ACB द्वारा गिरफ्तार निलंबित अधिकारी मनीष अग्रवाल एवं इंद्र सिंह राव के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति की स्थित
जयपुर, 13 अगस्त। भ्रष्टाचार के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार निलंबित अधिकारी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी मनीष अग्रवाल एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी इंद्र सिहं राव आईएएस को उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी है। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा इन दोनों के विरूद्ध अभियोजन स्थिति इस प्रकार है। आपराधिक प्रकरणों में उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा अभियोजन प्रस्तावों पर निर्णय हेतु सामान्यतः 90 दिवस की सीमा निर्धारित की है।
इंद्र सिंह राव के विरूद्ध राज्य सरकार द्वारा अभियोजन स्वीकृति पूर्व में ही दे दी गई है एवं इंद्र सिंह राव भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होने से इनके विरूद्व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति हेतु अभियोजन प्रस्ताव मय राज्य सरकार की अभिशंषा केन्द्र सरकार को प्रेषित किया गया है। इंद्र सिंह राव के विरूद्व अभियोजन स्वीकृति केन्द्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है।
मनीष अग्रवाल के विरूद्ध 18 जनवरी 2021 के एफआईआर दर्ज की गई थी । प्रारम्भिक जांच के बाद 2 फरवरी 2021 को अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया एवं अनुसंधान शुरू किया गया मनीष अग्रवाल के विरूद्ध 9 जुलाई 2021 को एसीबी द्वारा अभियोजन प्रस्ताव प्रस्तुत किये गये हैं। कार्मिक विभाग द्वारा 16 जुलाई 2021 को एसीबी के जांच अधिकारी से प्रकरण के संबंध में विचार-विमर्श किया गया ।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि नैसर्गिक न्याय के सिद्वान्त को ध्यान में रखते हुए प्रकरण में आरोपी अधिकारी मनीष अग्रवाल का भी अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया गया जिस पर अग्रवाल द्वारा अपना पक्ष रखने हेतु 15 दिवस का समय चाहा गया परन्तु आदिनांक तक भी अग्रवाल द्वारा अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया है। प्रकरण के परीक्षण के दौरान एसीबी से प्रकरण से संबंधित वांछित अतिरिक्त दस्तावेज चाहे गये जो कार्मिक विभाग को 6 अगस्त 2021 को प्राप्त हुए। कार्मिक विभाग द्वारा प्रकरण का नियमानुसार परीक्षण किया जाना प्रक्रियाधीन है। परीक्षणोपरान्त अभियोजन प्रस्ताव सक्षम स्तर पर निर्णयार्थ प्रस्तुत किये जायेगें।
राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के आपराधिक प्रकरणों में एसीबी को समय पर अनुसंधान पूर्ण कर अभियोजन प्रस्ताव प्रेषित करने एवं कार्मिक विभाग को प्राप्त अभियोजन प्रस्तावों पर नियमानुसार परीक्षण कर प्रकरण निर्णयार्थ प्रेषित करने हेतु निर्देशित किया है जिससे अरोपियों को तकनीकी विषयों का लाभ ना मिले । राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई के लिए कृतसंकल्पित है।
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