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News Agency India September 02, 2021 06:38 AM IST

स्लरी में शामिल है केमिकल और प्लास्टिक, भुगतना होगा उदयपुर के ग्रामीणों और नगर वासियों को

पहले स्लरी डंपिंग यार्ड चित्रकूट नगर की पहाड़ियों में शहर के ऊपर बनाया गया। मूलतः मास्टर प्लान में यह क्षेत्र जलाशय निर्माण के लिए प्रस्तावित थी लेकिन बाद में मार्बल प्रोसेसर्स को लीज पर दे गई। जंहा बेतरतीब पत्थर के बांध बनाकर स्लरी भरी गई । कुल पांच स्लरी के तालाब बन गए। जल संसाधन विभाग ने स्वयम माना था कि ये बांध तकनीकी रूप से गलत है। अब्दुल रहमान बनाम राज्य सरकार के फैसले के तहत 2 मीटर से ऊंची बांध दीवारें बनाना गलत था, फिर भी बना दी गई। ये बांध कभी भी ढह सकते है, नीचे खेल गांव व आगे पूरी बस्ती है। यह क्षेत्र रूप सागर व आयड़ का जल प्रवाह क्षेत्र है। जब यंहा जगह पूरी तरह भर गई तो मदारडा में नया डंपिंग यार्ड बनाया गया। सभी सरकारी एजेंसियों ने कहा कि एक बूंद भी स्लरी नही बहेगी।


खतरनाक है स्लरी स्लरी जब सूखती है तब हवा के साथ उड़ती है। इसके माइक्रो पार्टिकल इंसानों, पशुओं, पौधों सभी के श्वसन को बाधित करते है। वहीं यह पार्टिकल जल शिराओं वाटर वेन्स को क्लोग भी कर सकते है अर्थात भूजल पुनर्भरण को बाधित व भूजल में जाकर उसकी गुणवत्ता का सत्यानाश !

सबसे खतरनाक बात यह कि यह स्लरी केवल मार्बल व ग्रेनाइट की डस्ट ही नही है, इन पत्थरों ,ब्लॉक्स को काटने के लिए कई तरीके के केमिकल्स भी काम मे लिए जाते है। जो जल स्रोत में जाकर पर्यावरणीय प्रदूषण करते है। इंसानों के लिए गंभीर खतरा क्योंकि इनसे स्किन, लंग्स, आंखों, मस्तिष्क, किडनी को डेमेज पंहुच सकता है।

प्लास्टिक का विसर्जन किसकी मंजूरी से : मदारड़ा साइट पर प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग की मंजूरी किस ने दी , यह पूछा जाना चाहिए। और यदि बिना मंजूरी प्लास्टिक वेस्ट डाल रहे है, तो इस अपराध पर मुकदमा दर्ज क्यो नही हुआ? यह प्लास्टिक भी लीच होकर भूजल व सतही जल को खराब करेगा। गर्मी में इससे डाइऑक्सिन जैसी विषैली गैसे निकलेगी। इससे थायरोइड, केंसर, नपुसंकता के खतरे है।


अतः तुरंत प्रभाव से स्थानीय ग्राम वासियों, विशेषज्ञों, प्रदूषण नियंत्रण मंडल , जल संसाधन विभाग के दल को पूरी जांच कर इस स्लरी प्रवाह को रोकना चाहिए। तथा बड़ी, मदार से लेकर उदयसागर तक के जल ग्रहण क्षेत्र, आयड़ बनास के जल ग्रहण क्षेत्र को बचाते हुए स्लरी का समाधान करना चाहिए। प्लास्टिक विसर्जन पर दोषियों को जेल होनी चाहिए।


आलेख : डॉ अनिल मेहता

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