एंटी-बॉडी जांच कराने का कोई मतलब नहीं है: डॉ. समीरन पांडा
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महामारी विज्ञान एवं संक्रामक रोग संभाग के प्रमुख डॉ. समीरन पांडा कहते हैं कि एंटी-बॉडी जांच कराने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि प्रतिरक्षा केवल एंटी-बॉडीज पर निर्भर नहीं करती है। वह कहते हैं, बाजार में उपलब्ध व्यावसायिक किटों का उपयोग करके शरीर में दिखने वाले एंटी-बॉडीज जरूरी नहीं कि वे एंटी-बॉडीज हों, जो कोविड-19 बीमारी से बचा सकते हैं।
डॉ. पांडा बताते हैं कि जब भी कोई व्यक्ति टीका लगवाता है तो दो तरह की प्रतिरोधक क्षमता सामने आती है। एक को एंटी-बॉडी या एंटी-बॉडी मध्यस्थता प्रतिरक्षा को निष्क्रिय करने के रूप में जाना जाता है। दूसरा एक कोशिका मध्यस्थता प्रतिरक्षा है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण है,इम्यून मेमोरी यानी प्रतिरक्षा स्मृति। टीकाकरण के बाद एक प्रतिरक्षा स्मृति उत्पन्न होती है और कोशिकाओं में मौजूद होती है एवं जब भी विषाणु शरीर में प्रवेश करता है, तो यह सक्रिय हो जाती है।
"टीके पूरी तरह से सुरक्षित हैं"
डॉ. समीरन पांडा स्पष्ट करते हैं कि अस्थमा, धूल से होने वाली एलर्जी, परागकणों की एलर्जी आदि जैसी सामान्य एलर्जी वाले लोग टीका लगवा सकते हैं। सह-रुग्णता वाले रोगी अपनी हालत स्थिर होने पर टीका ले सकते हैं। मधुमेह और अन्य प्रतिरक्षा को प्रभावित करने वाली स्थितियों से पीड़ित लोगों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे टीका लगवाएं क्योंकि उन्हें अधिक जोखिम हैं। उन्होंने कहा, “वर्तमान में भारत में उपलब्ध सभी टीके क्लीनिकल ट्रायल के तीन चरणों से गुजरे हैं। पहले चरण में ही सुरक्षा की जांच की जाती है। बाद के चरणों में प्रतिरक्षा और प्रभावकारिता का परीक्षण किया जाता है। इसलिए, मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि टीके पूरी तरह से सुरक्षित हैं।” डॉ. पांडा ने साथ ही कहा कि भारत में कोविड-19 टीकाकरण के बाद रक्त के थक्के जमने की घटनाएं या एईएफआई (टीकाकरण के बाद की प्रतिकूल घटना) बहुत कम हैं।
डॉ. पांडा यह भी सुझाव देते हैं कि विश्व स्तर पर उपलब्ध अन्य टीकों का इंतजार करनेऔर उनके कुछ समय बाद भारत में आने की उम्मीद रखने के बजाए, अभीदेश में उपलब्ध टीके लगवाना ही सबसे अच्छा विकल्प है। डॉ. पांडा ने यह समझाने की कोशिश की कि लोग अन्य टीकों का इंतजार कर रहे हैं, जिन्हें वे अधिक सुविधाजनक या बेहतर समझ सकते हैं, लेकिनविषाणु इंतजार नहीं कर रहा है। देश में अब भी यह विषाणु फैल रहा है। उन्होंने कहा कि क्या होगा अगर आप इस इंतजार के दौरान संक्रमित हो जाते हैं।
डॉ. पांडा ने कहा कि विषाणु के नये वेरिएंट को देखते हुए कोविड-19 के निवारक उपायों और इलाज में कोई बदलाव का सुझाव नहीं दिया गया है। “सभी म्युटेंट, चाहे वह वायरस के स्ट्रेन्स का प्रसार कर रहा हो या नए रूप हो, उनके प्रसार का तरीका एक जैसा ही है। मास्क पहनना, भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचना, हाथों की सफाई जैसी सावधानियां अब भी विषाणु के प्रसार को नियंत्रित करने के प्रभावी तरीके हैं। ”
उन्होंने कहा कि जहां तक कोविड-19 के इलाज का सवाल है, हमें नहीं लगता है कि कोरोना विषाणु के नए वेरिएंट को देखते हुए मौजूदा मानक उपचार विधियों को बदलने की कोई जरूरत है।
Byline/Credit by : Dinesh Bhatt
Email:dinesh.bhatt@newsagencyindia.com
Disclaimer : All the information on this website is published in good faith and for general information purpose only. www.newsagencyindia.com does not make any warranties about the completeness, reliability and accuracy of this information. Any action you take upon the information you find on this website www.newsagencyindia.com , is strictly at your own risk

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.wincompete&hl=en