आखिर जयसमंद छलक उठा मॉनसून के आखिरी दौर में !
आखिर जयसमंद छलक उठा मॉनसून के आखिरी दौर में !
एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील जयसमंद आखिर मॉनसून के आखिरी दौर में छलक उठी। उदयपुर से 51 किमी. दूर दक्षिण-पूर्व की ओर उदयपुर-सलूंबर मार्ग पर स्थित जयसमंद झील की प्राकृतिक खूबसूसरती और भव्यता देखकर लोग दांतो तले ऊँगली दबा लेते है। बांध की स्थापत्य कला की खूबसूरती से जयसमंद झील बरसों से पर्यटकों के आकर्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है। करीब 1 साल बाद दोबारा झील फिर से लबालब हुई है।
जयसमंद झील 100 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली गोविंद बल्लभ पंत सागर के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित झील है। जयसमंद झील 9 मील (14 किमी) चौड़ी, 30 मील (48 किमी) परिधि में, 102 फीट (31 मीटर) गहराई में है। यह झील जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य से घिरी हुई है जो कई तरह के दुर्लभ जानवरों और प्रवासी पक्षियों का आवास स्थान है।
महाराणा जय सिंह ने खुद 1685 में ढेबर झील या जयसमंद झील का निर्माण करवाया था। 36 वर्ग मील के क्षेत्र को कवर करते हुए यह तब तक एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील बनी रही जब तक कि 1902 में अंग्रेजों ने मिस्र में असवान बांध का निर्माण नहीं किया था। पानी की कमी की वजह से जय सिंह के शासनकाल के समय इस झील का निर्माण हुआ था। अपने पिता (जिन्होंने राजसमंद झील का निर्माण किया था) के नक्शेकदम पर चलते हुए महाराणा ने गोमती नदी पर एक विशाल तटबंध बनाने का निर्णय लिया, यह डेम 36.6 मीटर ऊँचा है। इस झील का नाम उन्होंने अपने खुद के नाम पर रखा और इसे ‘विजय का महासागर’ या जयसमंद कहा जाने लगा। बता दें कि 2 जून 1691 को बाँध के उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने अपने वजन बराबर सोना वितरित किया था।