उदयपुर में ट्रैफिक जाम हुआ आम,यातायात पुलिस और नगर निगम उदयपुर है बेलगाम !
उदयपुर में ट्रैफिक जाम हुआ आम,यातायात पुलिस और नगर निगम उदयपुर है बेलगाम !
पर्यटन सीजन में उदयपुर के ट्रैफिक जाम के हालात कुछ ऐसे है कि आपको रेलवे स्टेशन से हॉस्पिटल पहुँचने में आधा घंटा से एक घंटा लग सकता है। उदियापोल पर पूरे दिन ट्रैफिक जाम बना रहता है वही टाउन हॉल से सूरजपोल की ओर जाने वाले रास्ते में जाम अब आम हो गया है।दिल्ली गेट पर कई बार जाम की हालत ऐसी हो जाती है कि सड़को पर गाड़ियां टाउन हॉल तक रेंगती नज़र आती है। कमोबेष ऐसे हालात है कि अब एम्बुलेंस तक उदयपुर की सड़कों पर जाम में फंस जाती है। (देखे वीडियो)
अगर जाम के कारणों पर गौर किया जाये तो सबसे पहले उदयपुर की सड़कों पर अतिक्रमण का नंबर आता है जिसे हटाने में उदयपुर नगर निगम कोई पहल करता नज़र नहीं आता और यदा कदा दो तीन कार्यवाहियाँ कर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेता है। निगम की सड़कों पर अतिक्रमण पर कार्यवाही से मिलने वाले राजस्व किनकी जेबों में जा रहा है ये किसी से छूपा नहीं है।
दूसरा सबसे बड़ा कारण उदयपुर नगर निगम और स्मार्ट सिटी द्वारा करवाए जाने वाले सीवरेज और अन्य काम है जिसमे सड़क पर निर्माण होने के दौरान किये जाने वाले नियमों की सीधे अनदेखी की जा रही है। पहले तो एक साथ शहर को खोद देने का तुक समझ नहीं आता उस पर निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक मैनेज करने के लिए कई जगह पर कोई आदमी नहीं लगाया जाना एल एंड टी जैसी कंपनी की कार्य शैली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। उस पर एल एंड टी कंपनी ने मुख्य बाज़ारों में दुकानों के आगे आधी सड़क तक महीनों मशीने खड़ी कर काम रोक रखा है और उन पर नकेल कसने के लिए नगर निगम के अधिकारी बेबस नज़र आते है। (पता नहीं क्यों बेबस है ?)
तीसरा बड़ा कारण उदयपुर यातायात पुलिस की लापरवाही है जिसे आप उदयपुर की सड़कों पर स्पष्ट तौर पर देख सकते है कि मुख्य चौराहों जैसे उदियापोल ,सूरजपोल जैसी सड़कों पर यातायात पुलिस की नफरी कम होना है। पता नहीं कैसे भारी पर्यटक वाहन (बस और मिनी बस ) दूधतलाई और फतहसागर किनारे जैसे व्यस्त इलाकों में घुसते चले आते है ? जबकि इनके लिए समय निर्धारित है ! दो दिनों से फतहसागर किनारे यातायात पुलिस के जवान दिन में नदारद नज़र आ रहे है। पूरा उदयपुर शहर रेंग रहा है और जिम्मेदार चैन की बंसी बजा सो रहे है।
चौथा बड़ा कारण उदयपुर की सड़को पर फ्लाईओवर की जरुरत है जिसे उदयपुर के कुछ तथाकथित व्यापारिक संगठन बनने नहीं देना चाहते। उन्हें लगता है कि फ्लाईओवर बनने से उनकी दुकानों पर ग्राहकी कम हो जाएगी और उनकी प्रॉपर्टी का मूल्य भी कम हो जाएगा। जिसका खामियाजा उदयपुर भुगत रहा है।