उदयपुर के महाराणा भूपाल अस्पताल के उद्घाटन में चाँदी की चाबी हुई थी प्रयोग,रेड कारपेट थे बिछाये !
डॉक्टर शेफर्ड के आने से पहले डॉक्टर समरविले उदयपुर में मिशनरी और चिकित्सा की कमान संभालने के छोटे-छोटे प्रयास कर रहे थे। इसी बीच डॉक्टर शेफर्ड अपने देश में ही मिशनरी के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे थे ताकि मिशनरी से मिलने वाले चंदे से राजस्थान के उदयपुर में अस्पताल बनवाया जा सके। जहां एक और डॉक्टर समरविले मेवाड़ में अस्पताल और चर्च के लिए जमीन लेने के लिए जुगत लगा रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी क्योंकि किसी भी विदेशी के लिए मेवाड़ जैसे क्षेत्र में जमीन खरीदना या अनुदान पर लेना लगभग असंभव था। वह भी शहर के बीचो बीच !
इसके साथ ही जमीन के लिए मेवाड़ के महाराणा की अनुमति भी आवश्यक थी। इसी बीच महाराणा गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं और डॉक्टर समरविले अपने रेजिडेंट सर्जन को लेकर महाराणा के इलाज के लिए जाते हैं। इलाज के बाद महाराणा स्वस्थ हो जाते हैं और डॉक्टर समरविले को ₹3000 उनके इलाज के मेहनताने के रूप में देने की पेशकश करते हैं। डॉक्टर समरविले, इस राशि को लेने से इनकार कर देते हैं और कहते हैं कि उन्होंने यह सेवा पैसे के लिए नहीं की है और इसके बदले यदि महाराणा कुछ देना चाहते हैं तो हॉस्पिटल के लिए जगह दे दे और ये ही महाराणा का सबसे बड़ा गिफ्ट होगा। महाराणा इस बात से सहमत हो जाते हैं और धान मंडी में अस्पताल के लिए जगह देने को राजी भी हो जाते हैं।
इसी बीच डॉक्टर शेफर्ड अपने देश से मेवाड़ लौट कर आते हैं और डॉक्टर समरविले से मिलकर आगे अस्पताल और चर्च बनाने की तैयारियां शुरू करते हैं। तभी एक बुरी खबर आती है महाराणा दुबारा गंभीर तरीके से बीमार हो जाते हैं। डॉक्टर मूलन जो कि रेजिडेंट सर्जन से डॉक्टर शेफर्ड के साथ जाकर महाराणा के इलाज की पेशकश रखते हैं, लेकिन इलाज होने से पहले ही महाराणा की मृत्यु हो जाती है और मेवाड़ में अस्पताल और चर्च बनाने का डॉक्टर शेफर्ड का सपना दुबारा टूट जाता है।
क्योंकि महाराणा सज्जन सिंह अस्पताल और चर्च की जमीन के बारे में कोई ठोस बात अपने अधिकारियों और संबंधियों को बता कर नहीं जाते हैं, ऐसे में डॉक्टर शेफर्ड का अस्पताल और चर्च बनाने का सपना ठंडे बस्ते में चला जाता है।
इसके बाद मेवाड़ की गद्दी पर महाराणा फतह सिंह जी का शासन हो जाता है लेकिन इससे पहले डॉ शेफर्ड की महाराणा सज्जन सिंह जी के प्रति निष्ठा भाव और इलाज करने का मन देखते हुए मेवाड़ का राज परिवार इन्हें ₹1000 गिफ्ट के रूप में देता है और डॉक्टर शेफर्ड इसे स्वीकार कर लेते हैं और शेफर्ड घोषणा करते हैं कि यह जो पैसा मिला है वह हॉस्पिटल बनाने के लिए महाराणा के नाम पर खर्च करेंगे।
जैसे ही महाराणा फतह सिंह गद्दी नशीन होते हैं तो वह अपने पुरखों द्वारा दिए गए वचन को ध्यान में रखते हुए को अस्पताल और चर्च बनाने के लिए राजी हो जाते हैं और साथ ही हॉस्पिटल का निर्माण शुरू हो जाता है। लेकिन यहां पर एक और दूसरी घटना जो प्रभावित करती है वह यह कि इससे पूर्व में जो जमीन अस्पताल के लिए सुझाव गई थी ,उसे लेकर असमंजस पैदा हो जाता है क्योंकि मंडी में पहले से ही बहुत ज्यादा जगह उपलब्ध नहीं थी और अस्पताल प्रांगण के लिए एक मैदान की भी आवश्यकता थी जो कि धान मंडी में उपलब्ध नहीं थी।
लेकिन महाराणा के सहयोग से वर्तमान में जहां पर महाराणा भूपाल अस्पताल है वहां पर अस्पताल का निर्माण शुरू हो जाता है और 1886 के अंत तक अस्पताल का निर्माण पूरा हो जाता है और महारानी साहिबा के माध्यम से उद्घाटन होना प्रस्तावित किया जाता है जिसे महारानी साहिबा द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है। महारानी साहिबा के स्वागत के लिए वर्तमान अस्पताल से बाजार से लेकर अस्पताल तक लाल कपड़े से टेंट लगाए जाते हैं। इस उद्घाटन समारोह में भारत के अन्य इलाकों की मिशनरी से जुड़े लोग जैसे श्रीमती डब्ल्यू एम रॉब, जो नसीराबाद से थी ,जेम्स ग्रे और मिस ग्रे अजमेर से,रेव डब्ल्यू एफ मार्टिन नसीराबाद से, रेव सी एस थॉम्पस खेरवाड़ा से, मेजर एंड मिसेज कर्जन वायली, ए विंगेट (मेवाड़ सेटलमेंट अफसर) , कैंपबेल थॉमसन( एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मेवाड़) शाही समारोह में उपस्थित होते हैं और ठीक 11:15 बजे महारानी साहिबा का आगमन होता है। महारानी साहिबा के साथ में कर्नल वॉल्टर (रेजिडेंट मेवाड़ ) अस्पताल में उपस्थित होते हैं जिन को सबसे पहले डॉक्टर शेफर्ड द्वारा सम्मान स्वागत किया जाता है। डॉक्टर शेफर्ड अस्पताल की चाबी को महारानी साहिबा को उद्घाटन के लिए प्रस्तुत करते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह चाबी चांदी की बनाई गई थी। इस चाबी के मुख पर महारानी साहिबा का चित्र होता है और आउटर रिंग पर इंग्लिश में महाराणा द्वारा किया गया गिफ्ट लिखा होता है। इस तरह उदयपुर का पहला मिशन हॉस्पिटल दिसंबर 1886 में उद्घाटित हो जाता है।
जहां एक और मिशनरी से जुड़े अधिकारी मेवाड़ के लोगों के स्वास्थ्य कामना के लिए प्रार्थना करते हैं। वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम में तत्कालीन मेवाड़ के प्रधानमंत्री नेताजी राय पन्नालाल जी राणा की तरफ से दिए गए संदेश को पढ़कर सबको सुनाते हैं।
वर्तमान महाराणा भूपाल चिकित्सालय के 1886 के उद्घाटन के बाद डॉक्टर शेफर्ड मेवाड़ में शल्य चिकित्सा का सूत्रपात्र करते हैं और ज्यादा से ज्यादा संख्या में मरीजों का इलाज करते हैं। साथ ही छोटे-मोटे ऑपरेशन कर लोगों को बीमारियों से निजात दिलाते हैं। इसी बीच डॉक्टर शेफर्ड के इलाज के कारण कई स्थानीय और भी लोग लाभान्वित होते हैं और डॉक्टर शेफर्ड की प्रसिद्धि बढ़ती चली जाती है।
इतिहासकार : जोगेन्द्र नाथ पुरोहित
शोध :दिनेश भट्ट (न्यूज़एजेंसीइंडिया.कॉम)