उदयपुर सहित पूरे राजस्थान में स्कूल बसें चल रही अनियमित,हादसों के इंतज़ार में प्रशाषन !
जुलाई महीनें की रैलमपेल में कई बच्चें और अभिभावक जुट चुके है। अधिकतर बच्चे स्कूल बस द्वारा स्कूल पहुँचते है। लेकिन उदयपुर सहित अन्य जिलों के स्कूल सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के साथ,केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और जिला परिवहन विभाग के स्कूल बस संबधी नियमों को ताक में रख कर चाँदी कूटने मे लगे है।
क्या गाइडलाइन्स है स्कूल बस के लिए ?
- हर स्कूल बस में अग्निशामक यंत्र, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स आदि होना चाहिए।
- स्कूल का नाम और उसका टेलीफोन नंबर स्कूल बस पर लिखा होना चाहिए।
- प्रत्येक स्कूल बसों में खिड़कियों पर ग्रिल होनी चाहिए।
- छात्र सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अभिभावक या शिक्षक को स्कूल बस में नियुक्त किया जाना चाहिए।
- "स्कूल बस" बस के पीछे और सामने लिखा होना चाहिए।
- "स्कूल ड्यूटी पर" वाहन पर लिखा और प्रदर्शित किया जाना चाहिए अगर यह एक किराए की बस है
- स्कूल कैब को स्पीड गवर्नर के साथ अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा के साथ फिट होना चाहिए।
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जीपीएस को अनिवार्य घोषित किया गया है।
- स्कूल बसों में सीसीटीवी को अनिवार्य कर दिया गया है।
इन गाइडलाइन्स की पालना में उदयपुर शहर के ज्यादातर स्कूल फ़ैल है। उन्हें सिर्फ पैसे कमाने से मतलब है। आर. टी. ओ. विभाग किसी हादसे के बाद चेतने के इंतज़ार में है।उदयपुर शहर में कब दूदू क़स्बे जैसी कार्यवाही होगी जिसमे एक छोटे से कस्बे में इच्छा शक्ति दिखाते हुए अफसर ने एक दिन में 35 स्कूल बसों के चालान काट दिए। इस तरह की कार्यवाही की पूरे राजस्थान को जरुरत है।