सूरजपोल की हत्या की नगर निगम उदयपुर और स्मार्ट सिटी ने,पेड़ों की चिंता भी नहीं !
सूरजपोल से जितने राहगीर ग़ुज़रे सब के सब आज अवाक रह गये। सूरजपोल की पहचान पुरानी गुमटी आज नगर निगम उदयपुर और स्मार्ट सिटी उदयपुर की वज़ह से आज धूमिल हो गयी। कल रात चौराहे निर्माण से जुड़ी कंपनी ने इसे जमींदोज़ कर दिया। गुमटी हटाकर हेरिटेज का संरक्षण नहीं किया जाकर उसे निगम ने हटवा दिया।
वैसे भी सूरजपोल चौराहे पर स्थित गार्डन की हालत इतनी बदतर थी कि इसमें पहले गरदुल्ले बैठे रहते थे और नशा करते थे। पौधों नाम मात्र और गन्दगी का ढेर लगा रहता था। चौराहे और पार्क की दूर्दशा देखकर सामाजिक और पर्यावर्णीय सरोकार के तहत न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम ने इसे गोद लेकर हरा भरा करने का बीड़ा उठाया। इस हेतु 19 फ़रवरी 2019 को सारी औपचारिकताओ को पूरा कर न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम ने फाइल निगम को जमा करवा दी।
सारी औपचारिकताओ निगम के अधिकारियों ने पूरी कर हस्ताक्षर भी कर दिए जिसमे निगम आयुक्त,महापौर,उद्यान विभाग के अधिकारियों ने अनुमति भी दे दी।सभी जगह अनुमति मिल चुकी थी और सिर्फ एक पत्र पर आयुक्त महोदय के हस्ताक्षर बाकी रह गए थे और महापौर साहब भी अपने साइन एक पत्र पर करना भूल गए थे जिसे बाद में जब चुनाव समाप्त हो जाने पर दोबारा महापौर साहब के पास भेजा गया तो अब महापौर साहब ने नोट लगा कर लिखा कि "पार्क का कार्य निर्माणाधीन है बाद में समिति की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। " आपको बताते चले कि निर्माण से तीन महीनें पहले न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम ने पार्क गोद लेने के लिए अप्लाई किया था।
धन्य है उदयपुर नगर निगम की कार्य प्रणाली जहाँ एक फाइल पर हस्ताक्षर होने में 5 महीने लग जाते है।
कहानी यही खत्म नहीं होती। वृक्षारोपण और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम ने सूरजपोल के गार्डन वृक्षारोपण करवाया। टीम के सदस्य नियमित तौर पर सूरजपोल गार्डन में पानी डलवाते रहे और साथ ही दो ट्रैक्टर वर्मी कम्पोस्ट खाद डलवाया। गार्डन की दीमक हटवाने के लिए ट्रीटमेन्ट भी करवाया। साथ ही चूहों से पेड़ो और पौधों के बचाव के लिए दवाई डलवाई गयी।
100 दिनों में परिणाम अब दिखने लगे थे। सारे सूखे पेड़ अब मई की गर्मियों में भी हरे होकर फूलों से लकदक हो गए थे और आज भी है। जहाँ उदियापोल के गार्डन जिसमे नियमित तोर पर रखरखाव होता है ,के चम्पा के पेड़ों की पत्तियाँ तक जल गयी थी वही आज भी सूरजपोल के सारे चम्पा के पेड़ आज भी खुश्बूदार फूलों और हरी पत्तियों से अटे पड़े है।
सूरजपोल के आसपास के दुकानदार कहने लगे कि सूरजपोल के पेड़ कभी इतने हरे भरे नहीं रहे। साथ ही प्लास्टिक के सामान का ठेला लगाने वाले मोहसिन तो इतने खुश हुए कि उन्होंने नियमित तौर पर गार्डन में खुद पानी पिलवाया और आज भी वे दिन में कई बार गार्डन का ट्यूबवैल चलाकर जितनी देर पानी आता है ,उतनी देर पिलाते रहते है। मोहसिन जैसे एक और ठेले वाले संजय जी भी गार्डन में पानी पिलाने में कभी पीछे नहीं रहते है।
विगत पाँच महीनों में जब न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम गार्डन और पौधों की देखभाल कर रही थी,तब एक भी दिन निगम की उद्यान शाखा का कर्मचारी अपनी स्वेच्छा से यह देखने तक नहीं आया कि वहाँ के पौधे जीवित है या नहीं ? नाहीं कभी स्वास्थ्य शाखा का कर्मचारी अपने स्तर पर स्वेच्छा से सफाई करने आया। दोनों विभाग सफ़ाई की ज़िम्मेदारी एक दूसरे पर थोपते रहे और कमोबेश आज तक पिछले पांच महीनो में एक बार सफाई के लिए वहाँ आदमी आया और उसके बाद न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम ने कई बार सफाई करवाई।
साथ ही न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम ने चौराहे के पौधे और पेड़ (जो निर्माण कार्य में बीच में आरहे है ) शिफ्ट करने के लिए निर्माण और उद्यान विभाग के अफसरों को कई बार आग्रह किया लेकिन चम्पा ,बोटल पाम और अमरुद के बड़े पेड़ अभी तक शिफ्ट नहीं किये गए है। जितने भी छोटे पौधे उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने शिफ़्ट किये वे सब के सब मर गए। साथ ही न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम द्वारा गमलों में लगाए गए हज़ारों रूपये के पौधों को भी गमले नर्सरी शिफ़्ट करने के दौरान उखाड़ फेंका गया।
सूरजपोल पर गरदुल्ले और शराबियों के बारे में जब जिला पुलिस अधीक्षक श्री कैलाश विश्नोई जी को बताया गया तो उन्होंने सहदृयता दिखाते हुए तुरन्त इस बावत कार्यवाही के लिए सूरजपोल थानाधिकारी श्री रामसुमेर जी को कहा और और रामसुमेर जी और उनकी टीम ने गरदुल्लों और शराबियों से सूरजपोल को मुक्ति दिलाने में महत्ती भूमिका निभायी।
ऐसा नहीं है कि सूरजपोल गुमटी की ऐतिहासिकता को देखते हुए न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम ने इसे बचाने की कोशिश नहीं की। चौराहे का काम शुरू होने से पहले जिम्मेदार अधिकारियों सहित अन्य लोगों को पहले ही बता दिया गया कि सूरजपोल गुमटी हेरिटेज है और इसे हटाना उचित नही होगा। साथ ही न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम ने अन्य सुझाव दिए जिसे स्मार्ट सिटी के अधिकारी ने गंभीरता से लेकर डिज़ाइन में बदलाव कर सूरजपोल को खूबसूरत बनवाने में कसर नहीं छोड़ी।
मजे की बात ये है कि नगर निगम उदयपुर हेरिटेज के संरक्षण के नाम पर पहले ही अब तक दो जगह पर पूरा महत्व की धरोहरों को खराब कर चुकी है और आज उन्होंने सूरजपोल की विरासत की हत्या कर दी।
इसके अलावा राजस्थान हेरिटेज कमिशन एक्ट 2018 के नियमों की जानकारी तो दूर यहाँ के अफसर सिर्फ अपने हिसाब से काम करवाने के लिए ज्यादा लालायित है।