उदयपुर का एक सरकारी उपक्रम फाइलों में हो गया गुम, नतीजा भुगत रही जनता !
उदयपुर में स्थानीय यातायात को सुगम बनाने की दृष्टि से 2006-2007 में यू सी टी एस एल यानि उदयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड नामक कंपनी की स्थापना की गई थी, जिसमें उदयपुर नगर निगम के महापौर चेयरमैन और नगर निगम आयुक्त सीईओ बनाए गए थे। इसके साथ ही यू सी टी एस एल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में जिला कलेक्टर, आरटीओ ,सीनियर टाउन प्लानर, जिला पुलिस अधीक्षक और यूआईटी सचिव को लिया गया था।
शुरुआती दौर में यूसी टीएसएल ने कुछ लो फ्लोर बस का संचालन उदयपुर शहर में किया था जो कि फैल रहा। इसके बाद यूसीटीएसएल नाम का सरकारी उपक्रम सरकारी फाइलों में दबा रह गया और इसकी बस स्टैंड की जमीन को यूआईटी ने यह कहकर कुछ हिस्सा अपने कब्जे में ले लिया कि इससे व्यवसायिक ऑक्शन कर यूआईटी ज्यादा लाभ कमा सकती है। ऐसे में महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि शहर की लोकल यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए जहां पहले यूआईटी ने बस स्टैंड के लिए जगह आरक्षित कर रखी थी तो बाद में बिना किसी डीएलबी के आदेश के उदयपुर की जनता की आवश्यकता को दरकिनार कर बस स्टैंड की जमीन अन्य विषय के लिए किस आधार पर अलॉट की जा रही थी ?
इसी बीच उदयपुर स्मार्ट सिटी में शहर में बस चलाने के लिए दो बार जतन भी किए लेकिन स्मार्ट सिटी के अफसर उदयपुर शहर के लिए बस चलाने में असफल ही रहे। फिर यह तय हुआ कि पूर्व में बनाई गई कंपनी यू सी टी एस एल के माध्यम से उदयपुर में सिटी बस का संचालन किया जाएगा और जेसीटीएसएल की तर्ज पर टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया एवं टेंडर आमंत्रित किए गए और मजे की बात यह है कि राजस्थान के 2 बड़े शहरों में चलाने वाली कंपनी ही इस टेंडर को लेने में कामयाब रही जबकि उन शहरों में यातायात दबाव और आवश्यकता अलग तरह की है।
उदयपुर एक पर्यटक नगरी है और विश्व के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक हैं ऐसे में उदयपुर शहर में इलेक्ट्रिक बस की बजाय डीजल बसों के संचालन को प्राथमिकता दी गई और कारण यह बताया गया कि इलेक्ट्रिक बस की कीमत और रखरखाव डीजल बस की तुलना में ज्यादा आता है जबकि वही देहरादून स्मार्ट सिटी जिसकी भौगोलिक स्वरूप बिल्कुल उदयपुर जैसा ही है उसने अपने पायलट प्रोजेक्ट में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन 11 दिसंबर 2020 को शुरू कर दिया है और देश की अन्य स्मार्ट सिटी जैसे पुणे बड़ौदा आगरा इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में कहीं आगे निकल गई हैं।
आपको बताते चलें कि यू सी टी एस एल की फंडिंग के लिए नगर विकास प्रन्यास उदयपुर और नगर निगम उदयपुर को ढाई ढाई करोड रुपए आवंटित करने थे। इसके साथ ही उदयपुर स्मार्ट सिटी से पांच करोड़ रूपये आवंटित किए जाने थे लेकिन आज तक उदयपुर के किसी अधिकारी ने इस बाबत कोई पहल नहीं दिखाई है और मामला अभी तक ठंडे बस्ते में ही जाता नजर आ रहा है।
इसके साथ ही उदयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड नाम के उपक्रम को सितंबर 2016 में स्थानीय प्रशासन ने कॉरपोरेट हैंडोवर के रूप में उदयपुर नगर निगम को सौंप दिया था लेकिन मजे की बात यह रही इस कॉर्पोरेट हैंडोवर के दौरान यू सी टी एस एल के अस्तित्व के बारे में कोई जानकारी इससे जुड़े अधिकारियों के पास में आज तक उपलब्ध नहीं है। यहां तक की यू सी टी एस एल को संभालने के लिए वर्तमान समय में केवल एक अधिकारी काम कर रहा है जो कि उदयपुर नगर निगम में अन्य कार्यों में व्यस्त रहता है।
वही के उदयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के बस डिपॉट के लिए यूआईटी ने सवीना वाली जगह के स्थान पर धोल की पाटी के लिए जगह सुझायी है जो कि सिटी बसों के संचालन के लिए बहुत दूर है और लगभग 5 से 8 लीटर डीजल इन बसों को बस डिपॉट से आने जाने में ही लग जाएगा। यदि भविष्य में स्मार्ट सिटी उदयपुर स्मार्ट काम करते हुए अगर इलेक्ट्रिक बस का संचालन उदयपुर शहर में करती है तो ऐसी स्थिति में इतना दूर बस डिपो होना कहीं ना कहीं नुकसान का सौदा साबित हो सकता है।
इसी बीच उदयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड में जनवरी 2020 में उदयपुर में सिटी बसों के संचालन के लिए टेंडर निकाले लेकिन अपरिहार्य कारणों से यह टेंडर मार्च अप्रैल तक चला गया। पूर्व नगर निगम निगम आयुक्त कमर चौधरी ने प्रतिबद्धता दिखाते हुए सिटी बसों के संचालन के लिए दिवाली तक की समय सीमा निर्धारित की थी लेकिन समय को कुछ और ही मंजूर था और अधिकारी का ट्रांसफर हो गया।
फिलहाल सुनने में आ रहा है कि उदयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट लिमिटेड जल्द ही 26 डीजल आधारित खेती बस का संचालन उदयपुर में करने वाला है लेकिन यहां यह यक्ष प्रश्न है कि पर्यटक नगरी होने के बावजूद एवं स्मार्ट सिटी मिशन में सबसे पहले शुमार होने वाले शहरों के बीच में नाम होने के बावजूद भी उदयपुर में डीजल बसों का संचालन करने का काम किया गया जबकि यहां इलेक्ट्रिक बसेज चलाई जा सकती थी।
आपको बताते चले कि उदयपुर प्रशासन ने करीब 13 साल पहले यूएन स्पीडवेज कम्पनी के साथ चलने वाली लाे फ्लाेर सिटी बसाें के लिए सवीना में मेन रोड पर उपलब्ध सरकारी जमीन पर डिपाे बनाया था।
आमजन की पहुँच हेतू सिटी बस डिपो शहर के बीच होना चाहिए जिससे कि समयबद्ध तरीके से आमजन की पहुँच में सिटी बसों का संचालन हो सके जिससे व्यर्थ में ईंधन की खपत रुकेगी और बसों के भी संचालन में समय खर्च कम होगा। यदि कोई बस रूट पर खराब हो भी जाती है तो उसे तुरंत मदद भी मिल सकती है अथवा डिपो से तुरन्त दूसरी बस भेजी जा सकती है।
क्या UIT का राजस्व शहर के लोगों की जरुरत से ज्यादा महत्वपूर्ण है जो शहर की जनता के लिए शहर के डिपो के लिए सुझायी जमीन को प्राइवेट लोगों को बेच रही है ?

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