उदयपुर से अरबों कमाया,जरूरत पड़ने पर ठेंगा दिखाया !
कोरोना महामारी के प्रकोप से उदयपुर सहित पूरा विश्व जूझ रहा है। भारत सरकार के साथ कई सामाजिक संगठन अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए जरूरतमंद लोगों तक खाना राशन ,मास्क और दवाइयां लोंगो तक पहुँचा रहे है। यहाँ तक कि ऐसे लोग भी जरूरत मंदो की मदद कर रहे है जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नही है फिर भी संकट की इस घड़ी में ऐसे लोग मिसाल पेश कर उदयपुर का नाम रोशन कर रहे है। कहीं कोई गरीबों के लिए भोजन बना कर सामाजिक संस्थाओं को दे रहा है तो कोई अपने स्तर पर जानवरों और पक्षियों तक को भोजन उपलब्ध करवा रहा है। हर कोई अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहा है।
वहीं शहर की सबसे प्रतिष्टित कंपनिया अभी तक कोरोना महामारी में मानवता की सहायता के लिए उदयपुर को एक रुपया तक उपलब्ध नहीं करवा पायी है। कहने को इन कंपनियों का करोडों का टर्न ओवर है, लेकिन इनकी सामाजिक जिम्मेदारी की बानगी देखिये कि जब उदयपुर को इनकी मदद की जरूरत आयी तब इनकी तिजोरियो से अब तक एक धेला तक नही निकला।
क्या इसे ही सामाजिक प्रतिबद्धता कहते है कि जब समाज और शहर को इनकी मदद की जरूरत पड़ी तब ये कंपनियां गायब सी हो गयी।
ऐसा ही केस शहर की इलेक्ट्रिक मीटर बनाने वाली कंपनी सिक्योर मीटर्स है जिसने आज दिनांक 31 मार्च 2020 तक कोरोना महामारी में एक रुपये तक की मदद न तो स्थानीय प्रशाषन को पहुंचायी है और न ही किसी सामाजिक संस्था को कोई मदद की है।
इस बावत जब सिक्योर मीटर की सामाजिक सरोकार करने वाली टीम धरोहर से फ़ोन पर बात की गई तो बताया गया कि अभी तक सिक्योर मीटर द्वारा कोई मदद नही दी गई है और सिक्योर मीटर की तरफ से कोई मदद की जाएगी तो सूचना दे दी जाएगी।
ऐसे समय मे जब भामाशाहों की दरकार है तब सिक्योर मीटर जैसे दिग्गज आगे नहीं आ रहे है। लेकिन सनद रहे कि बुरे वक्त में ही पहचान होती है और उदयपुर वाले भूलने वाले लोग नही है।