जयपुर, 08 जनवरी। राजस्थान में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने एवं परिवहन व्यवस्था को पूर्णतः पारदर्शी बनाने की दिशा में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग द्वारा तकनीकी नवाचारों से राज्य में सख्त प्रवर्तन और पारदर्शी व्यवस्था की शुरुआत की गई है।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के अंतिम दिन राजस्थान के उप मुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री डाॅ. प्रेमचंद बैरवा ने परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग द्वारा राज्य में सड़क सुरक्षा, ई-गवर्नेंस एवं नागरिक सुविधाओं से जुड़े प्रमुख नवाचारों एवं उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण दिया ।
उन्होंने बताया कि परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने प्रदेश के 150 से अधिक टोल नाकों पर ई-डिटेक्शन सिस्टम लागू करते हुए बिना परमिट, बिना फिटनेस, बिना टैक्स एवं बिना पीयूसी वाहनों पर लाखों चालान जारी किए हैं, जिनसे लगभग 500 करोड़ रुपये की जुर्माना राशि वसूलनीय है। इसे और प्रभावी बनाने हेतु ऑटो मोड चालान प्रणाली विकसित की जा रही है तथा जुर्माना वसूली को फास्टैग से जोड़ने पर विचार किया जा सकता है।
डाॅ. बैरवा ने बताया कि खनिज विभाग से ओवरलोड वाहनों हेतु जारी होने वाले ई-रवन्ना को ई-चालान प्रणाली से एकीकृत कर दिया गया है, जिसके लिए 15 दिवस का नोटिस जारी किया गया है। नागरिकों के लिए सभी ऑनलाइन सेवाएँ अब केवल सिटीजन पोर्टल के माध्यम से ही उपलब्ध होंगी, कार्यालयों में प्रत्यक्ष एंट्री बंद कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि वाहन सॉफ्टवेयर में डुप्लीकेशन लगभग समाप्त कर दिया गया है तथा 25 ड्राइविंग ट्रैक को सीएसआर के अंतर्गत ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक में बदला जा रहा है, जिनमें से अब तक 8 ट्रैक पूर्णतः ऑटोमेटेड किए जा चुके हैं। विभागीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु पोस्ट मशीन व कार्यालयों में नकद लेन-देन बंद कर दिया गया है, चालान भुगतान केवल कार्ड एवं यूपीआई से ही स्वीकार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही फर्जी पते पर पंजीयन एवं लाइसेंस पर रोक लगाने के लिए रजिस्टर्ड किरायानामा अनिवार्य कर दिया गया है।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026—
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत प्रदेश के सभी 41 जिलों में प्रतिदिन सड़क सुरक्षा गतिविधियों का कैलेंडर तैयार कर एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग, हेल्थ एवं रिस्पॉन्सिव टेप ड्राइव चलाई जा रही है। इस अभियान से माह भर में 2 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। सभी गतिविधियाँ 'माय भारत पोर्टल' पर भी अपलोड की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री आयुष्मान एवं सड़क सुरक्षा योजनाएँ—
डाॅ. बैरवा ने बताया कि मुख्यमंत्री आयुष्मान जीवन रक्षा योजना के अंतर्गत अब तक 215 गुड सेमेरिटन को 10,000 रुपये एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री आयुष्मान सड़क सुरक्षा योजना के अंतर्गत दुर्घटना पीड़ितों को 72 घंटे तक निःशुल्क उपचार प्रदान किया जा रहा है, जिससे अब तक 30,000 से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं तथा 60 करोड़ रुपये से अधिक व्यय किया जा चुका है। इसके साथ ही हिट एंड रन योजना के अंतर्गत 500 पंजीकृत प्रकरणों में से 269 मामलों में सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।
ई-डार एवं सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम—
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अक्टूबर 2021 से अब तक 1,32,965 सड़क दुर्घटनाएँ ई-डार पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी हैं तथा सभी एफआईआर में ई-डार आई डी को अनिवार्य किया गया है। सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 12 जिलों में स्वयंसेवक चिन्हित किए गए हैं तथा शेष जिलों में न्यूनतम 20-20 स्वयंसेवक जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
जीरो-फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम—
उन्होंने बताया कि देश के सर्वाधिक दुर्घटना मृत्यु वाले 100 जिलों में से राजस्थान के 8 जिले चिन्हित किए गए हैं, जिनमें प्राथमिकता से कार्ययोजना लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम 2.0 में चौपहिया व्यावसायिक वाहनों को भी शामिल करना चाहिए साथ ही दिव्यांगों की सुविधा हेतु इंट्रासिटी बसों के फ्लोर की ऊंचाई कम करने का सुझाव भी केंद्रीय मंत्री को दिया।
डाॅ. बैरवा ने बताया कि जन विश्वास अधिनियम 2.0 के अंतर्गत मोटर व्हीकल एक्ट में कई संशोधन प्रस्तावित हैं, जिनमें डीलर की परिभाषा का विस्तार, ट्रेड सर्टिफिकेट अनिवार्यता, निगम बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन एवं व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन उपलब्ध कराई जा रही है। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग द्वारा इन नवाचारों के माध्यम से राज्य को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में देश में अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में राजस्थान परिवहन विभाग के आयुक्त श्री पुरुषोत्तम शर्मा, विशिष्ट सहायक श्री भगवत सिंह भी शामिल थे।