जयपुर, 22 अगस्त। नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में 24 अगस्त तक आयोजित दस दिवसीय ‘तीजोत्सव-2026' में राजस्थान की लोक संस्कृति, खान-पान और हस्तशिल्प के साथ पारंपरिक लाख शिल्प भी आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले में रंग-बिरंगी लाख की चूड़ियों और आभूषणों के स्टॉल पर महिलाओं एवं अन्य आगंतुकों की विशेष रुचि देखने को मिल रही है। पारंपरिक तकनीक से तैयार इन चूड़ियों में राजस्थान की हस्तकला, रंगों और डिजाइन की विशिष्ट पहचान दिखाई दे रही है।
तीजोत्सव में लाख की चूड़ियां एवं आभूषण लेकर आए विक्रेता श्री इफ्तेखार अहमद ने बातचीत के दौरान बताया कि उनका परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से लाख शिल्प से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि पीढ़ियों से चली आ रही इस कला के माध्यम से लाख की चूड़ियां एवं विभिन्न आभूषण तैयार किए जा रहे हैं। वह बताते हैं कि लाख की चूड़ियां राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा और श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं तथा इनके रंग-बिरंगे डिजाइन लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं।
श्री इफ्तेखार अहमद ने बताया कि उनकी पारंपरिक कला को देश के साथ-साथ विदेशों में भी सराहना मिली है। विभिन्न देशों में आयोजित प्रदर्शनियों में उन्हें अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया जाता रहा है। इन अवसरों के माध्यम से वे राजस्थान की पारंपरिक लाख कला और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग देशों में लोगों द्वारा लाख की चूड़ियों एवं आभूषणों के प्रति दिखाई गई रुचि से उन्हें अपनी पुश्तैनी कला को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि बीकानेर हाउस के तीजोत्सव में वे पहली बार शामिल हुए हैं और यहां आगंतुकों से मिल रहे स्नेह एवं उनकी कला के प्रति रुचि से वे काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर आयोजित विभिन्न प्रदर्शनियों और मेलों में शिल्पकारों को मंच एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे उन्हें अपनी कला के प्रदर्शन और विपणन का अवसर मिलता है।
लाख के इतिहास के संबंध में श्री इफ्तेखार अहमद ने बताया कि लोक परंपराओं में लाख का संबंध महाभारत काल के लाक्षागृह की कथा से भी जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से चली आ रही इस कला को अपने साथ आगे बढ़ाने पर उन्हें गर्व है और उनका प्रयास है कि लाख शिल्प की यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचती रहे। इस आधुनिक समय में पारंपरिक हस्तशिल्प को नए बाजार और नए ग्राहकों से जोड़ना आवश्यक है। तीजोत्सव जैसे आयोजन शिल्पकारों को सीधे उपभोक्ताओं से संवाद करने और अपनी कला की विशेषताओं को लोगों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करते हैं।
लाख की चूड़ियों में राजस्थान की पारंपरिक पहचान—
मेले में प्रदर्शित लाख की चूड़ियों में पारंपरिक रंग संयोजन, आकर्षक डिजाइन और हस्तनिर्माण की बारीकियां देखने को मिल रही हैं। आगंतुक इन चूड़ियों को राजस्थान की पारंपरिक पहचान और हस्तशिल्प की स्मृति के रूप में पसंद कर रहे हैं। इस प्रकार तीजोत्सव में लाख शिल्प न केवल खरीदारी का माध्यम बना है, बल्कि राजस्थान की पीढ़ियों पुरानी हस्तकला को जानने और समझने का अवसर भी दे रहा है।