एक साल तक दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठायी जिम्मदारों ने,स्वरुप सागर पर आज भी है लीकेज (सीपेज) !
उदयपुर शहर की लाइफ लाइन है झीलें। झीलें जो कि उदयपुर वासियों को पीने का पानी उपलब्ध करवाती है बल्कि पर्यटन का आधार बन लोगों का पेट पालने में मदद भी करती है। समूचा पीछोला बांध/झील मिट्टी की फ़ीलिंग और मज़बूत दीवारों के बीच सैकड़ो लीटर MCFT पानी को आज तक रोक कर रखे है जो मेवाड़ी निर्माण कला की उत्कृष्ट्ता का अनुपम नमूना है।
इतिहास स्वरूपसागर का
रंग सागर के उत्तर में स्वरुप सागर है जिसके पानी में कलालों का शिव मंदिर होने के कारण इसे कलाल्या शिव सागर भी कहते है। महाराणा स्वरुप सिंह के समय इसका पूर्वी बाँध टूट गया,उसको 1847 में दुबारा बनवा कर इस हिस्से का नाम स्वरुप सागर रखा गया। महाराणा सज्जन सिंह जी ने पीछोला के बीच के सारे बाँधो को एक साथ मिलाकर एक पीछोला का रूप दे दिया।
दूध तलाई,अमरकुण्ड ,रंगसागर ,स्वरुप सागर पीछोला झील के विस्तार का ही हिस्सा है। पहले पीछोला की सीमा केवल सिताब पोल तक ही थी और इसके आगे अमर चाँद बड़वा द्वारा बनाया गया अमर कुंड था और इसके चारो ओर पक्के घाट और फव्वारे लगे हुए हुए थे जिसे बाद में दक्षिण उत्तर दिशा के घाट को तोड़ कर महाराणा सज्जन सिंह ने इसे पीछोला में शामिल करवा लिया।
कहाँ और कितना हो रहा लीकेज :
सबसे बड़ा लीकेज (सीपेज) हाथीपोल के पास मीट मार्केट से लगती स्वरूपसागर की पाल के ठीक नीचे है। (देखे वीडियो) लीकेज (सीपेज) इतना बड़ा है कि लगभग 10 लीटर पानी प्रति सैकंड व्यर्थ बह कर नालियों में बहा जा रहा है। लगभग एक साल पहले नगर निगम के अधिकारियों ने दौरा कर मौके को देखा था और पानी का इस्तेमाल दिल्ली गेट फ़व्वारे और हॉस्पिटल में काम में लेने की निरर्थक बात कही थी जो योजना ही बन कर रह गयी । भला बारह महीने थोड़े ही बहता है ये पानी जिससे ये फव्वारे चलाएंगे। मजे की बात ये है कि किसी अधिकारी ने लीकेज (सीपेज) रोकने अथवा बंद करने की बात नहीं कही।
उदयपुर के पीछोला झील के स्वरुप सागर की पाल पर तीन अलग अलग जगहों से लाखों लीटर पानी रोज नालियों में बह कर चला जाता है।
पीछोला झील के स्वरुप सागर की पाल के नीचे एक बड़ा लीकेज(सीपेज) (देखे वीडियो)खटीक समाज के चारभुजा नाथ मंदिर हाथीपोल के पास झरिआ मार्ग के पास मीट मार्केट के ऊपर है जिसमे दरअसल एक कुई है जो कि 40 फ़ीट गहरी है और ये पाल के लेवल से नीचे है। न्यूज़ के साथ पोस्ट किये वीडियो में आप व्यर्थ बहता हज़ारो लीटर स्वच्छ पानी देख सकते है।
दूसरा लीकेज स्वरूपसागर की पाल के ठीक नीचे मीट मार्केट के पीछे देख सकते है। (देखे वीडियो) लीकेज (सीपेज) इतना बड़ा है कि लगभग 10 लीटर पानी प्रति सैकंड व्यर्थ बह कर नालियों में बहा जा रहा है।
साथ ही बारिश के बाद झील भर जाने के बाद ऊपर पाल की तरफ अख़ाडे के पास से भी लगभग इतना ही पानी नालियों में बहता रहता है। कोई जिम्मेदार यह नहीं सोच रहा कि अगर ये लीकेज (सीपेज) रोक दिए जाए तो उदयपुर शहर को 30 दिन से ज्यादा का पानी अतिरिक्त मिल जाये और झीलें भी ज्यादा दिन तक भरी रह कर खूबसूरत रह सके। लेकिन झील से जुड़े स्थानीय निकायों (नगर निगम उदयपुर,नेशनल लेक कंज़र्वेशन प्रोजेक्ट और नगर विकास प्रन्यास) और अन्य झील संरक्षण से जुड़े संगठन अब तक चुप ही बैठे है। पानी बह जाये तो बह जाये, इन्हे क्या ?
मरता है तो मर जाये पीछोला और स्वरुपसागर ! एक साल में भी लीकेज (सीपेज) नहीं रोक पाया उदयपुर नगर निगम स्वरुप सागर के ! नहीं है कोई योजना पीने के पानी को व्यर्थ बहते रोकने की ! केवल देखकर इतिश्री कर ली अपने कर्त्तव्य की जिम्मेदारों ने ! जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ता। बेहद खूबसूरत झील पीछोला के स्वरुपसागर पाल से इतना ज्यादा पानी व्यर्थ बह जाता है जितना हम उदयपुरवासी साल भर पी नहीं पाते।
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