुकसान का दर्द झेला भी है।
एक व्यक्ति का सपना होता है- स्वयं का मकान, जिसमे उसके जीवन भर की पूँजी लग जाती है, लेकिन जब उसी मकान का कुर्सी तल सड़क तल से नीचे हो जाता है तो बड़ी दुःखद स्थिति हो जाती है, सड़क की धूल के साथ ही बारिश का पानी और सड़कों की नाली का पानी भी मकान में प्रवेश कर जाता है।वर्तमान में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत शहर में विधुत, जल और सीवरेज लाइन भूमिगत डालने के बाद सीमेंट कंक्रीट की नई सड़कें बनाई जा रही है, इन सड़कों के निर्माण से पूर्व किये गए सर्वे कार्यो, डिज़ाइन कार्यो में शहर वासियों के मकानों की प्लिंथ (कुर्सी ) लेवल को बिल्कुल ध्यान में नही रखा गया जिसके फलस्वरूप शहर के हज़ारों मकानों के प्लिंथ लेवल या तो सड़क के बराबर हो गया है या फिर नीचे चला गया है। आने वाले मानसून के दिनों में साधारण सी बारिश में भी घरों में पानी भरने की पूर्ण संभावना है।
सड़क लेवल या सड़क ऊंचाई के संबंध में पटना हाई कोर्ट के निर्णयों CWJC4839 / 2010 और CWJC 17571 / 2014 में भी कहा गया कि निर्माण कर्ता कंपनी को कुर्सी लेवल ध्यान में रखा जाना चाहिए था, जिसमें शहर की विकसित कॉलोनियों में सड़क का निर्माण या रिपेयरिंग पुरानी सड़को को स्क्रब या खोदकर पुनः बनाए जाने के दिशा निर्देश दिए गए है।
मकानों की प्लिंथ के महत्वपूर्ण बिंदु को ध्यान में रखें बिना किये जा रहे अरबो के खर्च के बाद शहर तो स्मार्ट हो जाएगा लेकिन शहर के घर अन स्मार्ट हो जाएंगे।
स्टोरी : जयवंत भैरविया

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