जयपुर, 24 मार्च। विश्व टीबी दिवस के अवसर पर राज्य में “टीबी मुक्त भारत अभियान-100 दिवसीय” का शुभारंभ सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के सभागार में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेंद्र सिंह खींवसर की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।
इस अवसर पर चिकित्सा मंत्री ने कहा कि टीबी (क्षय रोग) केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक रूप से व्यक्ति एवं परिवार को प्रभावित करने वाली एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “टीबी मुक्त भारत” के संकल्प की दिशा में राजस्थान पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि राज्य ने वर्ष 2025 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 1 करोड़ 75 लाख से अधिक संभावित टीबी रोगियों की स्क्रीनिंग की है, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य में चिन्हित उच्च जोखिम वाले ग्रामों में आयुष्मान आरोग्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना एवं टीबी के मामलों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करना है।
श्री खींवसर ने कहा कि यह 100 दिवसीय अभियान जनभागीदारी के माध्यम से जनआंदोलन का रूप लेगा तथा प्रत्येक मरीज तक समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। इस अवसर पर चिकित्सा मंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा द्वारा नोएडा में किए गए शुभारंभ कार्यक्रम को ऑनलाइन वीसी के माध्यम से सभी उपस्थित अधिकारियों और जन समुदाय के साथ सुना और टीबी रोगियों को निक्षय पोषण किट का वितरण भी किया।
प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि राजस्थान ने डेटा एवं तकनीक आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए उच्च जोखिम क्षेत्रों की पहचान की है। राज्य के 11,184 चिन्हित ग्रामों एवं शहरी क्षेत्रों में शिविरों के माध्यम से टीबी उन्मूलन की गति को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में टीबी स्क्रीनिंग का कवरेज बढ़कर 100 प्रतिशत हो गया है। यह बड़ी उपलब्धि है। हम जांच और उपचार के साथ—साथ जनसहभागिता बढ़ाकर राजस्थान को टीबी मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, डॉ. अमित यादव ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से टीबी के साथ-साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप एवं अन्य गैर-संचारी रोगों की भी जांच की जाएगी, जिससे आमजन को समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में टीबी उन्मूलन की दिशा में मिशन मोड में कार्य किया जा रहा है। स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाने के साथ ही तकनीक का अधिकाधिक उपयोग कर प्रभावी जांच और उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
निदेशक, जन स्वास्थ्य, डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि राज्य में प्रत्येक उच्च जोखिम क्षेत्र में सघन स्क्रीनिंग, NAAT जांच एवं उपचार सेवाओं को मजबूत किया गया है, जिससे संभावित मरीजों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने बताया कि 100 दिवसीय अभियान के तहत
शिविरों में 14 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों की जांच की जाएगी, जिसमें टीबी स्क्रीनिंग,हीमोग्लोबिन (HB), ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर (BP), बॉडी मास इंडेक्स (BMI), छाती का एक्स-रे शामिल होंगे। किसी व्यक्ति का एक्स-रे असामान्य पाया जाता है, तो उसका बलगम सैंपल लेकर NAAT जांच की जाएगी। NAAT जांच में टीबी की पुष्टि होने पर मरीज को तुरंत निःशुल्क एवं मानक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
अभियान के अंतर्गत सामूहिक निवास स्थलों में रहने वाले व्यक्ति समूहों पर विशेष फोकस किया जाएगा, जिनमें छात्रावास, वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम, जेल, किशोर निरोध केंद्र, निराश्रित केंद्र,रैन बसेरा, बीपीएल आवास, औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर भी सघन स्क्रीनिंग एवं जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।
राज्य क्षय रोग अधिकारी, डॉ. पुरुषोत्तम सोनी ने बताया कि 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राज्य में चिन्हित उच्च जोखिम क्षेत्रों में सघन स्क्रीनिंग, उन्नत जांच तकनीकों एवं समयबद्ध उपचार के माध्यम से टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक सशक्त किया जाएगा। निक्षय मित्र पहल के माध्यम से मरीजों को पोषण एवं सामाजिक सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।
राज्य नोडल अधिकारी, टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान, डॉ. एसएन धौलपुरिया ने बताया कि राज्य सरकार टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़ाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वर्ष 2025 में 3,350 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया था, और वर्ष 2026 में इस संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी एवं जन-जागरूकता के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा।